रबीन्द्रनाथ टैगोर के अनमोल विचार और कथन

रवीन्द्रनाथ ठाकुर को गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। वे विश्वविख्यात कवि, साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के एकमात्र नोबल पुरस्कार विजेता हैं। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति हैं। वे एकमात्र कवि हैं जिसकी दो रचनाएँ दो देशों का राष्ट्रगान बनीं - भारत का राष्ट्र-गान जन गण मन और बाँग्लादेश का राष्ट्रीय गान आमार सोनार बाँग्ला गुरुदेव की ही रचनाएँ हैं।उनकी काव्यरचना गीतांजलि के लिये उन्हे सन् 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।




अनमोल  विचार और कथन-


1: सिर्फ तर्क करने वाला दिमाग एक ऐसे चाक़ू की तरह है जिसमे सिर्फ ब्लेड है।  यह इसका प्रयोग करने वाले के हाथ से खून निकाल देता है।

2: आयु सोचती है, जवानी करती है।

3: कट्टरता सच को उन हाथों में सुरक्षित रखने की कोशिश करती है जो उसे मारना चाहते हैं।

4: पंखुडियां तोड़ कर आप फूल की खूबसूरती नहीं इकठ्ठा करते।

5: यदि आप रोते हो क्योंकि सूरज आपके जीवन से  बाहर चला गया है और आपके आँसू  आपको सितारों को  देखने के लिए रोकेंगे।

6: मित्रता की गहराई परिचय की लम्बाई पर निर्भर नहीं करती।

7: किसी बच्चे की शिक्षा अपने ज्ञान तक सीमित मत रखिये, क्योंकि वह किसी और समय में पैदा हुआ है।

8 : खुश रहना बहुत सरल है …लेकिन सरल होना बहुत मुश्किल है। 

9: हर एक कठिनाई जिससे आप मुंह मोड़ लेते हैं,एक भूत बन कर आपकी नीद में बाधा डालेगी।

10: जो कुछ हमारा है वो हम तक आता है ; यदि हम उसे ग्रहण करने की क्षमता रखते हैं।

11: तथ्य कई हैं पर सत्य एक है।

12: आस्था वो पक्षी है जो सुबह अँधेरा होने पर भी उजाले को महसूस करती है।

13: मंदिर की गंभीर उदासी से बाहर भागकर बच्चे धूल में बैठते हैं, भगवान् उन्हें खेलता देखते हैं और पुजारी को भूल जाते हैं।

14: मत बोलो, ‘यह सुबह है,’ और इसे कल के नाम के साथ खारिज मत करो. इसे एक  newborn child की तरह देखो जिसका अभी कोई नाम नहीं  है।

15: मैं एक आशावादी होने का अपना ही संसकरण बन गया हूँ. यदि मैं एक दरवाजे से नहीं जा पाता तो दुसरे से जाऊंगा- या एक नया दरवाजा बनाऊंगा. वर्तमान चाहे जितना भी अंधकारमय हो कुछ शानदार सामने आएगा।

16: मैं सोया और स्वप्न देखा कि जीवन आनंद है. मैं जागा और देखा कि जीवन सेवा है. मैंने सेवा की और पाया कि सेवा आनंद है।

17: यदि आप सभी गलतियों के लिए दरवाजे बंद कर देंगे तो सच बाहर रह जायेगा।

18: कला में व्यक्ति खुद को उजागर करता है कलाकृति को नहीं।

19: बीज के ह्रदय में प्रतीक्षा करता हुआ विश्वास जीवन में एक महान आश्चर्य का वादा करता है, जिसे वह उसी समय सिद्ध नहीं कर सकता।

20: जीवन हमें दिया गया है, हम इसे देकर कमाते हैं।

21: प्रेम अधिकार का दावा नहीं करता , बल्कि स्वतंत्रता देता है।

22: केवल प्रेम ही वास्तविकता है , ये महज एक भावना नहीं है.यह एक परम सत्य है जो सृजन के ह्रदय में वास करता है।

23: संगीत दो आत्माओं के बीच के अनंत को भरता है।

24: जब मैं खुद पर हँसता हूँ तो मेरे ऊपर से मेरा बोझ कम हो जाता है।

25: तितली महीने नहीं क्षण गिनती है, और उसके पास पर्याप्त समय होता है।

26:  अकेले फूल को कई काँटों से इर्ष्या करने की ज़रुरत नहीं होती।

27: उच्चतम शिक्षा वो है जो हमें सिर्फ जानकारी ही नहीं देती बल्कि हमारे जीवन को समस्त अस्तित्व के साथ सद्भाव में लाती है।

