स्वर्ग जाने का रास्ता - पांडव गये थे यहीं से जीवित स्वर्ग!

यूं तो कश्मीर को ‘धरती का स्वर्ग’ कहा जाता है। परन्तु क्या आपको पता है कि भारतभूमि पर ही एक ऐसा स्थान है जहां से स्वर्ग की ओर जाया जा सकता है। ऐसी मान्यता है कि मनुष्य मृत्यु के पश्चात स्वर्ग या नर्क जाता है परन्तु इस मार्ग के जरिए मनुष्य बिना शरीर त्यागे स्वर्ग का दर्शन कर सकता है। इस तथ्य की प्रमाणिकता महाभारत काल में मिलता है।




यदि प्राकृतिक सुन्दरता के लिए कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है तो उत्तराखंड को कई धार्मिक स्थानों और देवी-देवताओं के वास स्थान के लिए धरती पर स्वर्ग और देव भूमि कहा जाता है, और यह कहना भी उचित है क्योंकि यही वह स्थान है जहां से सीधा स्वर्ग के लिए रास्ता जाता है। उत्तराखंड के गढ़वाल में हिमालय के बंदरपूंछ में स्थित ‘स्वर्गारोहिनी’ चोटी से ही स्वर्ग का रास्ता जाता है।




स्वर्गारोहिनी को महाभारत काल से ही स्वर्ग जाने के रास्ते के रूप में मान्यता प्राप्त है। महाभारत काल के ग्रंथों में इस स्थान का बहुत महत्व दिया गया है और इस स्थान के विषय में कहा गया है कि अंत में पांडव यहीं से चलकर जीवित ही स्वर्ग को गए थे। कहा जाता है कि जब पांडव और द्रौपदी इस मार्ग से स्वर्ग जा रहे थे तो उनके साथ पीछे-पीछे उनका कुत्ता भी गया था।



उसी समय से इस मार्ग को तीर्थ स्थलों में गिना जाने लगा। मान्यता है कि यही एक स्थान है जहां से मनुष्य जीवित ही स्वर्ग जा सकता है। हालांकि पांडवो के बाद किसी अन्य मनुष्य का इस मार्ग से जीवित स्वर्ग जाने का वर्णन नहीं मिलता। आज स्वर्गारोहिनी विश्व विख्यात तीर्थस्थल बन गया है। यहाँ आने वाले तीर्थयात्रियों का कहना है कि इस स्थान पर देवीय नूर है यहाँ की खूबसूरती भी सर्वोपरि है।

यहां अपार शांति और स्वर्ग में होने का एहसास प्राप्त होता है। उत्तराखंड से स्वर्गारोहिनी तक का रास्ता काफी कठिन है। साथ ही यह पूरा स्थान बर्फ से ढ़के होने के कारण इसकी खूबसूरती में चार-चांद लगाता है
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