बिना नींव का है ये किला, हजारों वीरांगनाओं ने यहां दी थी जान

झालावाड़ जिले में स्थित गागरोन के किले को जलदुर्ग भी कहा जाता है। 1423 ई. में मांडू के सुल्तान होशंगशाह ने बड़ी सेना के साथ इस किले पर हमला कर दिया। राजा अचलदास को लगा कि वह अब जीत नहीं सकते तो उन्होंने राजपूत परंपरानुसार लड़ते हुए अपनी जान दे दी।



वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल इस किले में आर्कियोलॉजी डिपार्टमेंट पर्यटकों के लिए अनेक सुविधाएं देने की तैयारी कर रहा है। गागरोन फोर्ट उत्तर भारत का एकमात्र ऐसा किला है जो तीन तरह से पानी से घिरा है। पानी से घिरा होने के कारण इस किले को जलदुर्ग भी कहा जाता है।




- अचलदास खींची मालवा के इतिहास प्रसिद्ध गढ़ गागरोन के अंतिम प्रतापी नरेश थे।
-मध्यकाल में गागरोन की संपन्नता एवं समृद्धि पर मालवा में बढ़ती मुस्लिम शक्ति की गिद्ध जैसी नजर हमेशा लगी रहती थी।
- अपने से कई गुना बड़ी सेना तथा उन्नत अस्त्रों के सामने जब - दुश्मन से अपनी अस्मत बचने के लिए किले में मौजूद हजारों महिलाओं ने आत्मदाह कर मौत को गले लगा लिया।




जलदुर्ग भी कहते हैं इसे
- गागरोन किले का निर्माण डोड राजा बीजलदेव ने बारहवीं सदी में करवाया था।
- 300 साल तक यहां खींची राजा रहे। यहां 14 युद्ध हुए हैं।
- यह उत्तरी भारत का एकमात्र ऐसा किला है जो चारों ओर से पानी से घिरा हुआ है। इस कारण इसे जलदुर्ग के नाम से भी पुकारा जाता है।
- यह एकमात्र ऐसा किला है जिसके तीन परकोटे हैं। सामान्यतया सभी किलों के दो ही परकोटे हैं।
- इसके अलावा यह भारत का एकमात्र ऐसा किला है जिसे बगैर नींव के तैयार किया गया है। बुर्ज पहाडियों से मिली हुई है।

इस किले से जुड़ा एक मिथ ऐसा भी
-लोगों का मानना है कि राजा के पलंग के पास किसी के सोने और हुक्का पीने की आवाज आती रहती है। यह मान्यता है कि राजा की आत्मा आज भी किले में रात में इसी पलंग पर सोती है।

अकबर ने बनाया था यहां मुख्यालय
- मध्ययुग में गागरोन को मुगल बादशाह अकबर ने जीत लिया था। अकबर ने इसे अपना मुख्यालय बनाया था। बाद में इसे अपने नवरत्नों में से एक बीकानेर के राजपुत्र पृथ्वीराज को जागीर में दे दिया था।
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