प्लेटो के 100 अनमोल विचार और कथन - पढ़ें

प्लेटो यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक थे। वे सुकरात के शिष्य और अरस्तु के गुरु थे। इन तीनो दार्शनिको ने मिलकर पश्चिमी संस्कृति का दार्शनिक आधार तैयार किया था। प्लेटो होमर के समकालीन थे तथा उन्हें अफ़लातून के नाम से भी जाना जाता हैं।





अनमोल विचार और कथन :


1: मनुष्य द्वारा खुद पर काबू करना उसकी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण जीत होती है।

2: समझदार व्यक्ति इसीलिए बोलता है क्योंकि उसके पास बोलने के लिए या दुसरो से बांटने के लिए कई अच्छी बाते होती है, लेकिन एक बेवकूफ व्यक्ति इसीलिए बोलता है क्योंकि उसे कुछ न कुछ बोलना होता है।

3: कोई भी व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति का दोस्त नहीं हो सकता है, जिससे उसे प्यार न मिले।

4: तीन चीजो से बनता है मनुष्य का व्यवहार-चाहत,भावनाए और जानकारी।

5: सोचने का मतलब है की आपकी आत्मा खुद से बातचीत कर रही है।

6: मनुष्य द्वारा किया अच्छा व्यवहार उसे ताकत देता है और दुसरो को उसी तरह से अच्छा व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है।

7: कोई भी अच्छा निर्णय जानकारियो पर निर्भर करता है। आंकड़ों या संख्याओ पर नहीं।

8: कम चीजो के साथ जीवन जीना सबसे बड़ी दौलत है।

9: मनुष्य में ऐसी ताकत है जो आपको आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है या आपके पंख काटकर आगे बढ़ने के रास्ते बंद भी कर सकती है। ये आप पर निर्भर करता है कि आप कौन सी ताकत अपनाते है।

10: हर समय सेहत की चिंता करते रहना ही जीवन में सबसे बड़ी रूकावट है।

11: दो ऐसी चीजे है जिनके बारे में मनुष्य को कभी गुस्सा या खफा नहीं होना चाहिए। पहली, वह किन लोगो की मदद कर सकता है। दूसरी, वह किन लोगो की मदद नहीं कर सकता है।

12: काम की शुरुआत करना ही उसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

13: कोई भी कानून आपकी समझदारी से ज्यादा अहमियत नहीं रखता है।

14: जो व्यक्ति अच्छा काम करना नहीं जानता है, वह दुसरो से अच्छा काम कराने का हुनर भी नहीं रख सकता है।

15: किसी अच्छे कार्य को बार-बार करने से किसी का कोई नुकसान नहीं होता है।

16: तीन किस्म के लोग होते है-पहला, जो बुद्धिमान बनना चाहता है। दूसरा, जिसे अपनी प्रतिष्ठा से प्यार है और तीसरा, जो जिंदगी में कुछ हासिल करना चाहता है।

17: छोटी कक्षा में अच्छी ट्रेनिंग मिलना ही पढ़ाई-लिखाई का सबसे अहम हिस्सा होता है।

18: अगर कोई व्यक्ति पढ़ना पसंद नहीं करता है तो वह जिंदगी के अंतिम दिनों में बिलकुल अकेला दिखाई देता है।

19: जिस समाज में कोई अमीर या कोई गरीब नही होता है, वहां लोगो में सिर्फ अच्छे संस्कार पाए जाते है।

20:  व्यक्ति दुसरो पर राज करना चाहता है वह कभी राज नहीं कर सकता। वैसे ही जैसे कोई व्यक्ति किसी को पढ़ाने का दबाव महसूस करके अच्छा शिक्षक नहीं बन सकता है।

21:  एक नायक सौ में एक पैदा होता है, एक बुद्धिमान व्यक्ति हज़ारों में एक पाया जाता है, लेकिन एक सम्पूर्ण व्यक्ति शायद एक लाख लोगों में भी ना मिले।

22:  सभी व्यक्ति प्राकृतिक रूप से सामान हैं, एक ही मिटटी से एक ही कर्मकार द्वारा बनाये गए;और भले ही हम खुद को कितना भी धोखें में रख लें पर भगवान को  जितना प्रिय एक शसक्त राजकुमार है उतना ही एक गरीब किसान।

23: कोई भी व्यक्ति किसी को आसानी से नुकसान पंहुचा सकता है, लेकिन हर व्यक्ति दूसरों के साथ अच्छा नहीं कर सकता है।

24: स्वयं को इस जन्म औए अगले जन्म में भी काम में लगाइए।  बिना प्रयत्न के आप समृद्ध नहीं बन सकते। भले भूमि उपजाऊ हो, बिना खेती किये उसमे प्रचुर मात्र में फसले नहीं उगाई जा सकती।

