जानिए एक भारतीय व्यक्ति कैसे बन गए गूगल के CEO ,सुन्दर पिचाई की गरीबी से लेकर गूगल के CEO बनने तक की संघर्षमयी कहानी

सुंदर पिचाई का पूरा नाम पिचाई सुंदरराजन है जिनका जन्म 12जुलाई,1972 को मदुरै, तमिलनाडु में हुआ। उनका जन्म मध्यम वर्ग के एक परिवार में हुआ था। उनके पिता एक इलेक्ट्रिकल इंजिनियर थे इसलिए वे चेन्नई शहर में अशोक नगर में रहते थे। उनके पिता से वे हमेशा प्रेरित होते थे और इसी लिए उन्हें भी टेक्नोलॉजी से जुड़ने की प्रेरणा मिली उनकी माँ का नाम लक्ष्मी था। वो एक स्टेनोग्राफर थी। उन्होंने अपना स्टेनोग्राफर का काम सुंदर पिचाई के छोटे भाई के जन्म के बाद छोड़ दिया।

सुन्दर पिचाई की कहानी ,गज़ब दुनिया
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जब सुंदर पिचाई 12 साल के थे तो उनके पिताजी घर में एक लैंड लाइन फोन घर लेकर आये। उनके जीवन में यह पहला टेक्नोलॉजी से जुड़ा चीज था जो सुंदर जो पिचाई के घर में आया था। सुंदर पिचाई में बहुत ही स्पेशल क्वालिटी/असाधारण ज्ञान था। वो आसानी से अपने टेलीफोन में डायल किये गए सभी नुबरों को याद रख लिया करते थे। सिर्फ फ़ोन नंबर ही नहीं उन्हें हर प्रकार के नंबर आसानी से याद रह जाते थे। पढाई के साथ-साथ वे खेल में भी अच्छे थे। वो अपने स्कूल क्रिकेट टीम के कप्तान भी थे।

सुन्दर पिचाई की कहानी ,गज़ब दुनिया
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सुंदर पिचाई नें अशोक नगर के जवाहर विद्यालय में अपनी 10वीं कि पढाई पूरी की और चेन्नई के वाना वाणी स्कूल में अपनी 12 वीं की परीक्षा पूरी की। उसके बाद उन्होंने Metallurgical Engineering में IIT खरगपूर में ग्रेजुएशन पूरी की।उसके बाद उन्होंने Stanford University में भौतिक विज्ञान में, MS (Masters in Science) की डिग्री पूरी कर ली और आखिर में वे MBA की पढाई के लिए Wharton School, University of Pennsylvania चले गए।

सुन्दर पिचाई की कहानी ,गज़ब दुनिया
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उन्होंने भौतिक विज्ञान से एमएस (मास्टर इन साइंस) और इंजीनियरिंग स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से की। इसके बाद वे पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के व्हार्टन स्कूल से एमबीए पूरा करने के लिए चले गए। प्री-गूगल करियर गूगल से पहले सुंदर पिचाई ने मैकेंजी & कंपनी में मैनेजमेंट कंसल्टेंट के रूप में काम किया। उन्होने अप्लाइड मैटेरियल्स के इंजीनियरिंग और प्रॉडक्ट मैनेजमेंट में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। गूगल में करियर पिचाई ने 2004 में गूगल जॉइन किया और पॉपुलर प्रॉडक्ट टूलबार पर काम किया। क्रोम के लॉंन्च होने से पहले इन्होने गूगल गियर्स और गूगल पैक पर काम किया। लेकिन, टूलबार की सफलता ने उनके करियर को नए मुकाम पर पहुंचाया।

सुन्दर पिचाई की कहानी ,गज़ब दुनिया
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गूगल ने नोटिस किया कि टूलबार से यूजर सर्च में अच्छी ख़ासी बढ़ोतरी हुई है। अंत में गूगल क्रोम की शुरुआत हुई जो कि गूगल का खुद का ब्राउजर है। बतौर प्रॉडक्ट मैनेजमेंट की शुरुआत पिचाई ने प्रॉडक्ट मैनेजमेंट का नेतृत्व किया और गूगल क्रोम और क्रोम ओएस जैसे गूगल के क्लाइंट सॉफ्टवेर की शुरुआत की। पिचाई ही थे जो गूगल क्रोम के ओएस और ब्राउज़र को लेकर आए थे। उन्हें 2008 में प्रॉडक्ट डवलपमेंट का वाइस प्रेसिडेंट (वीपी) बनाया गया। उन्होंने दुनिया को क्रोम बाउजर दिया। इसके बाद 2009 में क्रोम ओएस आया। पिचाई पब्लिक लाइमलाइट में 2008 से गूगल प्रजंटेशन्स से आए और जल्दी ही गूगल का जाना माना चेहरा बन गए। 2012 में वे क्रोम और एप्स के सीनियर वीपी थे। 2015 में बने गूगल के सीईओ 2013 में पिचाई दुनिया के जाने-माने व्यक्ति बन गए।

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उन्होने गूगल के एक दशक बाद एंडी रूबिन की सोच को साकार करते हुये गूगल एंडरोइड प्रोडक्टस की परिकल्पना की। साल 2015 में सुंदर पिचाई को गूगल के नए सीईओ बनाई जाने की घोषणा हुई, क्यों कि उनके दुनिया भर में प्रसिद्ध लीडर, लैरी पेज उनकी ही नई कंपनी एल्फाबेट, आईएनसी को संभालने के लिए गूगल को छोड़ रहे थे। इसी साल पहले, खुद लैरी पेज ने उन्हें गूगल का प्रॉडक्ट चीफ बनाने की घोषणा की थी। वे माइक्रोसॉफ्ट के नए सीईओ बनने की दौड़ में भी, जो पोजीशन सत्या नाडेला को मिली थी। निजी जीवन उनकी पत्नी अंजलि पिचाई लंबे समय तक सुंदर पिचाई की गर्लफ्रेंड रही। आईआईटी खड़गपुर में पढ़ते हुये वे दोनों क्लासमेट थे। आज, अंजलि और सुंदर के एक बेटा और एक बेटी है। इन्होने न्यूयॉर्क के ब्रूकलिन में 6.8 मिलियन डॉलर में घर खरीद लिया है। सुंदर अब अमेरिकी नागरिकता लेकर पूरे परिवार के साथ यहां रह रहे हैं।