जानिए जब भीम को हो गया अपनी ताकत पर घमंड

हमें ताकत के नशे में " सभ्यता और विनम्रता" को छोड़ना नहीं चाहिए। जो लोग ताकत के घमंड में इन दोनों चीजों को त्याग देते हैं, वे जीवन में कई परेशानियों का सामना करते हैं। यहां जानिए महाभारत का एक प्रसंग जो बताता है कि ताकत के साथ घमंड हो तो व्यक्ति को परेशानियों का सामना करना पड़ता है...



भीम को हो गया था अपनी ताकत पर घमंड
पांडवों को जुए में हारने के बाद बारह साल का वनवास भोगना था। सभी पांचों भाई और द्रौपदी घने जंगलों में भटक रहे थे। वे कैलाश पर्वत के जंगलों में पहुंच गए। उस समय यक्षों के राजा कुबेर का निवास भी कैलाश पर्वत पर ही था।
कुबेर के नगर में एक सरोवर था, जिसमें बहुत सुगंधित कमल के फूल थे। द्रौपदी को उन फूलों की महक आई तो उसने भीम से कहा कि उसे कमल के ये फूल चाहिए। भीम द्रौपदी के लिए फूल लाने चल दिए।


रास्ते में एक घना जंगल था। भीम ने देखा एक बंदर रास्ते पर पूंछ डाले सो रहा है। किसी जीव को लांघकर गुजर जाना मर्यादा के विरुद्ध था। इसलिए, भीम ने बंदर से कहा अपनी पूंछ हटा लो। मुझे यहां से गुजरना है। बंदर ने नहीं सुना, भीम को क्रोध आ गया। उसने कहा तुम जानते हो मैं महाबली भीम हूं। बंदर ने कहा- इतने शक्तिशाली हो तो तुम खुद ही मेरी पूंछ रास्ते से हटा दो और गुजर जाओ।
भीम ने बहुत कोशिश की, लेकिन पूंछ टस से मस नहीं हुई। तब भीम हार मानकर बैठ गया और वानर से प्रार्थना करने लगा। तब वानर ने अपना असली रूप दिखाया। वे स्वयं पवनपुत्र हनुमानजी थे। उन्होंने भीम को समझाया कि तुम्हें कभी भी अपनी शक्ति पर इस तरह घमंड नहीं करना चाहिए।
अपनी शक्ति के नशे में अंधे हो जाना आम बात है। ऐसे लोग बिरले ही होते हैं जो जितने शक्तिशाली होते हैं, उतने ही विनम्र भी। शक्ति और विनम्रता ऐसे गुण हैं जो विपरीत स्वभाव के होते हैं, लेकिन अगर ये एक ही स्थान पर आ जाएं तो व्यक्ति महान हो जाता है।
जानिए जब भीम को हो गया अपनी ताकत पर घमंड जानिए जब भीम को हो गया अपनी ताकत पर घमंड Reviewed by Rajmal Menariya on 7:14 PM Rating: 5