25:  जैसा कि बिल्डर कहते हैं; छोटे पत्थरों के बिना बड़े पत्थर सही से नहीं लग सकते हैं।

26:  प्रेम के स्पर्श से सभी कवी बन जाते हैं।

27: थोड़ा सा जो अच्छे से किया जाए वो बेहतर है, बजाये बहुत कुछ अपूर्णता से करने से।

28:  साहस मुक्ति का एक प्रकार है।

29:  साहस ये जानना है कि किससे नहीं डरना है।

30:  चालाक….बुद्धिमत्ता की एक घटिया नक़ल है।

31:  मौत सबसे बुरी चीज नहीं है जो इंसान के साथ हो सकती है।

32:  लोकतंत्र तानाशाही में बदल जाता है।

33:  स्वतंत्रता की अधिकता, चाहे वो राज्यों या व्यक्तियों में निहित हो, केवल गुलामी की अधिकता में बदल जाती है।

34:  किसी व्यक्ति के लिए स्वयं पर विजय पाना सभी जीतों में सबसे पहली और महान है।

35:  पृथ्वी के अन्दर और ऊपर का सारा सोना भी सद्गुणों के बदले देना पर्याप्त नहीं है।

36: अगर हर एक व्यक्ति अपनी प्राकृतिक योग्यता के अनुसार,बिना और चीजों में पड़े, सही समय पर और सिर्फ एक काम करता तो चीजें कहीं गुना बेहतर और ज्यादा  होतीं।

37:  अच्छे कर्म स्वयं को शक्ति देते हैं और दूसरों को अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देते हैं।

38: अच्छे लोगों को जिम्मेदारी से रहने के लिए कहने हेतु क़ानून की ज़रुरत नहीं पड़ती, और बुरे लोग क़ानून से बच कर काम करने का रास्ता निकाल लेते हैं।

39: शायद ही कोई व्यक्ति एक साथ दो कलाओं या व्य्वसाओं को करने की क़ाबिलियत रखता हो।

40:  जो अच्छा सेवक नहीं है वो अच्छा मालिक नहीं बन सकता।

41:  वो जो कम चुराता है वो उसी इच्छा के साथ चुराता है जितना की अधिक चुराने वाला, परन्तु कम शक्ति के साथ।

42:  ईमानदारी अधिकतर बेईमानी से कम लाभदायक होती है।

43:  तुम ये कैसे साबित कर सकते हो कि इस क्षण हम सो रहे हैं, और हमारी सारी सोच एक सपना है; या फिर हम जगे हुए हैं और इस अवस्था में एक दूसरे से बात कर रहे हैं?

44:  मैंने कभी भी कोई करने योग्य चीज संयोग से नहीं की, ना ही मेरे कोई आविष्कार इत्तफाक से हुए, वो काम करने से आये।

45:  मेरा मानना है की आपका मौन सहमति है।

46: अगर इंसान शिक्षा की उपेक्षा करता है तो वह लंगडाते हुए अपने जीवन के अंत की तरफ बढ़ता है।

47:  अज्ञानता, सभी बुराइयों का मूल कारण है।

48: ये एक आम कहावत है, और सभी कहते हैं, की ज़िन्दगी केवल कुछ समय के लिए पड़ाव है।

49: यह उचित है की हर व्यक्ति को वह दिया जाये जिसके वो योग्य है।

50:  यदि उद्देश्य नेक ना हो तो ज्ञान बुराई बन जाता है।

51:  मजबूरी में अर्जित किया गया ज्ञान मन पर पकड़ नहीं बना पाता।

52:  बिना न्याय के ज्ञान को बुद्धिमानी नहीं चालाकी कहा जाना चाहिए।

53:  प्रेम एक गंभीर मानसिक रोग है।

54:  आवश्यकता, आविष्कार की जननी है।

55: अच्छे आदमी के साथ बुरा नहीं हो सकता, ना इस जीवन में ना मरने के बाद।

56:  कोई क़ानून या अध्यादेश समझ से शक्तिशाली नहीं हैं।

57:  मनुष्यो के जीवन में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसके लिए बहुत चिंता की जाये।

58:  एक व्यक्ति एक साथ कई कलाओं में सफल नहीं हो सकता।

59: राजनीति में भाग ना लेने का दंड यह है की आपको अपने से निम्न लोगों द्वारा शासित होना पड़ता है।

