इको फ्रेंडली अंतिम संस्कार, मरने के बाद इंसान बन जायेगा पेड़

आपने बुज़ुर्गों को अक्सर ये कहते हुए सुना होगा कि इंसान मरने के बाद तारे बन जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंसान मरने के बाद पेड़ भी बन सकते हैं। आमतौर पर लोग मृत्यु के बारे में बात नहीं करना चाहते, यहां तक कि लोग इस शब्द को सुनना तक पसंद नहीं करते, लेकिन ये एक ऐसा तथ्य है जिससे कोई मुंह नहीं मोड़ सकता। दुनिया भर के धर्मग्रंथों में इस बात का जिक्र मिलता है कि इंसान का शरीर मिट्टी से बना है और एक दिन मिट्टी में ही मिल जाता है, लेकिन क्या मिट्टी बनने वाला इंसान पेड़ भी बन सकता है?



- आपको जानकर हैरानी होगी कि ऐसा संभव है लेकिन इसके लिए इंसान के शरीर का इको-फ्रेंडली अंतिम संस्कार करना होगा इटली के दो डिजाइनर्स ने एक प्रोजेक्ट की शुरुआत की है जिसका नाम है केप्स्यूला मुंडी। Capsula Mundi लैटिन भाषा का शब्द है जिसका मतलब है शरीर का प्रकृति के तीन तत्वों में बंट जाना और ये तीन तत्व हैं खनिज, वनस्पति और जानवर।



- प्रोजेक्ट के तहत मरने के बाद इंसान को कब्र में दफनाया या जलाया नहीं जाता बल्कि उसे पेड़ में तब्दील कर दिया जाता है। मरने के बाद इंसान कौन सा पेड़ बनेगा इसका चुनाव भी किया जा सकता है यानी अगर कोई इंसान मरने के बाद नीम का पेड़ बनना चाहता है या आम का पेड़ बनना चाहता है तो वो अपनी इच्छा के अनुसार ऐसा कर सकता है।



- ऐसा करने के लिए इंसान के शरीर को अंडे के आकार के एक ख़ास तरह के Case में रखा जाता है जिसे Organic Pod भी कहते हैं। इंसान के शरीर को इस Pod में उसी Position में रखा जाता है जैसी Position पैदा होने से पहले गर्भ में किसी बच्चे की होती है

- इसके बाद इस Pod को ज़मीन में बिल्कुल वैसे ही दबा दिया जाता है जैसे पेड़ उगाने के लिए बीज बोया जाता है। इसके बाद Pod के ऊपर वो पौधा लगा दिया जाता है जिसे मरने वाले इंसान ने मौत से पहले चुना था।

- वक्त बीतने के साथ शरीर धीरे-धीरे मिट्टी में मिल जाता है और उसी से मिले पोषक तत्वों से ये पौधा पेड़ बनने लगता है।

- ज्यादातर धार्मिक मान्यताओं में इंसान को उसकी मौत के बाद ज़मीन में दफना दिया जाता है। कहने को ये दो गज ज़मीन होती है लेकिन अब पूरी दुनिया में लोगों को दफनाने के लिए जगह की भी कमी पड़ने लगी है।

- आधे इंग्लैंड में 20 साल बाद लोगों को दफनाने के लिए जगह नहीं बचेगी।

- 2024 से 2042 के बीच कब्रिस्तान के लिए अमेरिका को करीब 209 स्क्वैयर किलोमीटर जमीन और चाहिए होगी। ये ज़मीन अमेरिका के लास वेगस शहर के क्षेत्रफल के बराबर है।

- Hong Kong में मर चुके लोगों की समाधि बनाने के लिए 5 साल की वेटिंग चल रही है।

- Hong Kong की बड़ी आबादी बौद्ध धर्म को मानने वाली है और बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग अपने पूर्वजों की समाधि पर जाकर प्रार्थना करते हैं।

- इस समस्या से निपटने के लिए Hong Kong में एक ऐसी जगह की व्यवस्था की गई है, जहां लोग अपना smart card Swipe करते हैं और एक मशीन लाखों अस्थि कलशों के बीच से परिवार के सदस्य का अस्थि कलश सामने लेकर आती है, और फिर उसके परिवार वाले प्रार्थना कर पाते हैं।

