लैला-मजनू की कहानी - यहां हुई थी लैला-मजनू की मौत

आज भी जब कहीं इश्क फ़रमाते हुए प्रेमी युगल (लव-बर्डस्) दिखते हैं तो लोग यही कहते हैं वो देखो लैला-मजनू… और कहें भी क्यों न अब जहां प्यार की बात आए वहां लैला-मजनूं का नाम न आए, ऐसा कभी हो सकता है? आप पर भी कभी न कभी मजनू या लैला का भूत चढ़ा ही होगा। दुनिया में सैकड़ों साल बाद भी लैला-मजनू की प्रेम कहानी अमर है।


सुनने में तो आता है कि इसका इतिहास कहीं न कहीं भारत से भी नाता रखता है। कहा जाता है कि दोनों ने अपनी ज़िंदगी के आखिरी लम्हे पाकिस्तान बॉर्डर से महज़ 2 किलोमीटर दूर राजस्थान की ज़मीन पर ही गुजारे थे।



उनकी याद में श्रीगंगानर ज़िले में ‘लैला-मजनू’ की मजार बनी है.. (मतलब ये सही है इस ज़ालिम दुनिया ने जीते जी तो उन्हें एक होने न दिया और जब वो मर गए तो उनका मजार बना दिया)। वैसे अगनूपगढ़ तहसील के गांव बिंजौर में बनी इस मजार पर आज के ज़माने के लैला-मजनू अपने प्यार की मन्नतें मांगने आते हैं।


यहां हुई थी लैला-मजनू की मौत



लोगों का मानना हैं कि (वैसे हमे नहीं पता कौन-से लोगों का 😛 ) लैला-मजनू सिंध प्रांत के रहने वाले थे। उनकी मौत यहीं हुई थी यह तो सब मानते हैं, लेकिन मौत कैसे हुई इसके बारे में कई मत हैं। कुछ लोगों का मानना है कि लैला के भाई को जब दोनों के इश्क का पता चला तो उसे बर्दाश्त नहीं हुआ और उसने क्रूर तरीके से मजनू की हत्या कर दी। लैला को जब इसका पता चला तो वह मजनू के शव के पास पहुंची और खुदकुशी कर जान दे दी… इसे ही तो कहते हैं सच्चा इश्क़।



कुछ लोगों का मत है कि घर से भाग कर दर-दर भटकने के बाद वे यहां तक पहुंचे और प्यास से उन दोनों की मौत हो गई… बिल्कुल उसी तरह जैसे हाल ही में महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में लोगों की सुखे की वजह से मौत हो रही है। वहीं, कुछ लोग यह भी मानते हैं कि अपने परिवार वालों और समाज से दुखी होकर उन्होंने एक साथ आत्महत्या कर ली (इन बातों का वास्तविकता से कोई लेना-देना है या नहीं ये आप google बाबा से पता कर सकते हैं।

पूरी होती हैं मन्नतें



हर साल 15 जून को लैला-मजनू की मजार पर दो दिन का मेला लगता है। जिसमें बड़ी संख्या में हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के प्रेमी और नवविवाहित जोड़े आते हैं और अपने सफल विवाहित जीवन की कामना करते हैं..बहुत खूब। खास बात यह है कि इस मेले में सिर्फ़ हिंदू या मुस्लिम ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में सिख और ईसाई भी शरीक होते हैं। यह पवित्र मजार प्रेम के सबसे बड़े धर्म की एक मिसाल है।


लैला-मजनू की कहानी


सदियों से लैला मजनू की कहानी सुनी-सुनाई जाती है और आज भी यह प्रेम कहानी लोगों के बीच अमर है। यह उस दौर की कहानी है जब प्रेम को बर्दाश्त नहीं किया जाता था और प्रेम एक गुनाह था। अरबपति शाह अमारी के बेटे कैस (मजनू) और लैला नाम की लड़की के बीच मरते दम तक प्यार चला और आखिर इसका अंत दुखद हुआ। उनके अमर प्रेम के चलते ही लोगों ने दोनों के नाम के बीच में ‘और’ लगाना मुनासिब नहीं समझा और दोनों हमेशा के लिए ‘लैला-मजनू’ के रूप में ही पुकारे गए।

बॉर्डर पर भी बनाई है मजनू पोस्ट

दुनिया में अतीत के इन महान प्रेमियों को भारतीय सेना ने भी पूरा सम्मान दिया है। भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित एक पोस्ट को बीएसएफ की ‘मजनू पोस्ट’ नाम दिया है। कारगिल युद्ध से पहले मजार पर आने के लिए पाकिस्तान से खुला रास्ता था, लेकिन इसके बाद आतंकी घुसपैठ के चलते इसे बंद कर दिया गया।
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