नवरात्रि स्पेशल : जाने 52 शक्ति पीठों में से एक कामाख्या देवी के बारे में

कामाख्या मंदिर असम की राजधानी दिसपुर से 7 किलोमीटर दूर कामाख्या मे है. कामाख्या से भी 10 किलोमीटर दूर नीलाचंल पर्वत पर स्थित है. यह मंदिर शक्ति की देवी सती का है और इसका तांत्रिक महत्व भी है. हम इस मंदिर में पूजा करने तो जाते हैं लेकिन यहां के बारे में कई ऐसी बाते हैं, जिनसे हम आज तक अंजान हैं. आईए आपको उन तथ्यों से रूबरू करवाते हैं.



1. असम के शहर गुवाहाटी के पास सती का ये मंदिर 52 शक्ति पीठों में से एक है. इस मंदिर में देवी सती या दुर्गा की एक भी मूर्ति आपको देखने को नहीं मिलेगी.






2. 16वीं शताब्दी में इस मंदिर को तोड़ दिया गया था, लेकिन फ़िर 17वीं शताब्दी में कूच बिहार के राजा नारा नारायणा ने इस मंदिर को दोबारा बनवाया.






3. इस मंदिर के बाहरी परिसर में आपको कई देवी-देवताओं की आकृति देखने को मिल जाएगी.





4. ये मंदिर तीन हिस्सों में बना हुआ है. पहला हिस्सा सबसे बड़ा है इसमें हर व्यक्ति को नहीं जाने दिया जाता, वहीं दूसरे हिस्से में माता के दर्शन होते हैं जहां एक पत्थर से हर वक्त पानी निकलता रहता है. कहा जाता है कि महीने में एक बार इस पत्थर से खून निकलता है.






5. देवी सती ने अपने पिता के खिलाफ जाकर भगवान शिव से शादी की थी, जिसके कारण सती के पिता दक्ष उनसे नाराज़ थे. एक बार राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन करवाया लेकिन अपनी बेटी और दामाद को निमत्रंण नहीं भेजा. सती इस बात से नाराज़ तो हुईं, लेकिन फ़िर भी वो बिना बुलाए अपने पिता के घर जा पहुंची, जहां उनके पिता ने उनका और उनके पति का अपमान किया. इस बात से नाराज़ हो कर वो हवन कुंड में कूद गईं और आत्महत्या कर ली. जब इस बात का पता भगवान शिव को चला तो वो सती के जले शरीर को अपने हाथों में लेकर तांडव करने लगे, जिससे इस ब्रह्मांड का विनाश होना तय हो गया. लेकिन विष्णु भगवान ने सुदर्शन चक्र से सती के जले शरीर को काट कर शिव से अलग कर दिया. कटे शरीर के हिस्से जहां-जहां गिरे वो आज शक्ति पीठ के रूप में जाने जाते हैं.

6. इस जगह देवी सती की योनि गिरी थी. इसी कारण इस मंदिर को कामाख्या कहा जाता है.





7. इस मंदिर से एक कहानी और जुड़ी है. कहा जाता है कि नराका नाम के एक दानव को कामाख्या देवी से प्यार हो गया था और उसने शादी का प्रस्ताव दे डाला. लेकिन देवी ने इसके लिए एक शर्त रखी कि अगर वो निलांचल पर्वत पर सीढ़ियां बना देगा तो वो उससे शादी कर लेंगी.




8. नराका ने इस शर्त को मान लिया और अपने काम में लग गया. आधी रात तक उसने काफ़ी ज़्यादा काम खत्म कर दिया. जब देवी ने उस राक्षस को जीतते देखा तो एक चाल चली. देवी ने एक मुर्गे का रूप लिया और बोलने लगी. राक्षस को लगा कि सुबह हो गई और वो हार गया, लेकिन जब उसे इस चाल का पता चला तो उसने मुर्गे को मार दिया. जिस जगह उस मुर्गे को मारा गया उसे कुरकुराता कहते हैं, साथ ही उस आधी बनी सीढ़ियों को Mekhelauja Path कहते हैं.


9. इस मंदिर में वैसे तो हर वक़्त भक्तों की भीड़ लगी होती है, लेकिन दुर्गा पूजा, पोहान बिया, दुर्गादेऊल, वसंती पूजा, मदानदेऊल, अम्बुवासी और मनासा पूजा पर इस मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है.



भारत में मंदिर तो कई हैं और हर मंदिर के पीछे एक कहानी है. लेकिन कुछ मंदिर ऐसे हैं जिनसे जुड़े तथ्य और कहानियां उन्हें दूसरो से सिर्फ़ अलग ही नही करते बल्कि उनकी महत्ता बढ़ा देते हैं. किसी मंदिर के बारे में ऐसे तथ्य अगर आपके पास भी हों तो Comments Box में हमारे साथ ज़रूर शेयर करें.
Source: bhaskar
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