सावधान: स्मार्टफोन के जरिए हो रही है आपकी जासूसी, सरकार ने भेजा 21 कंपनियों को नोटिस

मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी ने 21 स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों को मोबाइल फोन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा प्रक्रियाओं को साझा करने के लिए कहा है। सरकार ने ये आदेश डेटा लिकेज और चोरी की राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टों के बाद जारी किया है।

सरकान ने जिन कंपनियों को आदेश जारी किया है उसमें मुख्य रूप से चीनी कंपनियां हैं। सुरक्षा प्रक्रियाओं को साझा करने की अंतिम तिथि 28 अगस्त रखी गई है। कंपनियों को सुरक्षा की प्रक्रिया के लिहाज से जो जानकारी साझा करनी है उनमें डिवाइस, उनके ऑपरेटिंग सिस्टम, प्री-लोडेड ऐप्स और डिवाइस के ब्राउजर की जानकारियां शामिल हैं।

मंत्रालय के एक वरिष्ट अधिकारी ने बताया कि, मोबाइल फोन या स्मार्टफोन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है ….क्योंकि इसमें यूजर्स निजी जानकारी रखते हैं, क्योंकि वे इसका उपयोग डिजिटल भुगतान करने और पर्सनल डेटा बनाने के लिए करते हैं।

अधिकारी ने आगे कहा कि, जो डिवाइस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया फेल होते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जरुरत पड़ी तो ऑडिट भी किया जाएगा। हम कतई इस बात की अनदेखी नहीं कर सकती कि डेटा किसी थर्ड कंट्री को लिक की जारी है। डेटा आज एक बड़ा रिसोर्स है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारे लिए महत्वूपूर्ण है।

इससे पहले आज तक ने आपको 27 जुलाई को जानकारी दी थी कि चीन में बने प्रोडक्ट्स खास कर स्मार्टफोन्स और फीचरफोन को लेकर सरकार ने कड़ा रूख अपनाया है। चीनी प्रोडक्ट्स की भारत में बिक्री से पहले उसकी जांच की जा सकती है।

चीन में बने प्रोडक्ट्स को साइबर सिक्योरिटी के रडार पर रखा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक टेलीकॉम मंत्रालय इस पॉलिसी पर काम कर रही है। चीन में बने मोबाइल फोन में बग की टेस्टिंग खास तौर पर की जाएगी। खबर है कि चीन में बने फोन की बिक्री बिना सिक्योरिटी स्टांप के नहीं होगी। सिक्योरिटी स्टांप के लिए मोबाइल फोन को बग्स चेकिंग और साइबर सिक्योरिटी टेस्टिंग फेस से गुजरना होगा। चाइनीज प्रोडक्ट्स की जांच के लिए सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर डेवलप करने को लेकर सरकार आईटी कंपनियों से बातचीत कर रही है।

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