अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी – अलिफ लैला (Abul Hasan Haru Rashid Shamsunnihar Story Hindi – Alif Laila)

एक दिन शहजादा अबुल हसन व्यापारी की दुकान पर बैठा था। उसी समय चितकबरे रंग के खच्चर पर सवार एक युवती आई। उसके आगे-पीछे दस सेविकाएँ भी थीं। वह सुंदरी कमर में एक सफेद पटका बाँधे थी जिसमें चार अंगुल चौड़ी लेस टँकी हुई थी। वह हीरे-मोती जड़े इतने आभूषण पहने थी जिनके मूल्य का अनुमान भी कठिन काम है। उसकी दासियों की सुंदरता भी झिलमिले नकाबों के अंदर से झलक मारती थी, फिर स्वयं स्वामिनी की सुंदरता का क्या कहना।

वह युवती अपनी जरूरत का कुछ सामान लेने के लिए उक्त व्यापारी की दुकान पर आई। व्यापारी उसे देख कर झपट कर आगे बढ़ा और अत्यंत स्वागत-सत्कारपूर्वक उसे दुकान के अंदर ले आया और एक सज्जित कक्ष में बिठाया। शहजादा अबुल हसन भी एक कमख्वाब से मढ़ी हुई तिपाई ले आया और सुंदरी के सामने उसे रख कर उसके पाँव उस पर रखे और झुक कर कालीन की उस जगह का चुंबन किया जहाँ उसके पाँव रखे थे।

अब उस सुंदरी ने सुरक्षित स्थान समझ कर अपने चेहरे का नकाब उतार दिया। शहजादा अबुल हसन उसके अनुपम सौंदर्य को देख कर आश्चर्यचकित रह गया। वह सुंदरी भी शहजादे के मोहक रूप को देख कर मोहित हो गई। दोनों एक दूसरे के प्रेम-पाश में जकड़ गए। सुंदरी ने कहा कि आप बैठ जाएँ, मेरे सन्मुख आपका खड़े रहना ठीक नहीं। अबुल हसन बैठ तो गया किंतु चित्रवत उसे देखता ही रहा।

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