जानिए हैरान कर देने वाले क्रिकेट से जुड़े 31 किस्से - 1721 में भारत में खेला गया था पहला क्रिकेट मैच...

भारत में क्रिकेट की शुरूआत 17वीं शताब्दी में ही हो चुकी थी। 1721 में ईस्ट इंडिया कंपनी के अंग्रेज नाविकों द्वारा बड़ौदा के पास कैम्बे में क्रिकेट खेलने आए थे और यह भारत में क्रिकेट खेलने का सबसे पहले किस्सों में से है। भारत में, और इसके बाद पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश में क्रिकेट की शुरूआत और स्थापना ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा की गई थी।



1792 तक कलकत्ता क्रिकेट और फुटबॉल क्लब की शुरूआत हो चुकी थी। हालांकि 1799 में दक्षिण भारत में भी एक क्रिकेट क्लब शुरू हुआ था। 1845 में सेपॉय क्रिकेटरों ने यूरोप के क्रिकेटरों के साथ सिलहैट में मैच खेला था। आज ये जगह बांग्लादेश में स्थित है।




1848 में भारत में पहले क्रिकेट क्लब की शुरुआत हुई थी। क्लब का नाम ओरिएंटल पारसी क्रिकेट क्लब था और ये माना जाता है कि पहला अंतराष्ट्रीय क्रिकेट मैच 1844 में खेला गया था लेकिन आधिकारिक रूप से इंटरनेशनल टेस्ट क्रिकेट 1877 में शुरू हुआ था। उस समय क्रिकेट केवल इंग्लैंड में खेला जाता था जो अब एक पेशेवर रूप से ज्यादातर कॉमनवेल्थ देशों में खेला जाता है।



भारत में प्रथम श्रेणी क्रिकेट की शुरुआत 1864 में हुई थी। इस मैच में मद्रास और कलकत्ता की टीम का मुकाबला हुआ था।


1926 में मैरेलबोर्न क्रिकेट टीम ने भारत का दौरा किया था, हालांकि ये कोई आधिकारिक दौरा नहीं था लेकिन भारतीय खिलाड़ी इस टीम के साथ मैच खेलने को लेकर खासे उत्साहित थे। भारत के महान क्रिकेटर सी के नायडु ने उस टूर पर बेहतरीन खेल दिखाते हुए शतक जमाया था। भारत क्रिकेट बोर्ड की शुरूआत 1928 में हो चुकी थी और 1932 में भारत ने पहला टेस्ट मैच खेला था।




कई भारतीय राजाओं के प्रयासों के बाद रणजी ट्रॉफी की शुरूआत 1935 में हुई थी और ये टूर्नामेंट आज भी खेला जाता है। नवानगर के राजा रंजीत सिंह जो पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए थे, ने वहां जाकर क्रिकेट में अच्छा नाम बना लिया था। राजा रंजीत सिंह को फॉदर ऑफ इंडियन क्रिकेट कहा जाता था। हालांकि उन्होंने भारत के लिए कभी क्रिकेट नहीं खेला और वे ताउम्र इंग्लैंड के लिए क्रिकेट खेलते रहे। 19 शताब्दी का मध्य और अंतिम हिस्सा भारत की क्रिकेट में बढ़ती लोकप्रियता की गाथा कहता है।



भारतीय टीम के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड है जिसे वो याद नहीं करना चाहेगी। भारत दुनिया की इकलौती ऐसी टीम है जिसने किसी टेस्ट मैच में एक ही दिन में दो बार ऑल आउट होने का अनचाहा रिकॉर्ड बनाया था।




आजादी के बाद भारत ने पाकिस्तान को पहली बार 1952 में मात दी थी। इस सीरीज में पाली उमरीगर, विजय मांजरेकर और लेग स्पिनर एस एम गुप्ते ने शानदार प्रदर्शन किया था।



60 के दशक में भारत ने घरेलू जमीन के साथ साथ विदेशों में भी बेहतर खेल दिखाना शुरू किया था। इस दौर में ई प्रसन्ना, मंसूर अली खां पटौदी, दिलीप सरदेसाई, हनुमंत सिंह और चंदू बोर्डे जैसे खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था।



