मिल गया रामायण काल के रामसेतु का पथ्थर जो आज भी तैरता है पानी में , पढ़िए रामसेतु के रहस्यमयी पथ्थर के बारे में …

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रामायण के अनुसार जब वनवास के समय रावण माता सीता का हरण करके ले गया तब लंका जाने हेतु श्री राम को वानर सेना के साथ मिलकर एक पुल का निर्माण करना पड़ा था उस समय वानर सेना ने श्रीराम लिखे पत्थरों से एक पूल का निर्माण किया जिसे रामसेतु कहा गया।इस रामसेतु में जिन पत्थरों का उपयोग किया गया था वे पानी पर तैरते थे लेकिन रामायण काल के इन पत्थरों को आज भी कई साधू-संतो के पास और कई प्राचिन मंदिरों में भी पानी पर तैरते हुए देखा गया है।

रामायण कालीन पथ्थर आज भी है उपस्थित ,गज़ब दुनिया .
रामायण कालीन पथ्थर आज भी है उपस्थित ,गज़ब दुनिया .

जब विशाल वानर सेना को समुद्र के उस पार लंका ले जाने का संकट भगवान राम के सामने खड़ा हो गया, तब वे समुद्र के पास जाकर समुद्र देव से बात करने लगे। तब समुद्र देव ने स्वयं प्रकट होकर भगवान राम को बताया कि आपकी वानर सेना में नल और नील नाम के दो वानर है। जिनको वरदान प्राप्त है कि वे कोई भी वस्तु पानी में फेंके वह डूबती नहीं है बस फिर क्या था सारे वानर, हनुमान, जामवंत इस महान कार्य में जुट गए।

रामायण कालीन पथ्थर आज भी है उपस्थित ,गज़ब दुनिया .
रामायण कालीन पथ्थर आज भी है उपस्थित ,गज़ब दुनिया .

वे पत्थर ला-लाकर नल नील को देते गए और वे दोनों राम नाम लिखकर समुद्र में पत्थर फेंकते गए। इस तरह देखते ही देखते लंका तक विशाल सेतु का निर्माण कर दिया गया। इस सेतु को रामसेतु और नल नील सेतु का नाम दिया गया। रामायण काल के ये पत्थर आज भी रामेश्वरम में पानी में तैरते हुए देखे जा सकते है। वहीं कई साधू-संतो के पास भी इस तरह के पानी में तैरने वाले पत्थर पाए गए।

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