देश की पहली रेलवे गेटमैन को सलाम - लखनऊ की मिर्ज़ा सलमा बेग

तहज़ीब और तहलीम के शहर लखनऊ में 22 साल की मिर्ज़ा सलमा बेग कला में स्नातक है. अब आप ये सोच रहे होंगे कि ये सब हम आपको क्यों बता रहे हैं? बात ही कुछ ऐसी है. मिर्ज़ा सलमा बेग देश के एक ऐसे व्यवसाय से जुड़ी हैं, जो अब तक पुरुष प्रधान समाज के लिए ही समझा जाता था. सर को हिजाब से ढकी हुई सलमा उत्तर रेलवे के लखनऊ मल्हौर स्टेशन पर गेटमैन का काम करती हैं.


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श्रम के लिहाज से ये कार्य केवल मर्दों के लिए जाना जाता था, क्योंकि इसमें लोगों को गेट पर रोकने के अलावा रेलवे के फाटक भी बंद करने पड़ते हैं. पर एक रेलवे भर्ती के दौरान जब रेलवे ने महिलाओं के लिए भी इसे खोला तो सलमा ने भी इस कार्य में रूचि दिखाई और रेलवे में गेटमैन के रूप में दाखिल हुईं.



सलमा की मां लकवाग्रस्त हैं और पिता भी बहरेपन का शिकार हैं, जिसकी वजह से सलमा पर ही घर की सारी जिम्मेदारी का भार आ पड़ा. सलमा के रिश्तेदारों और दोस्तों को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ और उन्होंने सलमा को कोई लड़कियों वाला काम करने की सलाह दी. पर अडिग इरादे रखने वाली सलमा पर इन सब बातों का कोई असर नहीं हुआ और अपनी छोटी बहन की पढ़ाई और परिवार के सहयोग के लिए वो इस रास्ते पर चल पड़ीं. ट्रेनिंग और 12 घंटे की मेहनतकश जॉब के दौरान भी सलमा कभी बगैर हिजाब के नहीं दिखाई देतीं.
देश की पहली रेलवे गेटमैन को सलाम - लखनऊ की मिर्ज़ा सलमा बेग देश की पहली रेलवे गेटमैन को सलाम - लखनऊ की मिर्ज़ा सलमा बेग Reviewed by Menariya India on 9:09 PM Rating: 5