हिटलर के टॉप 10 Secret (गुप्त) सुपर हथियार - जाने

नाजी जर्मनी के तानाशाह हिटलर ने दुनिया को बर्बाद करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। उसने पूरी मानवता के सामने जिंदा रहने की चुनौती खड़ी कर दी थी। उसके पास एक से बढ़कर एक मारक हथियार थे।



आज हम आपके लिए लए है इन औजारों में से टॉप 10 सुपर वेपंस की जानकारी, जो विकसित नहीं हो पाए, पर अगर विकसित हो जाते, तो यकीनन आज दुनिया का नक्शा कुछ और ही होता।


1. द सन गन:



नाजी जर्मनी ने अंतरिक्ष पर कब्जा कर सन गन से पूरी दुनिया को जला डालने का प्लान बनाया था। इसके लिए वो अंतरिक्ष में 100 मीटर लंबे कांच से सूरज की गर्मी को धरती पर सीधे परावर्तित करे, जो जमीन पर पड़ते ही सबकुछ खाक कर देगी। ये कोशिश सूर्य की रोशनी को ही हथियार में बदलने की थी।


2. सोनिक तोप:



नाजी हथियारों में सबसे खतरनाक और मारक हथियार थी उनकी सोनिक तोप। जो 1940 के दशक में विकसित की गई थी। सोनिक तोप उस समय की तोपों की तुलना में बेहद दूर तक सटीकता से वार करती थी।


3. फेस्लर एफआई 103 आई रिचेनबर्ग:



नाजी जर्मनी द्वारा विकसित फेस्लर एफआई 103 आई रिचेनबर्ग रॉकेट बेहद सटीकता से वार करते थे। नाजियों के हजारों की संख्या में ये रॉकेट थे। हालांकि हिटलर की सेना अपनी क्षमता का महज 25 फेस्लर एफआई 103 आई रिचेनबर्ग रॉकेट ही इस्तेमाल कर पाई थी।


4. वी3 तोप:



उत्तरी फ्रांस के पास-दे-केलैस में इसका बेस बनाया गया था, जहां से सीधे ब्रिटेन पर बमबानी की जाती। इसकी लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता इसे बेजोड़ बनाती थी। हालांकि इसका इस्तेमाल कभी नाजी कर ही नहीं पाए, क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध में उन्हें अंदाजे से पहले ही पराजय मिल गई थी।


5. एक्स-रे गन:


नाजी जर्मन वैज्ञानिकों ने सीमेंस कंपनी की तकनीकी टीम की मदद से एक्स-रे गन बनाने की ओर अग्रसर थे। उन्होंने एक्स-रे गन बना भी लिया था। जिससे बिना किसी धमाके के ही मानवता का बड़ा विनाश संभव था। जर्मनी रेडियोएक्टिव लेजर राइफल बनाने के करीब पहुंच चुका था, जिसे बनाने में बाकी देशों को खासा पसीना बहाना पड़ा।


6. एग्रीगेट रॉकेट्स:



जर्मली के वी2 मिसाइलों ने 3 शहरों को नाश कर एक झटके में 9000 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। ये तो महज शुरुआत थी। जर्मनी इन मिसाइलों की अगली कड़ी के रूप में ए-12 मिसाइल विकसित कर रहा था, जो 10 टन वजनी पेलोड ले जाने में सक्षम होता। विशेषज्ञों का मानना था कि यूरोप से सीधे अमेरिका तक इस मिसाइल की पहुंच होती, तो अमेरिका पर हमलों को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही थी।


7. द वॉर्टेक्स तोप:



द वॉर्टेक्स तोप को एंटी-एयरक्राफ्ट गन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता। जो जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से कम न होते।


8. हेंकल ही 162:



नाजियों ने इसे सन 1944 में महज 3 माह की कोशिशों में विकसित कर लिया था। दरअसल, इसे क्राउड सोर्स के जरिए विकसित किया गया था। जो बेहद सस्ता था। डिजाइन को कई जर्मनियों ने मिलकर बनाया था। और 3 माह में ही 100 हल्के लड़ाकू विमान तैयार कर लिए थे। मगर इनमें से कुछ ही उड़ान भर पाए थे कि जर्मनी ने युद्ध में हार का मुंह देख लिया था। अगर ये विमान कुछ समय पहले विकसित कर लिए जाते, तो यकीनन जर्मनी युद्ध का वास्तविक नतीजा बदल सकता था।


9. द रैट टैंक:



जर्मनी ने लैंड क्रूजर गाड़ियों पर रखकर परिवहन योग्य अबतक के सबसे भारी टैंकों के निर्माण की योजना बनाई थी, जो 1500 टन तक वजनी होते। आम टैंक जहां 35-40 टन तक वजनी होते हैं, वहां 1500 टन भारी टैंक कितनी तबाही मचाता, इसके बारे में सोचकर ही डर लगता है।


10. द बेल:



इसे जर्मनी के सीक्रेट परमाणु हथियार के रूप में देखा जाता है। माना जा रहा है कि जर्मनी परमाणु हथियारों के विकास के बेहद नजदीक पहुंच चुका था। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद चेक गणराज्य की सीमा पर जर्मनी के सीक्रेट बेस से 3-5 मीटर के मेटेलिक ब्लॉक मिले थे, जिसमें परमाणु हथियारों को रखने की बात मानी जा रही है। कुछ सीक्रेट दस्तावेजों के मुताबिक हिटलर के वैज्ञानिकों ने कम से कम 2 परमाणु धमाके भी किए थे। जिनका खुलासा कुछ ही समय पहले हुआ है।

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Top 10 Secret SUPER WEAPONS by Hitler -


source : ufothetruthisoutthere
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