आखिर कौन था ऐसा योद्धा जो महाभारत के युद्ध को कुछ ही क्षण में कर सकता था समाप्त ,जानिए महाभारत की अनसुनी कहानी ….

2776
Loading...

इतिहास में हुयी महाभारत को हम जितना भी जान ले उतना कम ही लगता है। भले ही हम सोचे की महाभारत के युद्ध के बारे में हम सब कुछ जानते है लेकिन हकीकत कुछ ओर है। आज भी बहुत से ऐसे पहलु है जो पूरी तरह से अनछुए है। महाभारत के युद्ध में कितने ही ऐसे वीर योद्धा भी थे जिनके बारे में हम कुछ नही जानते है। ऐसी ही एक वीर योद्धा भीमसेन के पोत्र और घटोत्कच के पुत्र बरबरीक थे। उनकी मां ने उन्हें यही सिखाया था कि वो हमेशा हारने वाले की तरफ से लड़ाई लड़ेंगे। कहते हैं बरबरीक को ऐसी सिद्धियां प्राप्त थी, जिनके बल पर वह पलक झपकते ही महाभारत के युद्ध में भाग लेने वाले समस्त वीरों को मार सकते थे।

वीर योद्धा बर्बरीक की कहानी ,गज़ब दुनिया
वीर योद्धा बर्बरीक की कहानी ,गज़ब दुनिया

बाल्यकाल से ही बहुत ही वीर इस महान योद्धा ने युद्ध की कला अपनी मां से सीखी थी। कहते हैं मां दुर्गा की घोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया, और तीन बाण प्राप्त किए। अग्निदेव ने प्रसन्न होकर उन्हें धनुष प्रदान किया, जो उन्हें तीनो लोकों में विजयी बनाने में समर्थ थे। जब महाभारत युद्ध की शुरुआत होने वाली थी, तो वह भी उसमें शामिल होना चाहते थे। अपनी इसी इच्छा को लेकर वह अपनी मां से आशीर्वाद लेने गए तभी उनकी मां ने उन्हें कमजोर पक्ष की तरफ से लड़ने का वचन लिया और बर्बरीक ने अपनी मां को वचन दिया कि वो कमजोर पक्ष की तरफ से लड़ाई लड़ेंगे। अपनी मां से मिलने के बाद वो युद्ध क्षेत्र की तरफ चल पड़े।

वीर योद्धा बर्बरीक की कहानी ,गज़ब दुनिया

तब उसने अपने मां को दिए बचन के बारे में बताया कि वो युद्ध में कमजोर पक्ष की ओर से लड़ेंगे। चुकी श्री कृष्ण यह जानते थे कि युद्ध में कौरवों की हार होनी है और इस पर यदि बर्बरीक ने उनका साथ दिया तो परिणाम उनके पक्ष में होगा इसलिए श्रीकृष्ण ने बर्बरीक से छल करते हुए दान की इच्छा जाहिर की।

वीर योद्धा बर्बरीक की कहानी ,गज़ब दुनिया
Loading...

ऐसे मे बरबरीक को श्री कृष्ण पर संदेह हुआ और ब्राह्मण के भेष में भगवान श्री कृष्ण से बरबरीक ने वास्तविक रुप में आने का अनुरोध किया, तब जाकर भगवान कृष्ण ने बर्बरीक को अपने विराट रुप का दर्शन दिया। इसके बाद बर्बरीक से कहा युद्ध शुरु होने से पहले रणभूमि की पूजा के लिए हमें किसी वीरवर के शीश की आवश्यकता है। अपना वचन निभाते हुए बर्बरीक कृष्ण को अपना शीश देने को तैयार हो गए लेकिन बर्बरीक ने कृष्ण से अनुरोध किया कि वो महाभारत का पूरा युद्ध देखना चाहता है। जिसे भगवान कृष्ण ने स्वीकार कर लिया। फाल्गुन माह की द्वादशी को उन्होंने अपने शीश का दान किया। बरबरीक के शीष को युद्धभूमि के समीप ही एक पहाड़ी पर सुशोभित किया जहां से बर्बरीक संपूर्ण युद्ध देख सकते थे।

वीर योद्धा बर्बरीक की कहानी ,गज़ब दुनिया

उसके साहस ने स्वयं भगवान कृष्ण को भी प्रभावित किया था। कृष्ण ने उसे खाटू नामक स्थान पर स्थापित किया और बर्बरीक को “श्याम” नाम भी दिया। आमतौर पर बर्बरीक को खाटू श्याम, बाबा खाटू के नाम से भी जाना जाता है। हजारों की संख्या में लोग इस मंदिर में आकर दर्शन करते हैं. रविवार और एकादशी के दिन भक्तों की भीड़ और ज्यादा होती है।

वीर योद्धा बर्बरीक की कहानी ,गज़ब दुनिया
YOU MAY LIKE
Loading...