प्राचीन भारत का चिकित्सा विज्ञान में नहीं था कोई सानी, जानिए ये 10 फैक्ट्स

भारतीय वेदों और प्राचीन हस्तलेखों में भी धातुकर्म, बीजगणित, खगोल विज्ञान, गणित, वास्तुकला एवं ज्योतिष शास्त्र के बारे में सूचना थी और यह जानकारी उस वक्त से थी, जब पश्चिमी देशों को इनके बारे में पता तक नहीं था।



हम ज्ञान-विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान, रसायन, भौतिक और खगोल के क्षेत्र में विश्व में सबसे आगे थे। विश्व के कई देश आज भी हमारे वेदों और ग्रंथों को पढ़ते हैं।
आज हम आपको ऐसे ही कुछ तथ्यों के बारे में बता रहे हैं जिनसे साबित होता है कि चिकित्सा विज्ञान में प्राचीन भारत का कोई सानी नहीं था।

1. भारत दुनिया का आध्यात्मिक गुरू रहा है। माना जाता है गरुण पुराण में इतनी शक्ति है कि ये मृत शरीर में भी प्राण का संचार कर सकता है। यही करण है कि इसे संजीवनी विद्या के नाम से भी पहचाना जाता है। भारतीय आयुर्वेद की प्रणाली बेहद प्राचीन है, जिसका प्रमाण हमें धर्मग्रंथों में मिलता है।



2. भगवान धनवंतरि को आयुर्वेद का जनक माना जाता है। इन्हें देवताओं का चिकित्सक भी कहा जाता है।

3. भारत में विश्व की सबसे प्राचीन आयुर्वेद, प्राकृतिक एवं योग चिकित्सा पद्धति का जन्म और विकास हुआ। इसी के बाद होमियोपैथी, एलोपेथी, यूनानी, एक्यूप्रेशर, तंत्र -मंत्र- यंत्र इत्यादि चिकित्सा पद्धतियों का प्रादुर्भाव हुआ।

4. प्राचीन भारत में प्लास्टिक सर्जरी, Dental Surgery (दंत शल्य - चिकित्सा) तक होने के प्रमाण मिले हैं।


5. ऐतरेय (Aitareya) उपनिशेद में ये बताया गया है कि भ्रूण के अंग गर्भ में किस क्रम में विकसित होते हैं। इसमें लिखा है कि पहले भ्रूण का मुंह बनता है, फिर नाक, फिर आंखें, फिर कान, फिर दिल, फिर नाभि और अंत में लिंग बनता है। Modern Science ने भी इसी क्रम की पुष्टि की है।

6. भागवत में लिखा है कि दूसरे महीने से भ्रूण का दिल धड़कना शुरू होता है, Modern Science का भी ये ही मानना है कि 7वें या 8वें महीने से भ्रूण की धड़कने शुरू होती हैं।

7. भागवत के अनुसार मनुष्य के कान ही उसे दिशाओं का भान करवाते हैं। अब ये साबित हो चुका है कि वाकई मनुष्य के कान उसके शरीर का संतुलन बनाने में सहायक होते हैं।

8. ऋग्वेद के समय में रानी विषपाला को युद्ध में एक पैर खो देने के बाद नकली पैर लगाया गया था। इसके बाद उन्होंने युद्ध भी लड़ा।



9. भारत में प्राचीन समय से अंग प्रत्यारोपण हो रहा है। ऋषि दध्यङ्ग (Daddhyanga) मस्तिष्क में कुछ तकलीफ हो गयी थी। उन्हें ठीक करने के लिए Ashvinau ने उनके सिर की जगह एक घोड़े का सिर लगा दिया था।

10. शल्य प्रक्रियाएं (Surgical Procedures) के बारे में जब दुनिया कुछ नहीं जानती थी, तब भी भारत में सुश्रुत शल्य चिकित्सा किया करते थे।

1200BC में ही उन्होंने 184 अध्यायों का मेडिकल इनसाइक्लोपीडिया (Medical Encyclopaedia) लिख दिया था। आयुर्वेद में जड़ी-बूटियों से बेहोशी (Anesthesia) भी बनाया जाता था।



ऐसे कई और तथ्य हैं जिनसे प्राचीन भारत की विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्धियां पता चलती हैं। गुरुत्वाकर्षण की खोज किसने की? इस पर आप बिना झिझक के कहेंगे न्यूटन। लेकिन ये बात पूरी तरह से सच नहीं है क्योंकि 1500 साल पहले ही एक हिन्दुस्तानी ने गुरुत्वाकर्षण की खोज की थी। 

आर्यभट्ट जैसे खगोलविद् न्यूटन से भी कहीं पहले गुरुत्वाकर्षण बल के बारे में जानते थे। उन्हें पहले ही ग्रहण के (सूर्य या चन्द्र ग्रहण) पीछे के विज्ञान के बारे में पता था। बाकी दुनिया तब ग्रहण का कारण काले जादू को मानती थी।

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Source: Mysteryofindia

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