देखे अस्सी के दशक की एयरहोस्टेस की लाइफ, कितनी ग्लैमरस और स्टाइलिश हुआ करती थी...

एयरहोस्टेस के प्रोफेशन को हमेशा आकर्षण और ग्लैमर से जोड़कर देखा जाता रहा है। इनकी जिंदगी के किस्से हमेशा से लोगों के बीच कौतूहल बने रहे हैं। इन ‘हवाई सुंदरियों’ को फिल्म स्टार्स की तरह समझा जाता है, जो दुनिया भर में घूमती रहती हैं। वे उन जगहों पर घूमना अफोर्ड कर सकती हैं, जो कुछ लोगों के ही बस की बात होती है। लेकिन हर चीज़ की तरह ही इस ग्लैमरस लाइफ का भी दूसरा पहलू है।


आज हम आपको बता रहे हैं कि अस्सी के दशक में एयरहोस्टेस किस तरह की जिंदगी जीती थीं, क्या करती थी। क्या पहनती थीं और कैसे उस ज़माने में अपनी जॉब को बैलेंस करती थीं। उस दौर से जुड़ी ये बातें आपको भी जाननी चाहिए। 





काफ़ी बदल गए हैं हालात




एयरहोस्टेस बनने में उस वक्त से लेकर अब तक काफी अंतर आ चुका है। वो दौर कम एयरलाइंस वाला, लेकिन लग्ज़री और ग्लैमर से भरा हुआ था। मुंबई निवासी एल्फिन फर्नाएंड ने 1974 में 21 साल की उम्र में एयर इंडिया को जॉइन किया था और 2009 में वह रिटायर हुईं।


 वह कहती हैं कि उस समय इस प्रोफेशन को अच्छा नहीं समझा जाता था। लोगों को लगता था कि यात्रियों का ध्यान रखना और आदमियों के साथ काम करना अच्छी बात नहीं है। जो लड़कियां इस काम में आती थीं, ज़्यादातर पारसी, कैथोलिक या फिर एंग्लो-इंडियन फेमिली से आती थीं।




महरुक चिकिलीवाला बताती हैं कि उस समय जो हिन्दू लड़कियां एयर होस्टेस के इंटरव्यू के लिए आती थी, या तो अपने परिवार से लड़कर आती थीं, या फिर झूठ बोलकर। चिकलीवाला 1969 से 2009 तक एयर इंडिया में काम कर चुकी हैं। वह आगे कहती हैं कि इस प्रोफेशन का लड़कियों में क्रेज़ था क्योंकि इसके लिए बहुत ज्यादा क्वालिफ़िकेशन की ज़रूरत नहीं थी, जबकि पैसे अच्छे मिला करते थे। साथ ही उड़ानें कम हुआ करती थीं और एक अंतर्राष्ट्रीय उड़ान के बाद हफ्ते भर तक का आराम मिल जाता था।



समय के साथ पढे-लिखे परिवारों से आई एयरहोस्टेस ने इस फील्ड में कदम रखा। देश भर से लड़कियां इस ‘ड्रीम जॉब’ के लिए मेहनत कर रही थीं, उनमें से एक थी सोढ़ी कंगा। उन्हें बचपन से ही इस जॉब में आने के लिए परिवार से सपोर्ट मिला। कंगा कहती हैं कि मैं शुरू से ही आसमान में उड़ना चाहती थी, एयरहोस्टेस का कॉन्फ़िडेंस, उनकी स्टाइलिश, ग्लैमरस लाइफ और दुनिया भर में घूमते रहने की जॉब मुझे अपनी तरफ खींचती थी। कंगा ने 1988 से 1996 तक एयर इंडिया के साथ काम किया और अब कॉर्पोरेट प्रोफेशनल को ट्रेनिंग दे रही हैं। 1989 में पेरिस में हुए ‘मिस वर्ल्स एयरलाइन पेजेंट’ की विनर बनने के बाद वह एयर इंडिया का ‘पब्लिक फेस’ बन चुकी थी।

नो वेट गेन, नो एक्ने, नो चश्मा




चिकलीवाला कहती हैं कि उस दौर में लैंगिक भेदभाव के कारण भी एयर होस्टेस को बहुत कुछ झेलना पड़ता था। पुरुषों की तुलना में महिलाओं के लुक को लेकर ज़्यादा बातें बनती थीं। वजन नही बढ़ना चाहिए, चेहरे पर दाग-धब्बे या एक्ने नहीं होने चाहिए। 

