स्वास्तिक को विश्व के कई देशों में अलग-अलग नामों से पहचाना जाता है, रहा दुनिया भर की संस्कृति का हिस्सा !

स्वास्तिक को विश्व के कई देशों में अलग-अलग नामों से पहचाना जाता है. इन देशों के लिए स्वास्तिक के चिन्ह का अपना एक अलग अर्थ और महत्व रहा है. वहीं भारत में इस चिन्ह को भगवान गणेश और लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. यही कारण है कि यहां किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले इसे पूजा की जगह पर चिन्हित किया जाता है. चार हज़ार साल पहले सिंधु घाटी की सभ्यता में भी स्वास्तिक के प्रमाण मिलते हैं. वास्तुशास्त्र के अनुसार स्वास्तिक उत्तर, पश्चिम, पूर्व, दक्षिण दिशाओं का प्रतीक है. लेकिन लंबे समय से सौभाग्य का प्रतीक रहे स्वास्तिक के चिन्ह को उस समय खौफ़ और नफ़रत का प्रतीक माना जाने लगा जब इस चिन्ह को हिटलर ने अपना लिया था.


1. पूर्वी यूरोप



यूरोप के शुरुआती दौर में स्वास्तिक का प्रयोग एक पवित्र चिन्ह के रूप में किया जाता था. वास्तव में इसका संबंध सबसे शाक्तिशाली नॉर्स देवता, ‘थॉर’ से है. यह माना जाता है कि उनके प्रसिद्ध हथौड़े के पीछे ‘स्वास्तिक’ का चिन्ह बना था.



2. ग्रीस




प्राचीन ग्रीस का एक चिन्ह स्वास्तिक जैसा ही दिखता है, जिसे Gammadion कहते हैं. ये चिन्ह वहां की वर्णमाला के उन चार कैपिटल शब्दों से मिलता-जुलता है, जो ‘कॉमन सेंटर’ को जोड़ते हैं.


3. प्रारंभिक ईसाई समुदाय



अपने प्रारंभिक दौर में क्रिश्चन स्वास्तिक का प्रयोग क्राइस्ट के चिन्ह के रूप में करते थे. ये Jesus Christ के क्रॉस का प्रतिनिधित्व करता था. और जब रोमन द्वारा क्रिश्चन्स को सताया जा रहा था, उस दौरान भी इस चिन्ह का प्रयोग रोज़ाना किया जाता था. यहां तक कि पादरियों ने भी अपनी पोशाक पर ‘स्वास्तिक’ के चिन्ह को बना रखा था.


4. फिनलैंड



हजारों सालों से फिनलैंड में स्वास्तिक को एक अच्छी तक़दीर का चिन्ह माना जाता है. ये चिन्ह फिनलैंड की संस्कृति और इतिहास के एक बड़े हिस्से में समाया है. और तो और ‘स्वास्तिक के सीधे खड़े’ स्वरूप को सदियों से गहनों और कपड़ों पर इस्तेमाल किया जाता रहा है.



5. तिब्बत



स्वास्तिक ‘लौकिक ऊर्जा’ के एक रूप का नाम है, जिसे Fohat का प्रतीक माना जाता है. मैडम हेलेना ने स्वास्तिक को कुछ इस तरह से परिभाषित किया है, "असल में, स्वास्तिक एक अत्यंत शाक्तिशाली जीवन से जुड़ा है जो व्यवस्था के प्रति एक भरोसा स्थापित करता है.



6. हिन्दू समुदाय



हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य में स्वास्तिक का प्रयोग अलग-अलग तरीके से किया जाता है. चाहे वह शादी हो, बच्चे का मुंडन या कोई भी छोटी या बड़ी पूजा. स्वास्तिक शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द स्वास्तिका से हुई है. जिसका अर्थ है ‘कुछ अच्छा होने वाला है’. स्वास्तिक हिन्दू देवता गणेश और देवी लक्ष्मी का भी चिन्ह माना जाता है.



7. Navajo Regions  (नवाजो क्षेत्र)



अमेरिका के मूल निवासी अपनी संस्कृति में स्वास्तिक को अच्छे भाग्य का चिन्ह मानते हैं. Navajo जनजाति के लोग इसके डिज़ाइन को चांदी के आभूषणों से लेकर अपनी कई चीज़ों का हिस्सा बनाते हैं, जिसे चारों दिशाओं का प्रतीक माना जाता है.




8. ब्रिटिश साहित्य



ब्रिटिश रचनाकार Rudyard Kipling ने स्वास्तिक का प्रयोग अपनी किताबों पर एक मुहर के रूप में किया था. उन्होंने अपनी किताबों से इस चिन्ह को तब हटा दिया, जब नाज़ी ने इसे अपना लिया था.


9. Raelian आंदोलन



रायल नामक वैश्विक व मशहूर व्यक्ति ने स्वास्तिक और डेविड के सितारे दोनों को सांस्कृतिक रूप से अधिग्रहित किया. रायल में विश्वास रखने वालों का ऐसा मानना है कि डेविड के तारे अंतरिक्ष में शून्य का प्रतिनिधित्व करते हैं तो वहीं स्वास्तिक काल और समय के शून्य का द्योतक है. यह एक बेहद नया आंदोलन था और स्वास्तिक के इस्तेमाल की वजह से इस ग्रुप को काफ़ी आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा.



10. बौद्ध समुदाय



बौद्ध धर्म में स्वास्तिक को अच्छे भाग्य का प्रतीक माना गया है. यह भगवान बुद्धा के पद्चिन्हों को दिखाता है, इसीलिए इसे इतना पवित्र माना जाता है. यहां तक कि स्वास्तिक भगवान बुद्धा के हृदय, हथेली और पैरों में भी अंकित था.
Source: viralnova
स्वास्तिक को विश्व के कई देशों में अलग-अलग नामों से पहचाना जाता है, रहा दुनिया भर की संस्कृति का हिस्सा ! स्वास्तिक को विश्व के कई देशों में अलग-अलग नामों से पहचाना जाता  है, रहा  दुनिया भर की संस्कृति का हिस्सा ! Reviewed by Menariya India on 12:29 AM Rating: 5