भारत की सबसे बुजुर्ग महिला धावक से जिन्होंने 102 वर्ष की आयु में देश के लिए जीता स्वर्ण पदक

जोश और जज़्बा कायम हो तो उम्र भी कामयाबी के आड़े नहीं आ सकती। इसी बात को चरितार्थ कर दिखाया भारत की मन कौर ने जिन्होंने 102 साल की उम्र में वर्ल्ड मास्टर एथेलेटिक्स में 200 मीटर रेस में गोल्ड मेडल हासिल किया और साबित किया कि उम्र उनके लिए मात्र एक संख्या है।

पंजाब के पटियाला में रहनेवाली मन कौर ने 93 वर्ष की आयु में अपने करियर की शुरुआत की। और अभी हाल ही में स्पेन के मलागा में हुई विश्व मास्टर्स एथलेटिक्स चैम्पियनशिप की 200 मीटर रेस में 100 से 104 साल के उम्र की श्रेणी में स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

मन कौर के 78 वर्षीय बेटे गुरुदेव ने उन्हें इसके लिए प्रेरित किया और हमेशा उनका साथ दिया। गुरुदेव खुद भी सीनियर सिटीजन के लिए आयोजित होने वाले विभिन्न वर्ल्ड मास्टर्स गेम की स्पर्धाओं में भाग लेते हैं। इसके अलावा वर्ल्ड मास्टर एथेलेटिक्स बुजुर्ग खिलाड़ियों के लिए ओलंपिक भी माना जाता हैं।

हिस्ट्री टीवी 18 को दिए एक साक्षात्कार में उनके बेटे गुरुदेव ने बताया कि कैसे मन कौर ने खुद को स्वस्थ रखा है और उम्र के इस पड़ाव में भी उन्हें कोई भी शारीरिक समस्या नहीं है। उनके घुटने काफी मजबूत हैं। उन्होंने आगे कहा, “जब वे पहली बार दौड़ीं तो उन्होंने 100 मीटर की रेस 1 मिनट में पूर्ण की जिसमे वे दूसरे स्थान पर आयी थीं।”

आगे वे बताते हैं उन्होंने 100 मीटर की रेस से अपनी शुरुआत की लेकिन अब वे 200 मीटर और अन्य प्रतियोगिता में भी प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हैं। उनके अविश्वसनीय रिकॉर्ड जानकार वास्तव में आप बिलकुल भी विश्वास नहीं कर सकते। उन्होंने अमेरिका मास्टर्स गेम और वर्ल्ड मास्टर्स गेम में 20 से अधिक पदक जीते हैं।

यह पहली बार नहीं हैं जब उन्होंने स्वर्ण पदक जीता इससे पहले भी न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में वर्ल्ड मास्टर्स गेम के दौरान वे 100 मीटर की दौड़ में शीर्ष स्थान पर रहीं थीं। उनका गोल्ड पाने का सिलसिला अब तक नहीं रुका है।

विश्व मास्टर्स एथलेटिक्स चैम्पियनशिप में जीत के कारण, मन कौर को भारत में चारों तरफ से प्रशंसा प्राप्त हो रही है। कई अभिनेताओं से लेकर खिलाड़ियों ने उनकी जीत की प्रशंसा की है। अभिनेता मिलिंद सोमण ने जोश से भरी इस बुजुर्ग खिलाड़ी की जीत के लिए ट्विटर एक ख़ास ट्वीट किया है।

एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने सबसे महत्वपूर्ण बात कही क़ि इंसान को वही चीज करनी चाहिए जो उसे ख़ुशी दे और दौड़ना उन्हें ख़ुशी देता है।वास्तव में उनकी मजबूत इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प देश के सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है।