70 के दशक में भारतीय क्रिकेट टीम में स्पिनरों का बोलबाला रहा। बिशन सिंह बेदी, ईरापली प्रसन्ना, वेंकटराघवन और चंद्रशेखर जैसे फिरकी के जादूगरों ने विपक्षी खिलाड़ियों पर दबदबा बनाए रखा। इसी दौर में भारत के दो सबसे महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर और गुंडप्पा विश्वनाथ ने विश्व क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी से लोहा मनवाया।



80 का दशक भारतीय क्रिकेट के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। 1983 में भारत ने दुनिया की सबसे खतरनाक टीमों में शुमार वेस्टइंडीज को हराते हु देश में क्रिकेट की लोकप्रियता को बेतहाशा बल मिला था। इस दौर में भारत ने दुनिया को मोहम्मद अजहरूद्दीन, दिलीप वेंगसरकर जैसे बल्लेबाज और रवि शास्त्री जैसे ऑलराउंडर दिए।



इसी दशक में भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने 34 शतक बनाए जो विश्व क्रिकेट में रिकॉर्ड था। कपिल देव ने भी इस दौर में टेस्ट क्रिकेट में न्यूजीलैंड के रिचर्ड हैडली के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 434 विकेट लिए थे। इससे पहले ये रिकॉर्ड रखने वाले हैडली ने अपने जीवन में 431 टेस्ट विकेट लिए थे।



1989 और 1990 में सचिन तेंदुलकर और अनिल कुंबले को शामिल करने के बाद भारतीय टीम को काफी मजबूती मिली थी। उसके अगले साल ही भारतीय टीम में अमर सिंह के बाद सबसे तेज गेंदबाज जवागल श्रीनाथ ने भारतीय क्रिकेट में अपना पर्दापण किया था।

90 के दशक के आखिरी दौर तक सचिन हर घर में अपनी पहचान बना चुके थे। भारत में टीवी के केबल टीवी के आगमन के बाद लाखों की संख्या में लोग टीवी पर मैच दिखने लगे और सचिन अपनी दिलकश बल्लेबाजी से लोगों के दिलों पर राज करते रहे। 90 में ही सौरव गांगुली, राहुल द्रविड़, वीवीएस लक्ष्मण और वीरेंद्र सहवाग जैसे खिलाड़ियों ने क्रिकेट में अपनी पारी की शुरूआत की थी। ये सभी खिलाड़ी आगे चलकर मॉर्डन क्रिकेट के इतिहास के सबसे महान खिलाड़ियों की लिस्ट में अपना नाम दर्ज करवा गए।



2000 के आगमन के साथ ही भारतीय क्रिकेट पर बड़ा संकट आया। भारत के कलात्मक बल्लेबाज और कप्तान मोहम्मद अजहरूद्दीन का नाम मैच फिक्सिंग में आने के बाद उन पर बीसीसीआई ने आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। इसके अलावा अजय जडेजा पर भी 5 साल का बैन लगा था।



अजहरूद्दीन पर बैन लगने के बाद बंगाल के टाइगर सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट की कमान संभाली। मीडिया में इसे कांटों का ताज कहा गया और ये देखना दिलचस्प था कि मैच फिक्सिंग और खराब प्रदर्शन के दौर से गुजर रही भारतीय क्रिकेट को गांगुली किस दिशा में लेकर जाते हैं।



कप्तान गांगुली ने इसे चुनौती के तौर पर स्वीकार किया और वे अनुभवी और युवा क्रिकेटरों के कॉकटेल से भारत को चौंकाने वाले परिणाम देने लगे। गांगुली के ही नेतृत्व में युवराज सिंह, जहीर खान, हरभजन सिंह, वीरेंद्र सहवाग, मोहम्मद कैफ और एम एस धोनी जैसे खिलाड़ी अपने नायाब प्रदर्शन से टीम में अपनी जगह बनाई।



गांगुली आक्रामकता और सूझबूझ के साथ अपने विरोधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने लगे। 2001 में जब 14 टेस्ट मैच जीतकर ऑस्ट्रेलिया भारत का दौरा करने पहुंची तो गांगुली ने कप्तान स्टीव वॉ को टॉस के टाइम पर इंतजार करवा कर अपने तेवरों से परिचित करा दिया था। इसी सीरीज का दूसरा यानि कोलकाता टेस्ट मैच इतिहास के सबसे बेहतरीन मैचों में शुमार है



