एक 'नो बॉल' अंपायर की बहन के लिए बन गई मुसीबत

अलीगढ़ से 20 किलोमीटर दूर खैर के जरारा गांव में एक क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान एक गेंद को ‘नो बॉल’ करार देना मैच में अंपायर बने भाई को अपनी बहन की जान देकर चुकानी पड़ेगी ये किसी ने सोचा न होगा।



दरअसल इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की तर्ज पर इस साल इस गांव में जरारा प्रीमियर लीग का आयोजन किया गया। 14 मई से 30 मई तक चलने वाले इस मैच के विजेता को 5100 की धनराशि दी जानी थी, 28 मई तक टूर्नामेंट ठीक-ठाक चलता रहा। लेकिन इसी दिन गुल्ली जरारा और दिनेश जरारा के बीच खेले जा रहे मैच में अंपायरिंग कर रहे राजकुमार ने एक गेंद को नो बॉल दे दिया।
अंपायर के इस फैसले से खिलाड़ी संदीप पाल ने असहमति जताई और फैसले को बदलने के लिए कहा। लेकिन राजकुमार ने अपना फैसला नहीं बदला। जिस पर पाल ने उससे कहा कि इस गलती का खामियाजा अपने परिवार के किसी सदस्य की जान देकर चुकानी पड़ेगी। उस समय राज कुमार ने इस धमकी को नजरंदाज कर दिया क्योंकि पश्चिमी उतर प्रदेश में खेल के दौरान ऐसी धमकियां देना आम बात है।

लेकिन 29 मई को संदीप ने इस धमकी को हकीकत में बदल डाला। बीते रविवार को राजकुमार की बहनें पूजा, प्रीती, शमा और रूपवती जब बम्मे से मिट्टी लेने जा रहीं थीं तभी पाल ने उन्हें रोका और तमंचे के बल पर कोल्डड्रिंक में जहर मिलकर पिला दिया। जिससे पूजा वहीँ गिर पड़ी और उसकी मौत हो गई। जबकि तीन अन्य बहनें बेहोश हो गईं। जिसकी सूचना वहां से गुजर रहे एक शख्स ने परिजनों को दी। जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में इलाज के लिए हॉस्पिटल ले जाया गया। जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।

हालांकि पुलिस ने प्राथमिक जांच में कहा है कि जहर मिला कोल्डड्रिंक तमंचे के बल पर नहीं पिलाया गया। चूंकि पूजा पाल को जानती थी इसलिए उसने बिना शक उस कोल्डड्रिंक पी लिया।

फिलहाल पूजा के घर में मातम छाया हुआ है। पुलिस मामले की तफ्तीश में जुटी है और आरोपी पाल फरार है।

गांव के प्रधान और ने बुजुर्गों का कहना है कि इस क्षेत्र में ऐसे टूर्नामेंट का आयोजन ही गलत है क्योंकि यहां लोगों में खेल की भावना ही नहीं है। यही वजह है कि टूर्नामेंट के पहले ही साल यह काण्ड हो गया।
source: pradesh18
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