तंत्र-मंत्र गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध हैं ये 10 मंदिर

पशु बलि, मृत इंसान की राख, मंत्र जाप. इन सब के बारे में आपने किताबों में पढ़ा होगा या फिल्मों में देखा होगा. लेकिन ये सारी तांत्रिक क्रियाएं हैं और भारत तांत्रिक गतिविधियों का गढ़ है. चाहे बात बनारस के अघोरियों की हो या पश्चिम बंगाल के काले जादू की. 

कई लोग इस तंत्र-मंत्र को अंधविश्वास समझते हैं. लेकिन ये बात कम ही लोग जानते होंगे कि तंत्र विद्या भारतीय रीति-रिवाज़ का एक महत्वपूर्ण अंग है और वेदों में इस विद्या का विस्तार से वर्णन भी है. इसीलिए भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जो आज भी अपनी तंत्र-मंत्र गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध हैं. 

तो जानते हैं कि ये मंदिर कौन से हैं और कहां हैं.


1. वैताल मंदिर, भुवनेश्वर, ओड़िसा


आंठ्वी सदी में बना ये मंदिर, भुवनेश्वर में है जहां तांत्रिक शक्तियां अपने चरम पर रहती हैं. यहां बलशाली चामुण्डा, जो काली का रूप हैं, उनकी मूर्ती है. इस मूर्ती के गले में नरमुंडों की माला है. तांत्रिकों का मानना है कि इस मंदिर की मद्धम रौशनी के कारण, सदियों से संग्रहित शक्तियों को समाहित करने के लिए इससे अच्छा स्थान नहीं है.



2. कालीघाट, कोलकाता, पश्चिम बंगाल


कोलकाता का कालीघाट तांत्रिकों के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण तीर्थ है और इसीलिए उनका यहां साल भर आना-जाना लगा रहता है. माना जाता है कि शिव भगवान की पत्नी, सती के अंग जब कट कर गिर रहे थे, तब उनकी उंगली इस स्थान पर गिरी थी और ऐसे अस्तित्व में आया कालीघाट मंदिर. यहां के रीति-रिवाज़ के अनुसार, काली मां को प्रसन्न रखने के लिए बकरे की बलि दी जाती है. यहां सैकड़ों तांत्रिक पूरे भारत से आ कर काली मां की पूजा करते हैं.



3. बैजनाथ मंदिर, हिमाचल प्रदेश


कई तांत्रिक ज्वालामुखी से बैजनाथ मंदिर जाते हैं जो प्रबल धौलाधार की तलहटी पर है. इस मंदिर के अंदर शिव भगवान या वैद्यनाथ का प्रसिद्ध 'लिंग' है. श्रद्धालु पूरे भारत से हर साल यहां वैद्यनाथ की पूजा करने आते हैं. कहा जाता है कि यहां के पुजारियों का वंश तबसे चला आ रहा है जबसे ये मंदिर बना है. बैजनाथ मंदिर का पानी अपनी पाचन शक्तियों के लिए प्रसिद्ध है और काफ़ी समय तक कांगड़ा घाटी के शासक सिर्फ़ इस मंदिर का ही पानी पीते थे.


4. कामाख्या मंदिर, गुवाहाटी, असम

असम का कामाख्या मंदिर प्रबल तांत्रिक समुदाय और तांत्रिक गतिविधियों का गढ़ माना जाता है. ये मंदिर असम के नीलांचल पर्वत पर है. पौराणिक कथाओं के अनुसार जब शिव भगवान सती का शव लेकर जा रहे थे, तब उनकी 'योनी' इस स्थान पर गिरी थी. और इसी स्थान पर कामाख्या मंदिर का निर्माण हुआ. इस मंदिर के अंदर एक प्राकृतिक गुफ़ा है जहां पानी का झरना भी है. 

थोड़ा और अंदर जाने पर एक रहस्यमयी कक्ष आएगा और यहां राखी हुई है रेशम की साड़ी और फूलों से सुसज्जित, 'मात्र योनी'. ये मंदिर, भारत के सबसे प्रभावशाली शक्तिपीठों में से एक है.


5. एकलिंग जी मंदिर, राजस्थान

भगवान शिव को समर्पित, एकलिंग जी मंदिर, उदयपुर के पास है. यहां शिव की एक अनोखी और बेहद खूबसूरत चौमुखी मूर्ती है जो काले संगमरमर से बनी है. कहते हैं इस मंदिर का निर्माण 764 AD में हुआ था. यहां पूरे साल तांत्रिकों का जमावड़ा लगा रहता है और शिवरात्रि का त्यौहार ज़ोरों-शोरों से मनाया जाता है.


6. बालाजी मंदिर, राजस्थान

बालाजी मंदिर जिसे मेहंदीपुर बालाजी मंदिर भी कहा जाता है, भरतपुर के पास दौसा जिले में है. तांत्रिक रीति-रिवाज़ों की नज़र से इस मंदिर को काफ़ी पवित्र माना जाता है. यहां की जीवनशैली में ही है जादू-टोना और झाड़-फूंक जैसी तांत्रिक गतिविधियां. कहते हैं कि जिन लोगों पर बुरे प्रेत या आत्माओं का साया पड़ जाता है वो यहां झाड़-फूंक के लिए आते हैं. 

