आज ग्रह करेंगे फेरबदल, इस समय में किया गया पूजन असंभव को भी बनाएगा संभव, हर मनोकामनाये होगी पूर्ण

शनिवार दिनांक 19.08.17 को भाद्रपद कृष्ण त्रयोदशी तिथि प्रातः 07:17 से प्रारंभ होगी। इस बार का शनि प्रदोष स्वयं सिद्ध विशेष होगा। क्योंकि इस दिन सूर्यास्त से पहले चंद्रमा अपनी राशि परिवर्तन करके स्वयं की राशि कर्क में आ जाएगा व पुष्य नक्षत्र में शाम 19:10 बजे प्रवेश करेगा।

इस दिन सूर्यास्त का समय शाम 18:52 पर है। इसी कारण शनि-पुष्य प्रदोष योग में यह त्रियोदशी अति विशेष है। इस दिन गौ के समान शुद्ध और पवित्र वाणिज नामक करण रहेगा जो निश्चित सफलता का सूचक है। इस दिन प्रदोष काल शाम सूर्यास्त के बाद 18:52 से लेकर रात 21:11 तक रहेगा परंतु श्रेष्ठ महूर्त शाम 19:09 से लेकर रात 20:11 तक रहेगा। इस काल में शिवलिंग का विशिष्ट पूजन असंभव को भी संभव बना सकता है।

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कैसे करें विशेष पूजन – शनि प्रदोष के दिन प्रात:काल स्नानादि के पश्चात बिल्वपत्र, गंगाजल, अक्षत, धूप, दीप आदि षोडशउपचार से शिव आराधना करें। सूर्यास्त के पश्चात संध्याकाल में ही पुन: शिवलिंग की पूजा करें। लाल कंबल के आसान पर उत्तरमुखी होकर बैठ जाएं उड़द के आटे से बना तिल के तेल का 13 मुखी दीपक जलाएं, लोहबान से धूप करें, काजल अर्पित करें, भस्म चढ़ाएं, सिंदूर अर्पित करें, लौंग अर्पित करें, साबुत काली मिर्च चढ़ाएं, नीले और लाल फूल चढ़ाएं तथा एक जटा युक्त नारियल शरीर से वारकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इसके बाद सातमुखी रुद्राक्ष आभाव में काले हकीक की माला से इस मंत्र का 13 माला जाप करें। जाप के पश्चात शिवलिंग पर चढ़ी पूरी सामाग्री किसी गरीब अथवा डाकोत को दान दें अथवा शनि मंदिर में छोड़ दें।

विशिष्ट मंत्र: क्लीं कामफलप्रदाय नमः शिवाय क्लीं॥

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