- भारत में अंतिम संस्कार के लिए पेड़ की लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता है और एक दाह संस्कार में करीब 500 से 600 किलो लकड़ी जलाई जाती है।

- भारत में अंतिम संस्कार के लिए 5 से 6 करोड़ पेड़ हर साल जला दिए जाते हैं। हालांकि भारत में इस समस्या से निपटने के लिए electric crematorium भी बनाए गए है, लेकिन ज्यादातर लोग धार्मिक वजहों से इसका इस्तेमाल नहीं करते।

- अमेरिका में भी इंसान की मौत पर्यावरण पर भारी पड़ती है, अमेरिका में ताबूतों के निर्माण के लिए हर साल 3 करोड़ फीट लकड़ी का इस्तेमाल होता है।

- इसके अलावा अमेरिका में हर साल 8 करोड़ किलो स्टील और 24 लाख किलो तांबे का इस्तेमाल ताबूत बनाने के लिए किया जाता है।

- फिलीपींस की राजधानी मनीला में North Cemetery के ऊपर ही लोगों ने घर बना लिए हैं, क्योंकि मनीला में रहने और मरने, दोनों के लिए जगह कम पड़ने लगी है, मनीला की North Cemetery में 10 लाख से ज्यादा कब्रें हैं।

मौत के बाद इंसान के शरीर का अंतिम संस्कार किस परंपरा के तहत होना चाहिए, ये धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा विषय और हम इसका पूरा समर्थन करते हैं, लेकिन आज जब हम अपनी जिंदगी को ज्यादा से ज्यादा Eco-freindly और Organic बनाने की कोशिश कर रहे हैं तो मौत को भी हरा भरा बनाने के बारे में हमें जरूर सोचना चाहिए। ये एक नया विचार है। अब हम इस विषय पर आपको थोड़ी सी Extra Knowledge दे देते हैं। अक्सर लोग कहते हैं कि जिंदगी बहुत मुश्किल होती है और जिंदगी जीते हुए कई कठिनाइयों का सामना इंसान को करना पड़ता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि अब मरना भी कोई सस्ता सौदा नहीं रह गया है।

- फिलीपीन्स की राजधानी मनीला में मौत के 5 साल बाद अगर कब्र का किराया नहीं चुकाया जाता है तो ताबूत को बाहर निकाल दिया जाता है और वो जगह किसी और को दे दी जाती है।

- मनीला में हर रोज़ 70 से 80 अंतिम संस्कार होते हैं और कब्रिस्तानों में जगह नहीं बची है।

- दुनिया भर में हर साल करीब 5 करोड़ 50 लाख लोगों की मौत अलग-अलग कारणों से होती है।

- पूरी दुनिया में इस वक्त 3 लाख करोड़ पेड़ हैं और हर इंसान के हिस्से में 422 पेड़ आते हैं, दुनिया भर के लोग अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए हर साल 1000 करोड़ पेड़ों को काट डालते हैं, या उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं

- ऐसे में दुनिया में हरे भरे पेड़ों की संख्या तेज़ी से कम हो रही है, लेकिन अगर सभी इंसान मरने के बाद पेड़ बन जाएं तो दुनिया को हर साल 5 करोड़ से ज्यादा पेड़ मिलने लगेंगे औऱ दुनिया एक बार फिर से हरी-भरी हो जाएगी।

- कनाडा में green cemeteries बनाए जाने की योजना है, यानी मृतक इंसान को मैदान में दफ्न कर देना। मर चुके इंसान के परिवार वाले GPS की मदद से उस जगह तक पहुंचेंगे जहां उनके अपने दफ्न हैं।

- जापान में I-Can Corp नाम की कंपनी ने virtual graveyards बनाए हैं जहां लोग Online visit कर सकते हैं और virtual सुगंधित अगरबत्तियां जला सकते हैं।



- हांगकांग में जगह की कमी की वजह से सोशल नेटवर्क पर virtual कब्रिस्तान बनाए जा रहे हैं। कब्र अक्सर जमीन के नीचे खोदी जाती है लेकिन अब कब्रिस्तान को इमारतों की शक्ल भी दी जा रही है

- दुनिया का सबसे ऊंचा कब्रिस्तान ब्राज़ील में है, जिसकी 32 मंज़िला इमारत में 1 लाख 80 हज़ार ताबूत रखे जा सकते हैं।
Source : DNA and techinsider

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