अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी – अलिफ लैला (Abul Hasan Haru Rashid Shamsunnihar Story Hindi – Alif Laila)

जौहरी को यह सुन कर आश्चर्य हुआ। कुछ देर में उसने विदा ली। दो दिन बाद वह व्यापारी की दुकान पर आया तो उसे बंद पाया। वह समझ गया कि व्यापारी यहाँ का हिसाब समेट कर बसरा को चला गया है। जौहरी के हृदय में शहजादे के लिए बड़ी करुणा उपजी। बेचारे का एकमात्र सहारा वह व्यापारी था और वह भी चला गया इसीलिए उसने सोचा कि व्यापारी के स्थान पर वह स्वयं शहजादे का सहायक हो जाए। वह शहजादे के पास गया। शहजादे ने यह जान कर कि वह एक प्रतिष्ठित जौहरी है उसका सम्मान किया और बिस्तर से उठ कर बैठ गया और पूछा कि मेरे लायक क्या काम है। जौहरी ने कहा, यद्यपि मैं पहली बार आपसे मिला हूँ तथापि मैं आपकी सेवा करना चाहता हूँ। इस समय एक बात पूछना चाहता हूँ। शहजादे ने कहा कि जो पूछना चाहें खुशी से पूछिए।

जौहरी ने कहा, अमुक व्यापारी आपका बड़ा मित्र था। आप मुझे भी उसी की तरह विश्वसनीय समझिए। वह कह रहा था कि मैं बगदाद छोड़ कर बसरा जा बसूँगा। आज मैं उसकी दुकान पर गया तो बंद पाया। मैं समझता हूँ कि व्यापारी वास्तव में बसरा में जा बसा है। क्या आप बता सकेंगे कि उसके बगदाद छोड़ने और बसरा जाने के क्या कारण हैं।

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