अबुल हसन और हारूँ रशीद की प्रेयसी शमसुन्निहर की कहानी – अलिफ लैला (Abul Hasan Haru Rashid Shamsunnihar Story Hindi – Alif Laila)

यह कह कर उसने शहजादे का आलिंगन कर के उसे विदा किया। दासी ने होशियारी के साथ शहजादे और व्यापारी को दजला नदी के तटवाले मकान में पहुँचा कर कहा कि तुम बेखटके यहाँ रहो, किसी को पता नहीं चलेगा। यह कह कर दासी तो मकान में बाहर से ताला लगा कर चली गई किंतु यह दोनों काफी देर तक इधर-उधर घूम कर देखते रहे कि शायद कहीं भागने का रास्ता मिल जाए, किंतु उन्हें कोई रास्ता नहीं मिला। फिर उन्होंने झरोखे से देखा कि खलीफा के अंगरक्षक पैदल और सवार बाग में आ रहे हैं। यह देख कर इन दोनों के प्राण सूखने लगे। फिर देखा कि एक ओर से बहुत-से नौजवान सेवक हाथों में मोमबत्तियाँ लिए आ रहे हैं, उनके पीछे सौ हथियारबंद अंगरक्षक हैं और उनके मध्य खलीफा और उसका प्रधान भृत्य मसरूर हैं। जब खलीफा रात को किसी प्रेयसी के घर जाता था तो पूरी सुरक्षा का प्रबंध किया जाता था।

शमसुन्निहार अपने मकान से निकल कर बीस सुंदर सुसज्जित दासियों के साथ खलीफा के स्वागत के लिए बाग में आ खड़ी हुई। उसके साथ ही दासियाँ स्वागत गान गाने लगीं। खलीफा आया तो शमसुन्निहार आगे बढ़ी और उसने सिर खलीफा के पाँवों पर रख दिया। खलीफा ने उसे उठा कर सीने से लगाया और कहा, तुम पैरों पर न गिरो, मेरे बगल में बैठो ताकि मैं तुम्हारे सौंदर्य को देख कर तृप्त होऊँ। शमसुन्निहार खलीफा के बगल में बैठी और उसने एक गानेवाली को इशारा किया। गानेवाली ने एक विरह संबंधी गीत बड़े करुण स्वर में गाया। खलीफा ने समझा कि यह मेरी उपेक्षा से पैदा हुए अपने विरह दुख की अभिव्यक्ति करना चाहती है जब कि वास्तविकता यह थी कि शमसुन्निहार शहजादे के विरह में अपनी दशा की अभिव्यक्ति चाहती थी।

शमसुन्निहार यह विरह गीत सुन कर इतनी विह्वल हुई कि गश खा कर गिरने लगी। दासियों ने दौड़ कर उसे सँभाला। उधर शहजादा भी उस गीत को सुन कर इतना व्याकुल हुआ कि अचेत हो कर गिर पड़ा। उसे व्यापारी ने सँभाला। कुछ ही क्षणों में वही विश्वस्त दासी आ कर व्यापारी से कहने लगी, तुम दोनों का यहाँ रहना ठीक नहीं है, जल्दी से जल्दी यहाँ से चले जाओ। वहाँ सभा के रंग-ढंग अच्छे नहीं दिखाई देते। किसी क्षण भी कोई बात हो सकती है। व्यापारी बोला, तुम यह तो देखो कि शहजादा बेहोश हो गया है, ऐसी दशा में हम लोग बाहर किस तरह जा सकते हैं।

दासी झपट कर पानी और बेहोशी में सुँघानेवाली दवा ले आई और इस तरह शहजादा अपने होश में आया।

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