क्या आपको पता है राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे का इतिहास - पढ़े

तिरंगे के बारे में दी गयी उपरोक्त मूल बातें तो सभी भारतीय जानतें है पर बहुत कम युवा जानतें होंगे कि राष्ट्रीय ध्वज का निर्माण आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम के निकट भाटलापेन्नुमारु नामक क्षेत्र में रहने वाले देशभक्त पिंगली वैंकैया ने किया था। मूल बातों के अतिरिक्त तिरंगे से जुडी कई अन्य दिलचस्प जानकारियां और फैक्ट्स है जो बहुत कम लोग जानतें है आज हम उन्हीं तथ्यों को आपके सामने रख रहे है।



1. भारत के लिए पहला ध्वज: 

कलकत्ता के ग्रीन पार्क में 7 अगस्त 1906 को फहराया गया था पर वह तत्कालीन तिरंगे जैसे नही था उस वक़्त का झंडा लाल,पीले और हरे रंग का था पर अब भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के उपर केसरिया रंग है जो भारत की शक्ति और कुर्बानी को दर्शाता और बीच में शामिल सफेद रंग की पट्टी सत्य और सबके लिए सामान भाव का प्रदर्शन करती है। सफेद रंग के बीच एक गोल चक्र बना होता है जिसे धर्म चक्र कहा जाता है इसे तृतीय शताब्दी ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक के राजसी चिन्ह से लिया गया है।

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2. राष्ट्रीय ध्वज में यह गहरे नीले रंग के रूप में शामिल किया गया है और इसके अंदर 24 लाइनें होती है जिसका अर्थ है जीवन और विकास निरंतर चलता रहता है। तिरंगे के अंतिम में गहरा हरा रंग होता है जो भारत भूमि की पवित्रता और उनकी हरयाली का प्रतीक है। राष्ट्रीय ध्वज का अनुपात 2:3 होता हो तो भारतीय ध्वज संहिता नियम अनुसार भारतीय झंडा खादी में ही बना होना चाहिए।

3. राष्ट्रीय ध्वज का प्रगतिशील और अहम सफर
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का प्रगतिशील और अहम सफर 1921 से तब शुरू होता है जब सर्वप्रथम महात्मा गाँधी जी ने भारत देश के लिए झंडे की बात कही थी और उस समय जो ध्वज पिंगली वैंकैया जी ने तैयार किया था उसमे सिर्फ दो रंग लाल और हरे थे। लाल रंग हिन्दुओं और हरा रंग मुसलमानों का प्रतीक था




4. सफेद रंग और चरखा जोड़ने का सुझाव
झंडे के बीच में सफेद रंग और चरखा जोड़ने का सुझाव बाद में गाँधी जी लाला हंसराज की सलाह पर दिया था। सफेद रंग के शामिल होने से सर्वधर्म सामान का भाव और चरखे से ध्वज के स्वदेशी होने की झलक भी मिलने लगी। इसके बाद भी झंडे में कई परिवर्तन किए गयें।





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5. अंतिम रूप
2 अप्रैल 1931 को जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल,मौलाना आजाद,मास्टर तारा सिंह, काका कालेलकर, डॉक्टर हार्डेकर और पट्टाभी सितारमैया आदि ने मिलकर तिरंगे को अंतिम रूप दिया और 1931 में ही कराची में होने वाली कांग्रेस कमेटी की बैठक में पिंगली वैंकाया ने नया तिरंगा पेश कर दिया।



अंग्रेजों जब 1947 में देश छोड़कर जा रहे थे तब वायसरॉय लार्ड माउंटबेटेन ने 24 जून 1947 को भारत के राष्ट्रीय ध्वज में ब्रिटिश यूनियन जैक को शामिल करने का प्रस्ताव संविधान सभा में शामिल डाक्टर राजेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में बनी एडॉक कमेटी जिसमें मौलाना आजाद,केएम मुंशी,सरोजनी नायडू,सी राजगोपालाचारी और बी आर अंबेडकर के सामने रखा था।