जब खेला गया सदी का सबसे बेहतरीन टेस्ट मैच (कोलकाता, 2001) भारत के मध्यमक्रम के बल्लेबाज वीवीएस लक्ष्मण, राहुल द्रविड़ और हरभजन सिंह के करिश्माई प्रदर्शन ने इस मैच को क्रिकेट के इतिहास का सबसे बेहतरीन मैच बना दिया था। भारत पहला मैच हारने के बावजूद धमाकेदार तरीके से सीरीज 2-1 से जीतने में कामयाब रहा था। गांगुली अपने तेवरों के साथ क्रिकेट की दुनिया पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने लगे थे।



2002 नैटवैस्ट सीरीज, जब गांगुली ने लार्ड्स की बालकनी में लहराई थी टी शर्ट: 2002 में इंग्लैंड में हुई त्रिकोणीय सीरीज में भारत और इंग्लैंड आमने सामने थे। भारत ने इस ऐतिहासिक मैच में 300 से ऊपर का लक्ष्य पहली बार हासिल कर नैटवैस्ट सीरीज अपने नाम की थी। इस जीत के हीरो रहे युवा मोहम्मद कैफ और युवराज सिंह थे। रोमांचक मुकाबले में भारत ने एक विकेट से जीत हासिल की थी। यही वह दौर था जब भारत लक्ष्य का पीछा करने में महारथ करने की शुरूआत कर चुका था। इसके अलावा युवा कैफ और युवराज टीम में अपनी जबरदस्त चपलता से फील्डिंग के स्तर को ऊपर ले जा रहे थे।



2002- 2003 भारत ऑस्ट्रेलिया सीरीज – भारत ने भले ही 2001 में कंगारूओं को धूल चटाई थी लेकिन उस जमाने में ऑस्ट्रेलिया को उन्हीं की धरती पर हराना नामुमकिन माना जाता था। ऑस्ट्रेलिया का दबदबा ऐसा था कि केवल दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर कोई भी टीम उनके सामने नहीं टिकती थी। भारत इससे पहले 1999 में ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर सचिन की कप्तानी में शर्मनाक तरीके से घुटने टेक चुका था।




लेकिन ये दौरा भारत के लिए ऐतिहासिक रहा। भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सीरीज को 1-1 से ड्रा किया और भारतीय टीम ने इस दौरे पर कई रिकॉर्ड तोड़े। ब्रिसबेन में खेले गए पहले ही टेस्ट में कप्तान गांगुली ने सैंकड़ा जड़ते हुए 144 की पारी खेलकर मैच ड्रा कराया। भारत ने दूसरे यानि एडीलेड में इतिहास रचते हुए जीत दर्ज की। जीत के सूत्रधार थे भरोसेमंद राहुल द्रविड और अजीत अगरकर। तीसरा मैच ऑस्ट्रेलिया ने जीता तो चौथा मैच भारत काफी दबाव बनाने के बावजूद ड्रा ही करा सका। इसी मैच में सचिन ने अपने टेस्टकरियर का सर्वाधिक स्कोर (248 नाबाद) बनाया।



इसके बाद भारत ने 2004 में पाकिस्तान टीम का लंबे अर्से बाद दौरा किया। सीमा पर आतंकवाद के चलते भारत और पाकिस्तान के बीच 15 सालों बाद किसी क्रिकेट सीरीज का आयोजन हो रहा था। भारत ने वन डे और टेस्ट दोनों ही सीरीज अपने नाम की थी। इस दौरे पर जहां इरफान पठान ने अपनी स्विंग गेंदबाजी से पाक के महान गेंदबाज वसीम अकरम की यादें ताजा कराई और बेहतरीन हैट्रिक जमाई थी। हालांकि वक्त के साथ साथ वे एक साधारण गेंदबाज में तब्दील होते चले गए।



इसी दौरे पर भारत के सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग मुल्तान के सुल्तान के तौर पर उभरे। सहवाग ने मुल्तान में भारत के लिए तिहरा शतक ठोंका और वे ऐसा करने वाले भारत के पहले बल्लेबाज बने। टेस्ट और वन डे में एक समान आक्रामकता वाले सहवाग से गेंदबाज टेस्ट क्रिकेट में भी खौफ खाने लगे। सहवाग की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी मॉर्डन क्रिकेट में बल्लेबाजों के दबदबे का गवाह थी। नजफगढ़ का यह नवाब अपने खालिस अंदाज से क्रिकेट का रूप बदलने की शुरूआत कर चुका था।



