प्रधानमंत्री मोदी के सपनों पर मंडराए संकट के बादल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) का सपना है कि दुनिया में भारत एक सशक्त और सक्षम राष्ट्र के रूप में सामने आये। उन्होंने इस दिशा में ढेर सारे प्रयास किये भी हैं। किसी हद तक सफलता भी मिली है लेकिन कोरोना वायरस (Coronavirus) से संघर्ष के बीच ऐसी आशंकाएं बन रही हैं कि प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) का यह सपना अधूरा न रह जाये।

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) चाहते हैं कि भारत की ‘एक्‍ट ईस्‍ट’ पॉलिसी (Act East Policy) कामयाब हो लेकिन मोदी (Modi) के इस सपने पर म्‍यांमार में गंभीर खतरा मंडराता नजर आ रहा है। म्‍यांमार ने अभी तक भले ही कोरोना (Corona) के महासंकट का अच्‍छे से मुकाबला किया है लेकिन उसके पश्चिमी हिस्‍से में सैन्‍य स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। यह वही इलाका है जहां पर म्‍यामांर के विभिन्‍न गुटों के बीच संघर्ष चल रहा है और भारत तथा चीन के हित जुड़े हुए हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिमी म्‍यामांर में स्थित रखाइन और पड़ोसी चिन राज्‍यों में सैन्‍य स्थिति लगातार खराब हो रही है। यह वही इलाका है जहां पर चीन का लगातार प्रभाव बढ़ता जा रहा है और इस प्रभाव को कम करने के भारत प्रयासरत है। गत 10 और 11 मार्च को म्‍यामांर की सेना को इस इलाके में विद्रोही गुट अराकान आर्मी के हाथों अब तक की सबसे करारी शिकस्‍त का सामना करना पड़ा।

अराकान आर्मी लंबे समय से स्‍वायत्‍तता देने की मांग कर रही है। माना जाता है कि चीन से उसे हथियारों की मदद भी मिलती है। अराकान आर्मी चीन के प्रॉजेक्‍ट को अपना समर्थन भी देती है। बताया जा रहा है कि 10 मार्च को म्‍यामांर की सेना के एक बटालियन ने चिन राज्‍य के पलेटवा में पैराशूट के जरिए अपने सैनिक उतारे। उसका मकसद पास में ही स्थित एक चौकी पर दबाव बनाना था। यह लड़ाई कलादान नदी पर कब्‍जे की लड़ाई में बदल गई। इसी नदी के जरिए विद्रोही अपने अड्डे और रखाइन स्‍टेट में अभियान चलाने के लिए जाते हैं।

म्‍यामांर की सेना का यह दांव उल्‍टा पड़ गया और अराकान आर्मी ने पैराशूट से कूदे सैनिकों का संपर्क मुख्‍य सेना से काट दिया। नतीजा यह हुआ कि कम से कम 20 सैनिक मारे गए और 36 को बंदी बना लिया गया है। इसमें म्‍यामांर की सेना के बटालियन का कमांडर भी शामिल है। यह वर्ष 2015 के बाद म्‍यामांर की सेना को सबसे बड़ा नुकसान है। इस हार पर म्‍यामांर की सेना ने कोई बयान नहीं दिया है लेकिन विद्रोहियों ने तस्‍वीर जारी करके अपनी जीत के सबूत दिए हैं।

इस हमले से पहले ही म्‍यामांर की वायुसेना और तोपें लगातार कई गांवों पर हमले कर रही थीं। इसका मकसद विद्रोहियों को कमजोर करना था ताकि सेना वहां आसानी से उतर सके। सेना की हार से भारत के ऐक्‍ट ईस्‍ट पॉलिसी को भी तगड़ा झटका लगा है। पश्चिमी म्‍यामांर में बढ़ते संघर्ष से भारत के म्‍यामांर के रास्‍ते मिजोरम को कोलकाता से जोड़ने के प्रयास पर संकट मंडराता नजर आ रहा है।

भारत चीन के इस क्षेत्र में प्रभाव को कम करने के लिए कलादान मल्‍टी-मॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रॉजेक्‍ट चला रहा है। इससे चारों तरफ से जमीन से घिरे मिजोरम को समुद्र के रास्‍ते जोड़ा जाना है। यह पीएम मोदी ऐक्‍ट ईस्‍ट पॉलिसी का एक प्रमुख बिंदू है। हालांकि इस रास्‍ते में सबसे महत्‍वपूर्ण कलादान नदी है जिस पर विद्रोहियों का नियंत्रण है। भारत ने पेलटावा कस्‍बे में एक डीप सी पोर्ट भी बनाया है। चीन जहां अब मांडले तक सड़क बना रहा है वहीं भारत का प्रॉजेक्‍ट अधर में लटकता नजर आ रहा है।