अब सिर्फ 45 मिनट में कोरोना की पहचान

कोरोना वायरस इस समय पूरी दुनिया के लिए मौत का दूसरा नाम बन चुका है. इस जानलेवा वायरस ने अब तक 13 हजार लोगों की जान ले ली है जिसमें भारत के भी 6 लोग शामिल हैं. कोरोना के ज्यादातर मामलों में देखा गया है कि लोगों के संक्रमित होने के बाद टेस्ट में देरी की वजह से इसे फैलने में मदद मिलती है. अब अमेरिका ने इसका तोड़ निकाल लिया है. अमेरिका के खाद्य और औषधि विभाग ने सिर्फ 45 मिनट में कोरोना वायरस डायग्नोस्टिक परीक्षण को मंजूरी दे दी है. इससे संदिग्ध मरीज के बारे में सिर्फ 45 मिनट में पता चल जाएगा कि वो संक्रमित है या नहीं. अभी इस वायरस की जांच में काफी समय लगता है.

इस तकनीक को विकसित करने वाली कैलिफोर्निया की आण्विक डायग्नोस्टिक्स कंपनी सेफेड ने कहा है कि शनिवार को इसके परीक्षण के लिए एफडीए की तरफ से स्वीकृति मिली थी. अभी इसका इस्तेमाल अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं में किया जाएगा. कंपनी अगले हफ्ते इस तकनीक को शिपिंग के जरिए दूसरे राज्यों में भी पहुंचाने की योजना बना रही है.

एफडीए ने एक अलग बयान जारी कर इसकी मंजूरी की पुष्टि की है. बयान में कहा गया है कि कंपनी 30 मार्च तक अपनी टेस्टिंग की उपलब्धता को लागू करना चाहती है. वर्तमान परीक्षण सरकारी आदेश के तहत होगा और नमूनों को एक केंद्रीकृत प्रयोगशाला में भेजा जाना सुनिश्चित किया गया है जहां से इसके रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाएगा.

“स्वास्थ्य और मानव सेवा के सचिव एलेक्स अजार ने शनिवार को कहा,” हम सावधानियां और देखभाल जैसे निदान के साथ ही जांच और उपकरणों के साथ एक नए फेस की तरफ बढ़ रहे हैं, जहां अमेरिका के लोगों को तत्काल जांच में आसानी होगी.”

बता दें कि संयुक्त राज्य अमेरिका भी कोरोनो वायरस परीक्षण की घरेलू मांग को पूरा नहीं कर पा रहा है. कई चिकित्सा विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी है कि देरी और परीक्षण में अराजकता आने से लोगों के जीवन पर खतरा बढ़ेगा और संभवतः इससे डॉक्टर और नर्सें भी प्रभावित होंगी.

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