40 की उम्र पार करते ही दूसरा जन्म लेता है बाज, जानिए एक अनोखी सच्चाई

जीवन की मुश्किलें इंसान को कमजोर कर देती हैं, यह वो समय होता है जब जिन्दगी का हर पल आपको भारी लगने लगता है और आप बस यही इंतजार करने लगते हैं कब आपका ये सफर समाप्त होगा। जो दास्तां हमने आपको सुनाई वो हर वो इंसान अपने आप से जोड़ सकता है जो मुश्किलों के आगे घुटने टेकना ही अपने जीवन की नियति समझता है। लेकिन जो लोग मुश्किलों के आगे हार मानकर बैठना नहीं चाहते उनका जीवन कुछ अलग ही कहानी कहता है।

जवानी के ऊफान पर लोग कुछ भी कर गुजर जाते हैं, कोई जोखिम उठा लेते हैं लेकिन जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ने लगती है वह खुद को कमजोर पाने लगते हैं। बुढ़ापा आते-आते वह अपना सारा हौसला, सारी हिम्मत गंवाकर खुद को दूसरों पर निर्भर कर बैठ जाते हैं।

अगर आप भी इसी श्रेणी में शामिल हैं, वृद्धावस्था या फिर जीवन की किसी अन्य मुश्किल के आगे हार मान चुके हैं तो आज हम आपको एक ऐसे जीव से परिचित करवा रहे हैं जो अपनी हिम्मत और पैनी नजर की वजह से एक अलग ही पहचान रखता है।


बाज


बाज, यह एक ऐसा पक्षी है जो एक ही जीवन में दो बार जन्म लेता है। एक जब वो पैदा होता है और दूसरा, जब वो वृद्धावस्था के मुकाम पर पहुंचकर यह निर्णय लेता है कि उसे जीवन जीना है या फिर अपने अंत समय की प्रतीक्षा में समय व्यतीत कर देना है।
बाज तेज-तर्रार पक्षी माना जाता है लेकिन अपने जीवन में उसे भी एक ऐसे पड़ाव से गुजरना पड़ता है जब वह खुद को बेहद कमजोर महसूस करने लगता है।

उड़ान भरने में दिक्कत

आपको बता दें कि बाज 70 से 100 साल तक जीवित रहता है। लेकिन 40 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उसके कंधे बिल्कुल कमजोर हो जाते हैं और उड़ान भरने में दिक्कत करते हैं। 40 की उम्र पार करते ही उसके पंजे मुड़ने लगते हैं और शिकार पकड़ने में असमर्थ हो जाते हैं। इसकी चोंच जो कभी बहुत तीखी और नुकीली होती है वो भी मुड़ने लगती हैं।

मोटे हो जाने की वजह से पंख भी शरीर के साथ चिपकने लगते हैं जिसकी वजह से ये ठीक तरीके से उड़ भी नहीं पाता। ये वो समय होता है जब उसके पास दो विकल्प मौजूद होते हैं। वह चुपचाप मृत्यु के आगोश में सो जाए या फिर दोबारा जीवन को अपनाकर फिर से खुले आसमान में उड़ने लगे।


मृत्यु का इंतजार


मृत्यु का इंतजार करना आसान हो सकता है लेकिन फिर से जीवन जीने के लिए जिस दर्दनाक प्रक्रिया से होकर उसे गुजरना होगा वह करीब 5 महीने लंबी प्रक्रिया है। बाज हार नहीं मानता, वह जीवन की खोज में एक बड़ी और ऊंची चट्टान पर जाकर पहुंचता है।

उस ऊंची पहाड़ी पर पहुंचकर वह वहीं घोसला बनाकर रहना शुरू कर देता है। वह उस ऊंची और बड़ी चट्टान पर दिन-रात अपनी चोंच मारता है। वह तब तक अपनी चोंच मारता है जब तक कि वह चोंच टूट ना जाए। चोंच टूट जाने के बाद वह अपने पंजों को तोड़ता है और फिर खुद अपने पंखों को नोचकर फेंक देता है।


प्रक्रिया



इस प्रक्रिया के बाद बाज का शरीर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाता है। अब दोबारा पहले जैसी स्वस्थ अवस्था में पहुंचने के लिए उसे पांच महीने का इंतजार करना होता है। ये पांच महीने वह दर्द और कराहने में काटता है, बस इस उम्मीद के सहारे की समय बीतते ही वह फिर से अपनी खुशियां अपना हिम्मत वापस पा लेगा, वह उड़ सकेगा, शिकार कर सकेगा। इस प्रक्रिया के बाद आने वाले 30 साल और जीवित रहता है।

लेकिन आने वाले 30 सालों की खुशियां हासिल करने के लिए उसे बेहद कड़े और कष्टदायी इम्तिहान से होकर गुजरना पड़ता है। खुशियां हासिल करने के लिए कभी-कभी आपको बहुत बड़ा इम्तिहान देना पड़ता है, कभी-कभी अपना सब कुछ छोड़ना भी पड़ता है। लेकिन यकीन रखिए हौसले कि आगे मंजिल जरूर मिलती है।
40 की उम्र पार करते ही दूसरा जन्म लेता है बाज, जानिए एक अनोखी सच्चाई 40 की उम्र पार करते ही दूसरा जन्म लेता है बाज, जानिए एक अनोखी सच्चाई Reviewed by Gajab Dunia on 1:19 PM Rating: 5