भारत के ये 10 गुमनाम रियल हीरो जो हमें हमेशा प्रेरित करते रहेंगे !

"इस कदर वाकिफ़ है मेरी कलम मेरे जज़्बातों से, अगर मैं इश्क़ लिखना भी चाहूं तो इंक़लाब लिखा जाता है" भगत सिंह के इस वाक्य से तो आप वाकिफ़ ही होंगे। देशभक्ति उनके अंदर इस कदर हावी थी कि वो हर पल देश के बारे में सोचते रहते थे।



देश को आज़ाद करवाने में कई सपूतों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. वहीं आज़ादी के बाद भी देश पर दुश्मनों ने कई बार हमले किए, ऐसे में देश के सच्चे सपूतों ने न सिर्फ़ पलट कर जवाब दिया बल्कि उनका जीना दुश्वार भी कर दिया। इन युद्धों में हमने कई जवानों को खोया है, कुछ का नाम हमारे ज़ेहन में है तो कुछ जवान अभी भी गुमनामी की ज़िंदगी जी रहे हैं। लेकिन हम आज आपको ऐसे ही बहादुर जवानों से मिलवाने जा रहे हैं जिनके बारे में जान कर आपका सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा।


1. कैप्टन अनुज नैय्यर



देश के बहादुर सैनिक कैप्टन अनुज को 1999 के कारगिल युद्ध में सबसे ऊंची घाटी को अपने कब्ज़े में लेने को कहा गया था। वो अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहे थे, तभी पाकिस्तानी रॉकेट लांचर उनके शरीर को भेद गया, फिर भी कैप्टन ने अंतिम सांसों तक अपना टार्गेट पूरा कर लिया। LOC फ़िल्म में सैफ़ अली ख़ान ने इनका रोल किया था।



2. कैप्टन नीलकंठन जयचंद्रन नायर



मराठा बटालियन में शामिल नीलकंठन जयचंद्रन नायर को 1993 में नागा विद्रोहियों से निपटने के लिए नागालैंड भेजा गया था। वहां उन्होंने अपनी आहुती देकर पूरे बटालियन को बचाया था. इनकी बहादुरी को अभी भी लोग याद करते हैं।



3. ब्रिगेडियर कुलदीप सिंह चांदपुरी



जेपी दत्ता की प्रसिद्ध फ़िल्म 'बॉर्डर' तो आपने देखी ही होगी. इसमें सनी देओल ने इनकी भूमिका निभाई थी। 1971 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में 124 सैनिकों की मदद से इन्होंने पाकिस्तान को पानी पिला दिया था।



4. गुरबचन सिंह सलारिया



26 साल के गुरबचन सिंह सलारिया को भले न हम जानें, लेकिन इनकी वीरता को संयुक्त राष्ट्र और अफ्रीकी देशों के लोग आज भी सलाम करते हैं। अफ्रीकी देशों में गृह युद्ध को रोकने का ज़िम्मा इस बहादुर को ही दिया गया था।



5. राइफ़लमैन जसवंत सिंह



देश के इस बहादुर बेटे के बारे में जितना ज़्यादा बोला जाए उतना ही कम होगा। इंडो-चाइना युद्ध के दौरान ये चीनी सैनिकों के सामने अकेले पड़ गए थे। ऐसी हालत में दो स्थानीय निवासियों की मदद से इन्होंने चीनी सैनिकों को बेवकूफ़ बनाया. बाद में चीनी सैनिकों के चंगुल में आने से पहले ही इन्होंने खुद को गोली मार ली।



6. कैप्टन विक्रम बत्रा



1999 कारगिल युद्ध के जांबाज़ सिपाही कैप्टन विक्रम बत्रा वाकई में एक सुपर हीरो थे। इनका मनोबल देख कर दुश्मन भी ख़ौफ़ खाते थे। अपनी बदौलत इन्होंने पाकिस्तान के कई ठिकानों को ध्वस्त किया. फ़िल्म LOC में अभिषेक बच्चन ने इनका रोल निभाया था. अंतिम समय में इनके आख़िरी शब्द 'जय माता दी' था।


7. अर्जुन कुमार वैद्य



महावीर चक्र से सम्मानित अर्जुन कुमार वैद्य देश के सच्चे वीर हैं। इन्होंने कई मौकों पर देश को अपनी सेवा दी. पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध और ऑपरेशन ब्लू स्टार में इन्होंने काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।



8. नंद सिंह



द्वितिय विश्व युद्ध के दौरान नंद सिंह को बर्मा भेजा गया था। वहां उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. 1947 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में इन्होंने दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। हालांकि पाकिस्तानी सैनिकों के हाथों वो शहीद हो गए।



9. मेजर संदीप उन्नीकृष्णन



'मत आओ मैं संभाल लूंगा'. मुंबई अटैक के दौरान मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के ये आख़िरी शब्द थे। 2008 के मुंबई अटैक को कौन भूल सकता है भला? आतंकवादियों के हमले को नाकाम बनाने के लिए संदीप उन्नीकृष्णन ने अपनी ज़िंदगी कुर्बान कर दी।



10. कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला

1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तानियों ने भारत के जलपोत को अपना निशाना बनाया. उस जलपोत पर कई लोग मौजूद थे। उनकी ज़िंदगी बचाने के लिए कैप्टन महेंद्र नाथ मुल्ला ने अपनी ज़िंदगी दांव पर लगा दी. आज देश के वीर को देश के लोग एक सम्मान की नज़र से देखते हैं।
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