दुनिया का विनाश करने आ रहा है एक महाभूकम्प

इक्कीसवीं सदी में हमारी धरती कुछ ज़्यादा ही हिलने लगी है, या फिर हो सकता है कि हम टेक्नोलॉजी के मामले में इतना आगे चले गए हैं कि हम हर हलचल को पहले ही भांप लेते हैं. अब यदि दुनिया के मशहूर न्यूक्लीयर इंजीनियर डॉ केशे की बातों को सच मानें तो उत्तर और दक्षिण अमेरिका को ऐसी त्रासदी का सामना करना पड़ेगा कि वे आपस में बंट जाएंगे. निकट भविष्य में सुनामी तूफ़ानों की वजह से लगभग 4 करोड़ लोगों के जान चले जाने की भी संभावना है.



डॉ केशे द्वारा कही गई बातों का महत्व उस वक़्त और बढ़ जाता है जब अमेरिका और कनाडा जैसे विकसित देशों ने "ग्रेट शेक आउट" नाम से एक मौक-ड्रिल का भी आयोजन किया था. इस मौक-ड्रिल में इन दोनों देशों के प्रमुख शहरों के भूकम्प की चपेट में आने पर आपातकाल बचाव राहत पर काम किया गया था.



इरान के मशहूर न्यूक्लीयर इंजीनियर डॉ मेहरान केशे दावा करते हैं कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में 6 से 8.3 मैग्नीट्यूड तीव्रता के भूकम्पीय झटके तो आगामी भारी भूकम्प की पहली कड़ी हैं. वे कहते हैं कि अब से अगले वसंत के बीच ऐसे तबाही के मंजर देखने को मिल सकते है. वे कहते हैं कि दक्षिण अमेरिकी द्वीप की प्राकृतिक कमज़ोरी उस भूकम्प के लिए केन्द्र बिंदू हो सकती है. वे इस बात पर जोर देते हुए कहते हैं कि 10 से 16 मैग्नीट्यूड तीव्रता के झटके यहां और दूसरे स्थानों पर 20 से 24 मैग्नीट्यूड तीव्रता के झटके महसूस किए जाएंगे. वे कहते हैं कि उत्तर और दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट के किनारे रहने वाले 2 करोड़ लोग सीधे-सीधे इस तबाही की जद में आएंगे, महर दक्षिणी गोलार्द्ध महाद्वीप इससे बुरी तरह तबाह हो जाएगा क्योंकि यह उत्तर से कट कर अलग हो जाएगा.



Source: thedailyjournalist



दूसरे देशों के बारे में बात करते हुए वे कहते हैं कि, “उत्तरी चीन में भूकम्पों की कड़ी देखने को मिलेगी, चीन और जापान इससे बुरी तरह तबाह होंगे तो वहीं कैरेबियाई इलाके भी इससे भारी तबाही का शिकार होंगे.” वे आगे कहते हैं कि, “विश्व की अर्थव्यवस्था इस झटके से धराशायी हो जाएगी. वे चाहते हैं कि ऐसा कुछ भी नहीं हो, मगर जहां तक वे जानते हैं, यह अटल और अवश्यंभावी है और द्वीपों का विघटन तो अनिवार्य ही समझें.
दुनिया का विनाश करने आ रहा है एक महाभूकम्प दुनिया का विनाश करने आ रहा है एक महाभूकम्प Reviewed by Rajmal Menariya on 9:38 PM Rating: 5