इन 10 तस्वीरों में दर्ज़ है जन्नत का एक – एक पल

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प्रकृति के नज़ारों के आगे मानव की कोई हैसियत नहीं है. मानव ने प्रकृति को सुधारने और उजाड़ने की बहुत कोशिश की, लेकिन प्रकृति अपने आप में संपूर्ण है. उसे किसी मानव रूपी विश्लेषण, अर्थात सहारे की आवश्यकता नहीं है. हालांकि मानव और प्रकृति एक-दूसरे के समकक्ष हैं लेकिन प्रतिरोध भी पैदा हो रहा है. मानव प्रकृति से छेड़छाड़ करता है, 

 
जवाब में प्रकृति प्रकोप बरसाती है. लेकिन ये प्रकृति ही है जो मानव का सांस देती है, उसे आसमान रूपी अपनी गोद में लेती है, ये प्रकृति ही है जिसके नज़ारे कवियों को मज़बूर कर देते हैं लिखने को, यही प्रकृति है जिसकी बदौलत इंसान जीता चला जाता है, यही प्रकृति है जो चेहरों पर नहीं, बल्कि दिलों में मुस्कान पैदा करती है. ये प्रकृति उन सब चीज़ों की जनक है जिसका श्रेय मानव ले लेता है.

इस आर्टिकल में हम प्रकृति के ऐसे नज़ारे दिखायेंगे जो हो सकता है आपको कुछ देखने को, कुछ करने को उद्वेलित कर दें. हालांकि इसमें से कई मानवकृति भी हैं, लेकिन उनमें कहीं न कहीं प्रकृति का योगदान अवश्य रहा है.

1. ठंडी ज़मीन पर सोता ईश्वर (इंग्लैंड)

2. रेल की इस पटरी पर कभी सफ़र रहा करता था (ताईवान)

3.जड़ों से निकलता संगीत

4. सो गई थी ये सड़क

5. जड़ों के नीचे बसा दरवाज़ा (कंबोडिया)

6. रौशनी, चर्च और बहता पानी (फ्रांस)

7. ठहरे पानी में चलता साया (ऑस्ट्रेलिया)

8. गाड़ियों पर रहती धूल

9. गतिहीन झूला…

10. गहराई और खामोशी

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