60:  केवल मृत लोगों ने युद्ध का अंत देखा है।

61:  राज्य के गठन का हमारा ध्येय सभी का परम आनंद है,किसी श्रेणी विशेष का नहीं।

62:  लोग धूल की तरह होते हैं। या तो वो आपको पोषण दे एक व्यक्ति के रूप में विकसित होने में मदद कर सकते हैं, या वो आपका विकास रोककर और थका कर मृत कर सकते हैं।

63:  कवी ऐसी महान और ज्ञान भरी बातें कहते हैं जो वो खुद नहीं समझते।

64: विज्ञान कुछ नहीं बस धारणा है।

65:  देश इंसानों की तरह होते हैं, उनका विकास मानवीय चरित्र से होता है।

66:  दोष उसका है जो चयन करता है; भगवान निर्दोष हैं।

67:  ऐसा समुदाय जहाँ ना गरीबी है ना समृद्धि हमेशा महान सिद्धांतो से बना होता है।

68:  जिस दिशा में शिक्षा व्यक्ति की शुरआत करती है वही जीवन में उसके भविष्य का निर्धारण करता है।

69: भगवान की सेवा सहनीय है जबकि इंसान की असहनीय।

70:  सबसे बड़ा धन काम में संतोषपूर्वक जीना है।

71: आदमी की पहचान इससे होती है कि वो पॉवर के साथ क्या करता है।

72:  तीन तरह के लोग होते हैं; ज्ञान के प्रेमी, सम्मान के प्रेमी, और लाभ के प्रेमी।

73:  अच्छी चीज को दुबारा करने में कोई नुकसान नहीं है।

74: प्रेम-प्रतिज्ञा जैसी कोई चीज नहीं होती।

75: सोचना: आत्मा का स्वयं से बात करना।

76: जो महान बनना चाहते हैं उन्हें ना स्वयं से ना अपने काम से प्रेम करना चाहिए, उन्हें बस जो उचित है उसे चाहना चाहिए, चाहे वो उनके या किसी और के ही द्वारा किया जाये।

77:  आप किसी व्यक्ति के बारे में एक साल के वार्तालाप की बजाये एक घंटे के खेल में अधिक जान सकते हैं।

78: बुद्धिमान लोग बोलते हैं क्योंकि की उनके पास कुछ कहने को होता है, जबकि बेवकूफ इसलिए क्योंकि उन्हें कुछ कहना होता है।

79: जहाँ आयकर होता है, वहां उचित व्यक्ति अनुचित व्यक्ति की अपेक्षा उसी आय पर अधिक कर देगा।

80: जब दिमाग सोच रहा होता है तो वो खुद से बात कर रहा होता है।

81: धन को एक महान दिलासा देने वाला जाना जाता है।

82:  माता-पिता अपने बच्चों को वसीयत में धन नहीं बल्कि श्रद्धा की भावना दें।

83: ज़िन्दगी को एक नाटक की तरह जीना चाहिए।

84:  मनुष्य- अर्थ की खोज में लगा एक प्राणी।

85:  यदि हम विश्वास के साथ लड़ते हैं तो हमारी शक्ति दुगनी हो जाती है।

86:  मैं शायद ही कभी ऐसे गणितज्ञ से मिला हूँ जो तर्क करना जानता हो।

87: वह एक बुद्धिमान व्यक्ति था जिसने बीयर का आविष्कार किया। 

88: सबके प्रति दयावान रहो, क्योंकि जिससे भी तुम मिलते हो वह जीवन की एक कठिन लड़ाई लड़ रहा है। 

89: स्वयं पर विजय प्राप्त कर लेना सबसे श्रेष्ठ और महानतम विजय होती है। 

90: हम एक बच्चे को आसानी से माफ़ कर सकते है जो की अँधेरे से डरता है लेकिन जीवन की असली त्रासदी तब है जब इंसान प्रकाश से डरने लगे। 

91: प्यार अच्छे की ख़ुशी, बुद्धिमान का आश्चर्य और भगवान का विस्मय है। 

92: हमारी ताकत दुगुनी हो जाती है अगर हम विश्वास के साथ लड़ते है। 

93 राय ज्ञान और ज्ञान के बीच एक माध्यम है। 

94: जीवन को एक खेल की तरह जीना चाहिए। 

95: लोकतंत्र तानाशाही में गुजरता है। 

96: काव्य इतिहास से ज्यादा सत्य के नज़दीक है। 

97: विज्ञान,  धारणा के अलावा कुछ नहीं है। 

98: दर्शन उच्चतम संगीत है। 

99: आश्चर्य , दार्शनिक की भावना है और दर्शन आश्चर्य से शुरू होता है। 

100: चमचमाती हुई स्वर्ण से जड़ित अनुपयोगी ढाल से गोबर की उपायोगी टोकरी अधिक सुंदर है।
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