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वायसरॉय लार्ड माउंटबेटेन ब्रिटिश यूनियन जैक के प्रस्ताव का देश के अधिकतर लोगो ने विरोध किया था पर महत्मा गाँधी जी माउंटबेटेन के पक्ष में थे इसके पीछे उनका तर्क था कि भारत अपनी महान संस्कृति और परंपरा के तौर पर अगर यूनियन जैक को शामिल कर लेता है तो इसमे किसी को हर्ज नही होना चाहिए।



नेहरू और एडॉक कमेटी ने गाँधी जी की बात को अधिक महत्व ना देते हुए लार्ड माउंटबेटेन की सुझाव को सिरे से ख़ारिज कर दिया और 3 हफ्ते विचार विमर्श करने के बाद 14 जुलाई 1947 को कमेटी ने भारतीय ध्वज में हल्का परिवतर्न करते हुए तिरंगे को कायम रखा।

6. अशोक स्तंभ
भारत के राष्ट्रीय ध्वज में चरखे की जगह अशोक स्तंभ से लिए गये अशोक चक्र को चुनने से महात्मा गाँधी खफा हो गये थे और 6 अगस्त 1947 को अपनी नारजगी वह यह तक कह गये कि भारतीय संघ के झंडे में चरखा नहीं हुआ तो मैं उसे सलाम नही करूंगा इसके पीछे उनका तर्क था कि चक्र अशोक की लाट से चुना है और यह हिंसा को दर्शाता है और उन्होंने आजादी की सम्पूर्ण लड़ाई अहिंसा के सिद्धांत पर लड़ी है। नेहरु और पटेल को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने गाँधी जी तिरंगे में चक्र का मतलब विकास बताया और यें भी कहा कि तिरंगे में अशोक चक्र अहिंसा का प्रतीक चरखे का ही एक रूप है जिसके बाद गाँधी जी ने पूर्ण सहमत ना होते हुए भी अशोक चक्र वाले तिरंगे के लिए मान गयें।



देश के आजाद होने के बाद 22 जुलाई 1947 के दिन पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा की सहमति से तिरंगे झंडे को कानूनी रूप से राष्ट्रीय ध्वज घोषित कर दिया और तिरंगे का वही स्वरूप आज भी राष्ट्रीय ध्वज के रूप में कायम है।


देश बेशक 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया था लेकिन आजाद देश में लाल किले से तिरंगे झंडे को सर्वप्रथम नेहरू ने 16 अगस्त 1947 में फहराया था।

7. ध्वज फहराने के नियम: 
गणतंत्र लागू होने के बाद 1 9 51 में बीआईएस ने ध्वज फहराने के नियम और विशिष्ट गुणों को देश के सामने रखा जिसमे कहा गया कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज के निर्माण दोष को अत्यंत गंभीर अपराध समझा जाएगा और ऐसा करने वाले को जुर्माना या जेल या दोनों ही रूप से दंडित किया जा सकता है। 


8. झंडे बनाने का मानक:
झंडे बनाने का मानक 1968 में तय किया गया जिसे 2008 में पुन संशोधित किया गया। 1968 में तिरंगे निर्माण के नियम अत्यंत कड़े थे जिसमे हाथ से काता गया कपड़ा से ही झंडा बनाने का नियम भी शामिल थे पर संशोधन के बाद इसमे नरमी बरती गयी।

भारत में बैंगलुरू से 420 किमी स्थित ”’हुबली”’ एक मात्र लाइसेंस प्राप्त संस्थान है जो झंडा बनाने का और सप्लाई करने का काम करता है।

