इस वृक्ष के पत्ते के गिरने का इंतजार करते हैं विदेशी, पढ़ें क्यों?

भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधीवृक्ष में देहरादुन स्थित वन अनुसंधन संस्थान की वैज्ञानिकों की देख-रेख में माइक्रो न्यूट्रशिन का छिड़काव किया गया है ताकि बढ़ती उम्र के बावजूद यह वृक्ष स्वस्थ और हरा-भरा बना रहे।



वर्तमान में मौजूद बोधी वृक्ष अपनी पीढ़ी का चौथा पेड़ है। यह 134 साल पुराना है और यह लगातार बीमार हो रहा था। इस वृक्ष को बीमारी से बचाने के लिए देहरादून स्थित वैज्ञानिक की टीम 2007 से ही देखभाल कर रही है।
 

उम्र होने के कारण बोधीवृक्ष को रेगुलर पौष्टिक जैसे पोटेशियम, नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस तो पर्याप्त मात्रा में लेते हैं लेकिन सूक्ष्म पौष्टिक जैसे जिंक, मैग्नेशियम और बोरॉन जैसे पदार्थ सही मात्रा में नहीं मिल पाती है। छिड़काव के जरिये इनकी पूर्ति करने की कोशिश की जाती है। पिछले कई साल से किये जा रहे छिड़काव का फायदा बोधीवृक्ष पर दिख रहा है।

इस बोधीवृक्ष से बौद्ध धर्म के मानने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी हुई है यही वजह है कि बौद्ध श्रद्धालु इस बोधीवृक्ष को स्वस्थ और हरा-भरा देखना चाहते हैं। देश विदेश से आनेवाले श्रद्धालु इसके पत्ते को चुनकर अपने साथ ले जाते हैं और पूजा घर में संजोकर रखते हैं।

महाबोधी मंदिर के मुख्य पूजारी भंते चालिंदा की मानें तो हर साल यहां लाखों बौद्ध श्रद्धालु एवं पर्यटक बोधगया आते हैं और उनकी आस्था बोधवृक्ष से जुड़ी हुई है।

यहां बोधीवृक्ष की क्षति पहुंचने की आशंका की वजह से पत्ता तोड़ने पर भी पांबदी लगी हुई है। यही वजह है कि यहां वृक्ष से पत्ता गिरने का इंतजार करते रहते हैं।

यह पेड़ का बौद्ध धर्म मानने वाले लोगों के लिए बेहद खास है। इसी जगह पर गौतम बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ है। इसी पेड़ के नीचे 531 ई.पू. भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। इस वृक्ष को बोधी वृक्ष कहते हैं।
इस वृक्ष के पत्ते के गिरने का इंतजार करते हैं विदेशी, पढ़ें क्यों? इस वृक्ष के पत्ते के गिरने का इंतजार करते हैं विदेशी, पढ़ें क्यों? Reviewed by Menariya India on 10:07 PM Rating: 5