2000-2005 तक भारत के कोच रहे जान राइट और गांगुली का तालमेल टीम इंडिया के लिए नए इतिहास रचने लगा। भारत ने 2003 विश्व कप के फाइनल में जगह बनाई। कई विदेशी दौरों पर जीत दर्ज की और गांगुली को भारत के सबसे महान कप्तानों की लिस्ट में शुमार किया जाने लगा। लेकिन राइट के बाद आए ग्रेग चैपल ने भारतीय क्रिकेट में भूचाल ला दिया। गांगुली ने काफी विवादों के बाद आखिरकार कप्तानी छोड़ दी और टीम की कमान अब अनुभवी राहुल द्रविड़ के हाथों में थी।



द्रविड़ ने भारत के घरेलू और विदेशी धरती पर अच्छे प्रदर्शन को बनाए रखा। लेकिन 2007 में भारत के विश्व कप से बाहर होने के बाद द्रविड़ ने कप्तानी से इस्तीफा दे दिया और सहवाग कप्तानी के बड़े दावेदार के रूप में सामने आए।



हालांकि सेलेक्टर्स ने तेज तर्रार धोनी को मौका देते हुए 2007 टी विश्व कप में कप्तान बना दिया। नायाब धोनी ने टी 20 के पहले ही टूर्नामेंट में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए भारत को कप जीता दिया और वहीं से सहवाग का कप्तान बनने का सपना चूर हो गया।



धोनी इसके बाद भारत को एक के बाद एक खिताब जिताने लगे। धोनी की गिनती महानतम कप्तानों में होने लगी। धोनी भारत को विश्व कप, टी 20 विश्व कप, ऑस्ट्रेलिया में वन डे सीरीज जैसे खिताबों से भारत की झोली भर चुके थे। भारत का सुनहरा दौर अब अपने चरम पर था।



धोनी और युवराज की जोड़ी क्रिकेट के क्षितिज पर जगमगा रही थी। सचिन अद्भुत क्षमताओं का परिचय देते हुए क्रिकेट में शतकों का शतक लगा चुके थे। क्रिकेट को नया धर्म और सचिन को भगवान घोषित किया जा चुका था। टी 20 विश्व कप और 2011 विश्व कप में मैन ऑफ द सीरीज रहे युवराज सिंह कैंसर से भी जंग जीतने में कामयाब रहे।



2008 भारत के मध्यम वर्गीय परिवारों की तेज होती लाइफस्टायल को मैच करने के लिए भारत में आईपीएल की शुरूआत हुई। यह फुटबॉल की लीग की तर्ज पर ही बनाया गया। आईपीएल आईएसएल से भी प्रेरित था। आईपीएल के कांसेप्ट ने क्रिकेट को बदल कर रख दिया। फटाफट क्रिकेट के इस खेल में ताबड़तोड़ रन बनने लगे, गेंदबाजों के लिए कब्रगाह पिचों का निर्माण होना शुरू हुआ, पारंपरिक क्रिकेट प्रेमियों ने इसे दरकिनार कर दिया और टेस्ट क्रिकेट और वन डे क्रिकेट के लिए खतरनाक बनते जा रहे आईपीएल की लोकप्रियता में इजाफा होता रहा।



आईपीएल ने नए तरह के खिलाड़ियों को दर्शकों से रूबरू कराया। वे रिवर्स स्वीप में फाइन लेग के ऊपर से दनदनाता छक्का मार सकते थे। कीपर के ऊपर से बल्लेबाज छक्का मार दे रहे थे, क्रिकेट में आए इन अनोखे क्रिकेटीय शॉट्स ने दर्शकों के उत्साह को अलग स्तर पर ला दिया।




ए बी डिविलियर्स मार्डन क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज माने जाते हैं। वे क्रिकेट में फिटनेस को एक अलग ही स्तर पर ले गए हैं। जिन शॉट्स को देखकर बल्लेबाज कभी अंजाम देने के बारे में नहीं सोचते, एबी ऐसे शॉट्स खेल अपनी टीम को अक्सर मैच जीता देते हैँ। निसंदेह ए बी डिविलियर्स मॉर्डन क्रिकेट के सबसे बड़े सितारे हैं और भारत के विराट कोहली की भी अक्सर उनसे तुलना होती है। विराट भी अपने शानदार प्रदर्शन से भारत के सबसे नायाब बने हुए है।


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