अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी – अलिफ लैला (Abul Hasan Haru Rashid Shamsunnihar Story Hindi – Alif Laila)

शमसुन्निहार के जाने के बाद जौहरी शहजादे के पास गया। शहजादे ने उसे देखते ही कहा, मित्र, मैं तुम्हारी ही प्रतीक्षा कर रहा था। कल शमसुन्निहार की दासी ने मुझे उसका पत्र ला कर दिया किंतु उससे तो मेरी विरह व्यथा और बढ़ गई। क्या यह संभव नहीं है कि परम सुंदरी शम्सुनिहार कृपा कर के स्वयं ही कोई उपाय ऐसा करे जिससे हम दोनों का मिलन हो। इब्न ताहिर होता तो शायद कोई रास्ता निकलता। उसके जाने के बाद मेरी समझ में नहीं आता कि मैं किस तरह शमसुन्निहार से मिलूँ।

जौहरी ने कहा, इतना निराश होने की जरूरत नहीं है। मैंने आपके उद्देश्य की पूर्ति के लिए जो उपाय सोचा है उससे बढ़ कर कोई उपाय नहीं हो सकता। यह कह कर जौहरी ने सविस्तार शहजादे को बताया कि किस प्रकार मैंने दासी को राजी किया और किस तरह शमसुन्निहार ने मेरे घर आ कर मुझसे बातचीत की। उसने कहा कि आप दोनों की भेंट अवश्य होगी किंतु मेरा या आपका राजमहल में जाना ठीक नहीं है, मैं एक सुंदर भवन को किराए पर लेने का प्रबंध करूँगा जहाँ आप दोनों मिल सकें।

YOU MAY LIKE