दिल शायरी दिल वो शहर नहीं….Dil Shayari Hindi

संगदिल मिल चुके…

कोई तो जलवा खुदा के वास्ते,
दीदार के काबिल दिखाई दे,
संगदिल तो मिल चुके हैं हजारों,
कोई अहल-ए-दिल तो दिखाई दे।

दिल वो नगर नहीं…

दिल वो नगर नहीं जो फिर आबाद हो सके,
पछताओगे तुम बहुत इसको उजाड़ कर।

काँच का दिल…

काश बनाने वाले ने दिल काँच का बनाया होता,
दिल तोड़ने वाले के हाथों में ज़ख्म तो आया होता,
जब भी वो देखता अपने हाथों की तरफ,
कम से कम उसे मेरा ख्याल तो आया होता।

दिलों के ज़ख्म भी…

स्याह रात में जलते हैं जुगनुओं की तरह,
दिलों के ज़ख्म भी दोस्तों कमाल होते हैं।

किस्से हैं दिल के…

जिस नगर भी जाओ किस्से हैं कमबख्त दिल के,
कोई ले के रो रहा है कोई दे के रो रहा है।