ये हैं वो 5 लोग, जिनकी वजह से सलाखों के पीछे पहुंचा आलीशान जिंदगी जीने वाला बलात्कारी बाबा गुरमीत राम रहीम

बाबा राम रहीम को हरियाणा के पंचकूला में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने दोषी करार दिया था, जिसके बाद आज उसे 10 साल की सजा का भी ऐलान हो चुका है। इसके बाद से ही हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद आदि जगहों पर राम रहीम को समर्थकों ने खूब बवाल मचाया है और आगजनी की है। इसी के चलते कई जगहों पर धारा 144 भी लागू करनी पड़ी।

5 लोगों ने पहुंचाया सलाखों के पीछे – अभी तक इस मामले को लेकर हुई हिंसा में करीब 32 लोगों की मौत हो चुकी है और 250 से भी अधिक लोग घायल हो गए हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि किन लोगों ने इस बलात्कारी बाबा को सलाखों के पीछे पहुंचाया है। आइए जानते हैं उन 5 लोगों के बारे में, जिनकी वजह से सलाखों के पीछे पहुंचा बलात्कारी बाबा गुरमीत राम रहीम।

दो साध्वियां – बाबा राम रहीम पर बलात्कार का जो आरोप साबित हुआ है, उसकी शुरुआत 2002 से हुई। 2002 में ही यह बात सामने आई थी कि बाबा गुरमीत राम रहीम ने दो साध्वियों के साथ बलात्कार किया था। एक साध्वी ने जुलाई 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को एक पत्र लिखकर बताया था कि बाबा राम रहीम ने उसके साथ बलात्कार किया है। जिन दो साध्वियों ने बाबा राम रहीम पर बलात्कार का आरोप लगाय था, वह इस मामले में सबसे अहम किरदार हैं। इन दोनों साध्वियों ने करीब 15 साल तक लड़ाई लड़ी और आखिरकार अब सीबीआई कोर्ट ने बाबा राम रहीम को दोषी करार दिया है।

पत्रकार राम चंदेर – इस मामले को लोगों के सामने उजागर करने वाले पत्रकार राम चंदेर न होते तो शायद यह मामला मीडिया में ही नहीं आ पाता। पत्रकार राम चंदेर ने ही अपने अखबार के जरिए दो साध्वियों से रेप होने की घटना को उजागर किया था। राम चंदेर के ही अखबार में साध्वी की उस चिट्ठी को छापा गया था। आपको बता दें कि अब इनकी हत्या कर दी गई है और चंदेर की हत्या का आरोप भी बाबा गुरमीत राम रहीम पर है। रामचंदर छत्रपति की 24 अक्टूबर 2002 में उनके घर पर प्वाइंट ब्लैंक पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह हत्या राम रहीम के खिलाफ साध्वी के साथ रेप की खबर अखबार में छपने के कुछ महीने बाद ही की गई थी।

सीबीआई अधिकारी सतीश डागर – जब यह मामला सीबीआई के पास पहुंचा तो सीबीआई अधिकारी सतीश डागर ने बाबा राम रहीम को सलाखों के पीछे पहुंचाने का बीड़ा उठाया। राम चंदेर के बेटे अंशुल ने अपने पिता की हत्या के बाद इंसाफ के लिए 15 साल तक लड़ाई लड़ी, जिस दौरान उन्हें सीबीआई अधिकारी सतीश डागर मिले। अंशुल ने बताया कि अगर सीबीआई के डीएसपी सतीश डागर नहीं होते तो शायद कभी भी इंसाफ नहीं मिल पाता। वह सतीश डागर ही थे, जिन्होंने साध्वियों को समझाया और अपनी लड़ाई लड़ने के लिए उन्हें प्रेरित किया।

जस्टिस जगदीप सिंह – इस केस में फैसला सुनाने वाले सीबीआई कोर्ट के जज जगदीप सिंह ने भी अहम भूमिका निभाई है। इन्होंने ही बाबा राम रहीम को दोषी करार देते हुए फैसला सुनाया। 28 जुलाई को जगदीप सिंह ने राम रहीम को 10 साल की सजा सुनाई है। जगदीप सिंह को पिछले साल ही सीबीआई स्पेशल जज के लिए चुना गया था, जो कि एक न्यायिक ऑफिसर के रूप में दूसरी पोस्ट है। जगदीप सिंह न्यायिक सेवा में शामिल होने से पहले पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के वकील थे। हरियाणा के रहने वाले सिंह ने 2000 और 2012 के बीच कई नागरिक और आपराधिक मामले उठाए थे।