इस तांत्रिक क्रिया को देखने के लिए आपको लोहे का जिगर चाहिए, क्योंकि इस प्रथा के समय लोगों के चीखने और चिल्लाने की आवाज़ें मीलों तक सुनाई दे सकती हैं. कई बार पीड़ितों को यहां अपने ऊपर से शैतानी साया उतरवाने के लिए कई दिनों तक रहना भी पड़ता है. बालाजी मंदिर से जाते वक़्त आप अपने अंदर एक अजीब-से भय का आभास करेंगे.


7. खजुराहो मंदिर, मध्य प्रदेश

भारत के मध्य में स्थापित, खजुराहो के मंदिर प्रसिद्ध हैं अपनी कलात्मक रचना और कामुक मूर्तियों के लिए. लेकिन कुछ ही लोग जानते हैं कि खजुराहो तांत्रिक गतिविधियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण स्थान है. यहां की मूर्तियों में इंसानी वासना और कामुकता को दिखलाया गया है, लेकिन इन कलाकृतियों का अर्थ कुछ और ही है, जो इंसान को अध्यात्म की राह पर ले जाता है. 

मनुष्य जब इस सांसारिक मोह-माया को त्याग देता है, तब उसे मोक्ष प्राप्त होता है. खजुराहो के मंदिरों में हर साल कई लोग इन कलाकृतियों और मूर्तियों को देखने आते हैं.


8. काल भैरों मंदिर, मध्य प्रदेश


मध्य प्रदेश के उज्जैन में काल भैरों का मंदिर है जहां भैरों की श्याममुखी मूर्ती है. तांत्रिक क्रियाओं के लिए ये मंदिर काफ़ी प्रसिद्ध है. इंदौर से एक घंटे की ड्राइव के बाद आप इस प्राचीन मंदिर तक पहुंचते हैं. तांत्रिक, सपेरे, अघोरी वगैराह, अपनी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत में यहां सिद्धि की खोज में आते हैं. वैसे तो यहां कई प्रकार के अनुष्ठान होते हैं, लेकिन भैरों की पूजा के लिए देसी ठर्रे का भोग लगाना अनिवार्य है.


9. ज्वालामुखी मंदिर, हिमाचल प्रदेश


ये मंदिर तांत्रिकों के लिए काफ़ी महत्त्व रखता है. यहां देश भर से श्रद्धालु और अविश्वासी आते हैं. इस मंदिर की रक्षा के लिए गोरखनाथ के अनुयायी हर समय पहरा देते हैं. कहते हैं कि गोरखनाथ में चमत्कारी ताकत है जिसकी वजह से भी तांत्रिक यहां आते हैं. 

ज्वालामुखी मंदिर के अंदर जाने पर आप देखेंगे कि यहां साफ़ पानी के दो कुण्ड हैं. इस कुण्ड के आस-पास नारंगी-पीले रंग की ज्वाला सदैव जलती रहती है और ऐसा लगता है कि पानी उबल रहा है, लेकिन हैरत तब होगी जब आप इस पानी को छूकर देखेंगे क्योंकि ये उबलता हुआ पानी एकदम ठंडा होगा.



10. महाकालेश्वर मंदिर, मध्य प्रदेश

महाकालेश्वर का मंदिर उज्जैन शहर का एक और प्रसिद्ध तांत्रिक केंद्र है. कुछ सीढ़ियां चढ़ने पर आप शिवलिंग तक पहुंच जाओगे. दिन भर यहां कई अनुष्ठान और रस्में निभायी जाती हैं लेकिन तांत्रिकों के लिए जो सबसे ज़रूरी रस्म है वो दिन के पहले पहर में होती है. 

इस क्रिया को बोलते हैं 'भस्म आरती' जो दुनिया में और कहीं नहीं होती. कहते हैं कि एक दिन पहले जिस शव का दाह संस्कार किया जाता है, उसी राख अगले दिन शिवलिंग को नहलाते हैं

अगर एक दिन पहले किसी का दाह संस्कार नहीं हुआ है तो किसी भी हालत में आस-पास के शमशान घाट से राख का इंतज़ाम किया जाता है. एक और मान्यता ये है कि जो इस भस्म आरती को अपने जीवन में देख लेता है उसकी कभी अकाल मृत्यु नहीं होती.


हैं न ये रीति-रिवाज़ अजीब, लेकिन तांत्रिकों का मानना है कि मोक्ष प्राप्त करने के लिए इन परम्पराओं का पालन करना बहुत ज़रूरी है. दुनिया में कई चीज़ें हैं जो विज्ञान के भी परे हैं, कई लोग इनको अंधविश्वास मान कर बेतुका बता देते हैं, लेकिन कई ऐसे भी लोग हैं जो अपना पूरा जीवन इस तंत्र-मंत्र विद्या को प्राप्त करने में लगा देते हैं. अब सत्य क्या है, ये तो ऊपरवाला ही जाने. बाकी आप देख लो, मानो या न मानो.
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