अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी – अलिफ लैला (Abul Hasan Haru Rashid Shamsunnihar Story Hindi – Alif Laila)

व्यापारी का मित्र शहजादे की चिकित्सा का यत्न करने लगा किंतु व्यापारी ने कहा कि तुम कुछ चिंता न करो, यह रात भर आराम से सोएगा तो सुबह घर जाने योग्य हो जाएगा। मित्र ने दोनों के बिस्तर एक हवादार कमरे में लगा दिए। शहजादा सो तो गया किंतु कुछ ही देर में उसने स्वप्न देखा कि शमसुन्निहार मूर्छित हो कर खलीफा के पाँवों में गिर पड़ी है। वह जाग कर फिर रोने-बिसूरने लगा। व्यापारी भी खुदा-खुदा कर के रात काट रहा था ताकि सुबह होते ही अपने घर पहुँचे। वह जानता था कि उसके घरवाले चिंता में पड़े होंगे क्योंकि वह कभी रात को घर से बाहर नहीं रहता था। सुबह होते ही वह मित्र से विदा हुआ और शहजादे को ले कर अपने घर पहुँचा। उसे देख कर घरवालों को धैर्य हुआ। उसने बात बना दी कि व्यापार के एक जरूरी काम से उसे अचानक बाहर जाना पड़ गया था। अपने हृदय में वह भगवान को धन्यवाद देता था कि कितनी खतरनाक जगह से प्राण बचा कर निकल आने में सफल हुआ था।

शहजादा दो-तीन दिन व्यापारी के घर रहा, फिर उसके रिश्तेदार आए और उसे उसके घर ले गए। विदा होते समय शहजादे ने व्यापारी से कहा, भाई तुम मेरी दशा को भुला न देना। जब से मैंने स्वप्न में शमसुन्निहार को अचेत देखा है मेरी अवस्था बड़ी शोचनीय हो गई है। उसका कुछ हाल मिले तो मुझ से जरूर कहलवा देना। व्यापारी ने कहा, तुम चिंता न करो। वह विशेष दासी जरूर शमसुन्निहार का समाचार मुझ तक पहुँचाएगी।

व्यापारी दो-तीन दिन बाद शहजादे को देखने उसके घर गया तो देखा कि वह बिस्तर पर पड़ा कराह रहा है और उसके रिश्तेदार और कई हकीम उसके बिस्तर के आसपास बैठे परिचर्चा कर रहे हैं। उन लोगों ने व्यापारी को बताया कि हकीम लोग बहुत प्रयत्न कर रहे हैं किंतु शहजादे को कोई लाभ नहीं हो रहा है। दो क्षण बाद शहजादे ने आँखें खोलीं और व्यापारी को देख कर मुस्कुराया बल्कि हँसने भी लगा। हँसी के दो कारण थे। एक तो यह कि व्यापारी आया है और शमसुन्निहार की खबर लाया होगा, दूसरा कारण यह है कि हकीम लोग बेकार ही सिर खपा रहे हैं क्योंकि इस रोग का उनके पास कोई इलाज नहीं है।

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