जानिए कैसे विपदा की पूर्व जानकारी देता है चमत्कारी मंदिर - खीर भवानी देवी

हम आज आये दिन कई प्रकार के चमत्कारी मंदिरों के बारे में पढ़ते और सुनते है । तुलमुला गांव में एक पवित्र पानी के चश्मे के ऊपर स्थित मंदिर है जो कश्मीरी पंडितों की आस्था का केंद्र है। यह श्रीनगर से 27 किमी पूर्व में स्थित है।


खीर भवानी देवी की पूजा लगभग सभी कश्मीरी हिन्दू और बहुत से ग़ैर-कश्मीरी हिन्दू भी, करते हैं। अदभुत चमत्‍कारिक है ये मंदिर कोई भी विपदा आने से पहले काला हो जाता है यहां का पानी । जी हां, हम बात कर रहे है खीर भवानी देवी के मंदिर की जो जम्मू व कश्मीर के गान्दरबल जिले में तुलमुला गांव में स्थित है।

# इस मंदिर की एक खास बात यह है कि देश में बड़ी विपदा आने से पहले इस मंदिर के कुंड का पानी काला हो जाता है। अधिकतर रंगों का कोई महत्व नहीं होता, परन्तु जल का रंग कल या गहरा होने पर कश्मीर के लिए अशुभ संकेत मन जाता है बहराल जिस वर्ष कुंड का जल शुद्ध एवं साफ़ होता है श्रद्धालुओं का मानना होता है की यह घाटी के लिए शुभ संकेत होता है।

# श्रद्धालु मंदिर परिसर में बने पवित्र झरने में दूध एवं खीर अर्पित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि मंदिर के नीचे बहने वाले पवित्र झरने के रंग से घाटी की स्थिति का संकेत मिलता है। कश्मीर में आई कई विपदाओं से पहले इस कुंड के पानी का रंग बदल चुका है।

# जब 2014 में कश्मीर में बाढ़ आई थी तब भी आपदा आने से पहले इस मंदिर के कुंड का पानी गहरा काला हो गया था तभी सब पंडित समझ गए थे की कोई बड़ी आपदा आने वाली है। यह मंदिर है कश्मीरी पंडितों की आस्था का केंद्र है। हर साल जून में शुक्ल पक्ष की ज्येष्ठ अष्टमी पर यहां मेला लगता है।

# स्थानीय लोगों का मानना है कि खीर, जो सामान्य रूप से सफेद रंग की होती है उसका रंग काला हो जाता है जो अप्रत्याशित विपत्ति का संकेत होता है। मई के महीने में पूर्णिमा के आठवें दिन बड़ी संख्या में भक्त यहां एकत्रित होते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस शुभ दिन पर देवी पानी का रंग बदलती है। ज्येष्ठ अष्टम और शुक्ल पक्ष अष्टमी इस मंदिर में मनाये जाने वाले कुछ प्रमुख त्यौहार हैं।
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