बीआईएस झंडे की जांच के बाद ही बाजार में झंडे को बेचने की आज्ञा दी जाती है।

9. जनता को राष्ट्रीय फहराने की अनुमति
भारत देश को राष्ट्रीय ध्वज तो मिल गया पर भारतीय जनता को राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा सन 2002 में नवीन जिंदल की याचिका के बाद मिला। 26 जनवरी 2002 में उस समय के केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन कर देशवासियों को कही भी किसी भी दिन आदर और सम्मान पूर्वक फहराने की अनुमति दें दी।

पूरे भारतवर्ष में 21 x 14 फीट के झंडे केवल तीन स्थानों पर ही फहराएं जाते है। वह तीनों स्थान क्रमश: कर्नाटक का नारगुंड किला, महाराष्ट्र का पनहाला किले और मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में स्थित किला है।

10. शोक या मृत्यु के सम्मान
वैसे तो तिरंगा कभी झुकता नही है पर भारत के लिए अदभुत अलौकिक और गौरवशाली काम करने वाले लोगो की मृत्यु पर तिरंगा भी हल्का झुक जाता है। शोक या मृत्यु के सम्मान के समय राष्ट्रपति की आज्ञा और उनके दिए समय पर ही आधा झुका झंडा फहराया जा सकता है लेकिन जैसे ही मृत शरीर बाहर निकाला जाता है वैसे ही तिरंगे को पूर्ण सम्मान के साथ पूरी उचाई के साथ फहराना चाहिए।

जब तिरंगा फहराने लायक नही होता है या फिर मृत शरीरों पर से उतारे गए ध्वज हो दोनों को ही गोपनीय तरीके से पूर्ण सम्मान से जलाया जाता है या फिर नदी में भार बंधकर उसे जल समाधि दे दी जाती है।

11. सोने के स्तंभ पर हीरे-जवाहरातों से जड़ा तिरंगा
राष्ट्रपति भवन के संग्रहालय में सोने के स्तंभ पर हीरे-जवाहरातों से जड़ा तिरंगा रखा है जो संग्रहालय भवन की शोभा को बढ़ा रहा है।

29 मई 1953 में भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा सबसे ऊंची पर्वत की चोटी माउंट एवरेस्ट पर यूनियन जैक तथा नेपाली राष्ट्रीय ध्वज के साथ फहराता नजर आया था इस समय शेरपा तेनजिंग और एडमंड माउंट हिलेरी ने एवरेस्ट फतह की थी।

12. उत्तरी ध्रुव में तिरंगा
पहली बार 21 अप्रैल 1996 के दिन स्क्वाड्रन लीडर संजय थापर ने तिरंगे की शान बढाते हुए एम. आई.-8 हेलिकॉप्टर से 10000 फीट की ऊंचाई से कूदकर देश के झंडे को उत्तरी ध्रुव में फहराया था।




13. चन्द्रमा और अंतरिक्ष में तिरंगा
वर्तमान में तिरंगा सिर्फ धरती पर ही भारत की संस्कृति और विचारों की अगवाई नही कर रहा है अपितु भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा चन्द्रमा पर भी फहरा रहा है। 1984 में विंग कमांडर राकेश शर्मा ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को लेकर अंतरिक्ष के लिए पहली उड़ान भरी थी।



14. मानव झंडा
दिसंबर 2014 से चेन्नई में 50,000 स्वयंसेवकों द्वारा मानव झंडा बनाने का विश्व रिकॉर्ड भी भारतीयों के पास ही है।


हम अपने इस लेख से तिरंगे झंडे से जुड़े कुछ फैक्ट्स आपके साथ शेयर कर रहे है साथ में समस्त भारतवासियों से यह आग्रह भी कर रहे है कि वह तिरंगे के नियमों की अच्छे से जानकारी ले ताकि भारत के नागरिकों के घरों, कार्यालयों और फैक्रीभी में पूर्ण नियम,सम्मान और गर्व के साथ तिरंगे को फहरा सके और आपने अंदर देशभक्ति के उस भाव को महसूस कर सकें जो आजादी के परवानों के दिल में था।

source : History of Indian Tricolor

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