जब ॐ और अल्लाह एक हो सकता है, तो हिन्दू और मुसलमान एक क्यों नहीं

इन दिनों पूरी दुनिया में धर्म को लेकर कई तरह की उठा-पटक चल रही है। सभी धर्मों के अनुयायी अपने धर्म को दूसरे से आगे बताते हैं। कुछ तर्कों के साथ तो कई लोग कट्टरता के साथ अपनी बात भी रखते हैं। इतिहास हो या वर्तमान, हर समय धर्म की आड़ में कई ऐसे काम किए गए हैं, जो पूरी तरह से मानवता के ख़िलाफ़ हैं और कोई भी धर्म ऐसे कामों की कतई इजाज़त नहीं देता।


लेकिन एक बात पूरी तरह से सच है कि दुनिया का कोई भी धर्म हो, उसमें लगभग एक ही बातें हैं। वैसे तो दुनिया के सभी धर्मों में काफ़ी समानताएं देखने को मिल जाएंगी, लेकिन हिन्दू और मुस्लिम संप्रदाय में बहुत ज़्यादा ही समानताएं हैं। आप मानें या न मानें लेकिन ये पूरी तरह सच है। हम आज आपको कुछ तथ्यों के साथ समझाते हैं।


ओम् और अल्लाह का स्वरूप एक ही है:

इस चित्र में दिखाया गया है कि ओम् और अल्लाह की संरचना समान अक्षरों से की गई है।




ओम् और 786 में समानताएं:

अगर आप अक्षरों पर ग़ौर करेंगे तो पाएंगे कि दोनों में 786 है।


विश्व के सभी स्वास्तिकों का स्वरूप एक है।



इसके अलावा कुछ ऐसी बातें हैं, जो दोनों धर्मों को आपस में जोड़ती हैं।

1. दोनों धर्म ईश्वरीय शक्ति पर विश्वास रखते हैं।

2. दोनों धर्मों में कहा गया है कि इंसान अपने कर्म करने के लिए स्वतंत्र है। उसकी अच्छाई और बुराई पर ही उसकी पहचान होगी।

3. दोनों धर्मों में कहा गया है कि ईश्वर अपने चाहने वालों को बेहद प्यार करते हैं।

4. दोनों धर्मों में भाईचारा, सौहार्द्र, क्षमा, विश्वास और प्रेम करना सिखाया गया है।

5. दोनों धर्मों में अहिंसा को प्रमुखता दी गई है।



6. दोनों धर्मों में दूसरों के धर्म के प्रति प्रेम रखना सिखाया गया है।

7. दोनों धर्मों में प्रकृति के प्रति वफादार रहना सिखाया गया है।

इन तथ्यों के आधार पर हम कह सकते हैं कि हिंदुत्व और इस्लाम धर्म की शिक्षाएं एक जैसी ही हैं। हम मानव ही हैं, जो इसे अलग किए हुए हैं। वैसे भी धर्म हमें जीना सिखाता है, प्रेम करना सिखाता है। एक बात पर ध्यान देने की ज़रूरत है कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है।

Source : gazabpost.com
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