वजन बढ़ना या चश्मा लग जाना जॉब खतरे में पड़ने जैसा था। दूसरी तरफ, पुरुषों को शादी करने में कोई दिक्कत नहीं थी, जबकि महिलाएं शादी नहीं कर सकती थीं, तलाक़शुदा महिलाओं को भी मुश्किल होती थी। 1979 में कोर्ट में अपील करने के बाद एयर इंडिया की केबिन क्रू ने शादी करके भी जॉब करने की लड़ाई जीत ली। लेकिन अब भी कम से कम दो बच्चे पैदा करने की इज़ाजत नहीं थी। लड़ाई लंबी थी।




पिछली सदी के अंत तक भारतीय एयरलाइंस में केवल पुरुष ही सीनियर पोजीशन पर पहुंच पाते थे, जबकि महिलाएं केवल एयरहोस्टेस ही रहती थीं। चिकलीवाला कहती हैं कि ये भी एक अधिकार की लड़ाई थी, जिसे एयरहोस्टेस ने जीत लिया और कोर्ट के आदेश के बाद 2006 में मैं रिटायर होने के तीन साल पूर्व पहली फ्लाइट इन-चार्ज बन सकी।



उस वक़्त रिटायरमेंट की उम्र को लेकर भी पुरुषों का वर्चस्व तोड़ने की लड़ाई लड़नी पड़ी थी। उस दौर में पुरुष 58 साल की उम्र में रिटायर होते थे, जबकि महिलाएं 35 में, जो कि एयर इंडिया ने बढ़ाकर 1990 में 45 साल और 1993 में 50 साल कर दी। लेकिन समय के साथ महिलाओं की रिटायरमेंट की उम्र भी 58 साल तक पहुंची।


फैशनेबल लाइफ



फर्नाइंड कहती हैं कि उस समय भी हम मॉरीशस से लेकर बेरूत तक की मार्केट से शॉपिंग कर सकते थे और अपनी फेवरेट जगहों पर मस्ती कर सकते थे। 

एयरहोस्टेस की ड्रेस में भी समय के साथ काफी बदलाव आया। भारतीय एयरहोस्टेस पहले केवल साड़ी पहना करती थीं, उसके बाद साड़ी पहनने के तरीके बदले, फिर वेस्टर्न का ज़माना आया। बीच में एयरहोस्टेस पर घाघरा चोली का एक्सपेरिमेंट भी किया गया। भारतीय एयरहोस्टेस को कुछ ऐसे प्रजेंट किया जाता था, जिससे वे स्टाइलिश लुक में देशी टच के साथ ज़्यादा आकर्षक दिखें।


खतरनाक दौर था वो



70 व 80 के दशक में फ्लाइट हाईजैक की कई घटनाओं ने इस फील्ड को रिस्की बना दिया था। सितंबर 1986 में Pan Am की फ्लाइट के हाईजैक होने की बाद नीरजा भनोट नामक भारतीय एयरहोस्टेस ने उसमें बैठे यात्रियों को बचाने में अपनी जान दे दी। 23 साल की नीरजा ने मुंबई से न्यूयॉर्क जा रही फ्लाइट के सभी यात्रियों को इमर्जेंसी एक्ज़िट से बाहर निकाल दिया था।

नीरजा भनोट वाले मामले के एक साल पहले 1985 में सिख मिलिटेंट ने कनाडा से लंदन जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट को मार गिराया था। अटलांटिक महासागर से 31000 फीट की ऊंचाई पर उड़ा दिये गए इस प्लेन में सवार 329 लोग मारे गए थे। उस समय इस तरह के कई और प्रयास भी आतंकियों द्वारा किए गए।


रोमांस आम बात थी




फ्लाइट मेंबर्स के बीच आपस में और पैसेंजर्स के साथ भी रोमांस की खबरें काफी सुर्खियों में रहा करती थीं। किसी जमाने में एयरहोस्टेस रहीं परमेश्वर गोदरेज और मोरीन वाडिया ने बिजनेस टायकून आदि गोदरेज और नास्ली वाडिया से शादी की। ऐसी कई जोड़ियां हैं, जो फ्लाइट में बनीं, जब एयरहोस्टेस और इन पैसेंजर्स की देख-रेख करने के दौरान इनके बीच अफेयर हो गए।

बहरहाल, इन खूबसूरत एयरहोस्टेस की लाइफ तब भी ग्लैमरस थी और आज भी है, अगर कुछ बदला है तो वो है इस प्रोफेशन को लेकर सोसाइटी की सोच।
Image Source: TheHindu
Article Source: Qz
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