भारतीय सेना की 10 बातें, जिनसे खौफ खाता है दुश्मन!

देशप्रेम सबके दिल में होता है लेकिन ऐसे कितने लोग होते हैं जो देश के लिए जान दे सकें। जो लोग देश के लिए जान देने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं उनमें से अधिकतर भारतीय सेना में शामिल हो जाते हैं। भारतीय सेना राष्ट्र के लिए जीते हैं और अपनी जान पर खेलकर दूसरों की जान बचाते है। पूरे देश को भारतीय सेना पर गर्व है। वहीं दुश्मन इनकी खूबियों से खौफ खाता है।

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सबसे बड़ी सेना- भारतीय सेना विश्व की सबसे बड़ी स्वैच्छिक सेना है। हजारों की संख्या में सेना स्वेच्छा से देश की सेवा करते है। संविधान में अनिवार्य सैनिक सेवा की व्यवस्था होने बावजूद भी कभी सरकार को बलपूर्वक इसे लागू करने की जरुरत नहीं पड़ी।

विश्व के सबसे उंचे युद्धक्षेत्र सियाचीन पर नियंत्रण- समुद्र तल से उस ऊंचाई पर जहां जान बचाना मुश्किल होता है, भारतीय सेना वहां भी शत्रुओं से रक्षा के लिए डटी रहती है। वहां पर कई सैनिकों की मौत दुश्मनों की गोली से न होकर मौसम की मार से होता है।

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पर्वतीय युद्ध में सर्वश्रेष्ठ- ग्लैशियर और पर्वतों पर युद्ध करने की कला में भारतीय से बेहतर कौन हो सकता है। यहां तक कि अमेरिका की सेना भी भारतीय सेना से यह कला सीखती है। अफगानिस्तान भेजने से पहले अमेरिकी सेना भारतीय सेना से यह कला सीखती है। यहां तक कि इंग्लैंड और रुस के सैनिक भी भारतीय सेना से प्रशिक्षण लेते हैं।

अश्वारोही सेनाओं की फौज- भारत उन तीन देशों में शामिल है, जिनके पास अभी भी अश्वारोही सेनाओं की फौज है। भारतीय सेना के पास सबसे बड़ी अश्वारोही सेना की फौज है। इसके अलावा भारतीय सेना हर गणतंत्र दिवस पर सलामी देने के लिए इकट्ठा होती है।

अग्नि और पृथ्वी मिसाइल- अग्नि सीरीज का मिसाइल अपनी सटीकता के लिए विश्व में सर्वश्रेष्ठ है। अग्नि और पृथ्वी मिसाईल परमाणु क्षमता वाले बैलेस्टिक मिसाईल है। भारत को इसके लिए गर्व है।indian army

ब्रह्मोस सबसे तेज सुपरसोनिक मिसाइल– यद्यपि अभी भी स्वदेशी तकनीक के क्षेत्र में प्रसिद्धि हासिल करना बाकी है लेकिन इसका एक मापदंड ब्रह्मोस हो सकता है। ब्रह्मोस का निर्माण भारत और रुस ने मिलकर किया है। यह एक सुपरसोनिक मिसाइल है जो ध्वनि के रफ्तार से 7 गुना तेज चलती है। ब्रह्मोस का अनुमानित रेंज 290 किलोमीटर है। ब्रह्मपुत्र और मॉस्को के नाम पर ही इसका नाम ब्रह्मोस रखा गया है।

स्वच्छ भारत अभियान में सहयोग- एक सेना से ज्यादा समर्पित कोई नहीं हो सकता है। किसी भी चुनौती के लिए ना नहीं करते हैं। बात चाहे युद्ध की हो या स्वच्छता की वे कभी भी पीछे नहीं हटते हैं। भारतीय सेना ने स्वच्छ भारत अभियान को एवरेस्ट तक पहुंचा दिया है।

संसाधनों का सर्वोत्तम इस्तेमाल- भारतीय सेना ने इस मिथ्य को भी गलत साबित किया है कि युद्ध सिर्फ विदेशी तकनीकों के दम पर ही लड़ा जा सकता है। भारतीस सेना पहाड़ी मिर्ची का प्रयोग हैंडग्रैनेड बनाने में करती है। इससे ना सिर्फ दुश्मनों के छक्के छुड़ाते हैं बल्कि गरीब किसानों को भी आमदनी का एक स्रोत निल जाता है।

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