28:  बर्तन में रखा पानी चमकता है; समुद्र का पानी अस्पष्ट होता है. लघु सत्य स्पष्ठ शब्दों से बताया जा सकता है, महान सत्य मौन रहता है।

29: धुल स्वयं अपमान सह लेती है ओर बदले में फूलों का उपहार देती है

30:  मुखर होना आसान है जब आप पूर्ण सत्य बोलने की प्रतीक्षा नहीं करते।

31:  पृथ्वी  द्वारा स्वर्ग से बोलने का अथक प्रयास हैं ये पेड़।

32: हम महानता के सबसे करीब तब होते हैं जब हम विनम्रता में महान होते हैं।

33: उपदेश देना सरल है, पर उपाय बताना कठिन।

34: हम दुनिया में तब जीते हैं जब हम उसे प्रेम करते हैं।

35: कला क्या है ? यह इंसान की रचनात्मक आत्मा की यथार्थ के पुकार के प्रति प्रतिक्रिया है।

36:सिर्फ खड़े होकर पानी देखने से आप नदी नहीं पार कर सकते।

37: जिनके स्वामित्व बहुत होता है उनके पास डरने को बहुत कुछ होता है।

38: हम तब स्वतंत्र होते हैं जब हम पूरी कीमत चुका देते हैं।

39: तर्कों की की झड़ी, तर्कों की धूलि और अन्धबुद्धि ये सब आकुल व्याकुल होकर लौट जाती है, किन्तु विश्वास तो अपने अन्दर ही निवास करता है, उसे किसी प्रकार का भय नहीं है।

40: साधारण  दिखने  वाले  लोग  ही  दुनिया  के  सबसे  अच्छे  लोग  होते  हैं : यही  वजह  है  कि  भगवान  ऐसे  बहुत  से  लोगों का निर्माण करते हैं।

41: जो मन की पीड़ा को स्पष्ट रूप में नहीं कह सकता, उसी को क्रोध अधिक आता है।

42: मौत प्रकाश को ख़त्म करना नहीं है; ये सिर्फ दीपक को बुझाना है क्योंकि सुबह हो गयी है।

43: वो जो अच्छाई  करने में बहुत ज्यादा व्यस्त है ,स्वयं अच्छा होने के लिए समय नहीं निकाल पाता।

44: मिटटी के बंधन से मुक्ति पेड़ के लिए आज़ादी नहीं है।

45: हर बच्चा इसी सन्देश के साथ आता है कि भगवान अभी तक मनुष्यों से हतोत्साहित नहीं हुआ है।

46: हम ये प्रार्थना ना करें कि हमारे ऊपर खतरे न आयें, बल्कि ये करें कि हम उनका सामना करने में निडर रहे। 

47: आपकी मूर्ती का टूट कर धूल में मिल जाना इस बात को साबित करता है कि इश्वर की धूल आपकी मूर्ती से महान है। 

48: स्वर्ण कहता है -मुझे न तो आग से तपाने का दुःख है , न काटने पीसने से और न कसौटी पर कसने से, मेरे लिए तो जो महान दुःख का कारण है, वह है घुंघची के साथ मुझे तोलना। 

49: समय परिवर्तन का धन है, परन्तु घड़ी उसे केवल परिवर्तन के रूप में दिखाती है, धन के रूप में नहीं। 

50: जिस तरह घोंसला सोती हुई चिड़िया को आश्रय देता है, उसी तरह मौन तुम्हारी वाणी को आश्रय देता है। 

51: मनुष्य महानदी की भांति है जो अपने बहाव द्वारा नवीन दिशाओ में राह बना लेती है। 

52: विश्वास वह पक्षी है जो प्रभात के अंधकार में ही प्रकाश का अनुभव करता है, और गाने लगता है। 

53: देश का जो आत्माभिमान हमारी शक्ति को आगे बढ़ाता है, वह प्रशंसनीय है, पर जो आत्माभिमान हमे पीछे खींचता है, वह सिर्फ खूंटे से बांधता है, यह धिक्कारनीय है। 

54: सच्ची आध्यात्मिकता, जिसकी शिक्षा हमारे पवित्र ग्रंथो में दी हुई है, वह शक्ति है, जो अंदर और बाहर के पारस्परिक शांतिपूर्ण संतुलन से निर्मित होती है। 

55: विश्वविद्यालय महापुरुषों के निर्माण के कारखाने है और अध्यापक उन्हें बनाने वाले कारीगरहै।

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