करणी माता मंदिर की ये रोचक बातें सुन आश्चर्यचकित हो जाएगे आप

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भारत देश एक देव भूमि है और इस देव भूमि में देवी-देवताओं के अनेक मंदिर बने हुए है जो अपने चमत्कारों और अपनी दिव्यता से प्रसिद्ध है। आज हम आप को एक ऐसे हि मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जहा सेकड़ो की संख्या में चूहे रहे है और इस मंदिर को चूहों वाला मंदिर भी कहा जाता है । तो आइये जानते है “चूहों वाला मंदिर” के बारे में…


चूहे का नाम सुनते हि कई लोग इतना डरते है की वे उत्पात मचाना शुरू कर देते है, लेकिन आज हम एक ऐसे हि मंदिर के बारे में बताने जा रहे है, जहा सैकड़ों चूहें रहते है और बड़ी बात ये की इन चूहों से न कोई बदबू और न हि कोई बीमारी फैलती है ।

हम करणी माता के उस मंदिर के बारे में आप को बता रहे है जो राजस्थान राज्य के बीकानेर शहर से करीबन 30 km की दुरी पर देशनोक में स्थित है इस मंदिर को मूषक मंदिर और चूहों वाला मंदिर भी कहा जाता है ।
करणी माता को चूहों वाली माता के नाम से भी जाना जाता है ।

इस मंदिर की एक और विशेषता है की इस मंदिर में लोगो को आज भी माता का प्रसाद चूहों का झूठा किया हुआ दिया जाता है और आज तक इन चूहों की वजह से किसी भी प्रकार की कोई बीमारी नहीं फैली है ये अपने आप में एक चमत्कार से कम नहीं है ।

आप इस मंदिर में दर्शन करने गए हो और आप को यदि सफ़ेद रंग का चूहा नजर आ जाता है तो समझ लीजिये की आप की सभी मनोकामनाये पूरी हो जाएगी ।

करणी माता के इस मंदिर में नवरात्री में माता के दर्शन के लिए भक्तो की भारी भीड़ लगती है, साथ हि मंदिर में कई तरह के कार्यक्रम भी किये जाते है ।

करणी माता के इस मंदिर के निर्माण के पीछे भी एक प्रचलित कहानी है… तो आइये जानते है इस कहानी के बारे में …

मंदिर का निर्माण इतिहासकारों के अनुसार राजपूत राजाओं के द्वारा लगभग 15 वीं शताब्दी में कराया गया था ।
कहा जाता है की बात उस समय की थी जब माँ दुर्गा ने सन् 1387 में जोधपुर के एक चारण परिवार के घर लड़की के रूप में जन्म लिया था उस लडकी का नाम रिघुबाई था, बाद में धीरे धीरे अपनी दिव्य शक्तियों से वहा के लोगो और राजाओं की आराध्य देवी बन गयी थी । कहा जाता है की उनके इन चमत्कारों के चलते वहा के लोगो ने उन्हें करणी माता के रूप में पूजने लगे।

कहा जाता है की रिघुबाई की शादी किपोजी चारण नाम केव्यक्ति से हुई थी जो साठिया गाव के निवासी थे, बाद में रिघुबाई ने सांसारिक जीवन से सन्यास ले लिया और माँ की भक्ति में लीन हो गयी और धीरे-धीरे उनकी दिव्य
चमत्कारिक शक्तियों के कारण लोग करणी माता के रूप में पूजने लगे थे । उस समय करणी माता अपनी
इष्ट देवी की भक्ति करती थी वो गुफा आज भी करणी माता के वर्तमान मंदिर में बनी हुई है । करणी माता लगभग 151 वर्षो तक जीवित रही और 23 मार्च 1538 को वे ज्योतिर्लिन हुई थी।

करणी माता को बीकानेर राजघराना अपनी कुलदेवी के रूप में पूजता है, वर्तमान में जो मंदिर बना हुआ है उसका निर्माण कार्य 20वीं सदी में बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह जी ने करवाया था। करणी माता के इस मंदिर की बनावट काफी आकर्षक है ।

करणी माता के इस मंदिर में करीबन 20000 चूहे रहते है जो आप के मंदिर में प्रवेश करते ही चारो तरफ दिखाई देने लग जाएंगे । मंदिर में आप को अपने पैर घसीटते हुए चलना पड़ता है ताकि किसी भी चूहे को चोट नहीं पहुचे, यदि किसी चूहे को चोट लग जाती है तो इसे अशुभ माना जाता है ।

दिया जाता है भक्तों को स्पेशल प्रसाद

इस मंदिर का सबसे बड़ा चमत्कार ये की यहाँ होने वाली सुबह और शाम की आरती में सभी चूहे जिन्हें “काबा” कहा जाता है वे अपने अपने बिल से बाहर निकल जाते है, और माँ का प्रसाद पहले चूहे खाते है फिर भक्तों को
बांटा जाता है। मंदिर में चूहों की रक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गयी है ।

करणी माता के दरबार के चूहों की कहानी

यहाँ पर जो चूहे है इनको लेकर दो तरह की कहानियाँ प्रचलित है जो इस तरह है

– कहा जाता है की माता का एक सौतेला पुत्र लक्ष्मण था जिसकी कपिल सरोवर में डूब कर मृत्यु हो गयी थी उसके बाद करणी माता ने यमराज से उनके पुत्र को जीवित करने का आग्रह किया तो उनके आग्रह पर यमराज ने उन्हें चूहे के रूप में पुनः जन्म दिया तभी से ये मान्यता है मंदिर में रहने वाले चूहे माता की संतान है ।

-दूसरी कहानी यहाँ के लोकगीतों में सुनाई देती है जिसमे कहा गया है की एक बार देशनोक परलगभग 20000 सैनिकों की एक सेना ने हमला कर दिया तब करणी माता ने उन्हें चूहे बना कर अपनी सेवा में रख लिया था ।

अब इन कहानियों में कितनी सच्चाई है ये तो कोई नहीं जानता है लेकिन करणी माता के चमत्कार आज भी जारी है ।