सत्य घटनाओं पर आधारित कुछ फिल्मे जो सबको देखनी चाहिए

फ़िल्मों की शुरुआत में एक सूचना दी जाती है कि 'इस फ़िल्म के सभी पात्र काल्पनिक हैं'. लेकिन बॉलीवुड में कई फ़िल्में ऐसी भी बनी हैं जो सत्य कहानियों और घटनाओं पर आधारित हैं. वो बात अलग है कि हर निर्देशक का अपना दृष्टिकोण होता है और वो इन कहानियों को अपने तरीके से बताता है. तो देखते हैं कि कौन-कौन सी फिल्मों का वास्तविकता से कितना गहरा रिश्ता है.





1. गांधी
महात्मा गांधी के जीवन और आज़ादी के संघर्ष पर बनी हॉलीवुड की इस प्रसिद्ध फ़िल्म ने पूरी दुनिया में अपना नाम बनाया. बेन किंग्सले को गांधी के अभिनय के लिए ऑस्कर अवार्ड भी मिला था.




2. सरदार
लोह पुरुष, सरदार वल्लभभाई पटेल पर बनी इस फ़िल्म में सरदार, गांधी और नेहरू के रिश्तों और विचारधाराओं को बख़ूबी दिखाया गया था. सरदार के रोल में परेश रावल का अभिनय बहुत ही शानदार था.





3. ज़ुबैदा
कैसे एक मां नयी ज़िंदगी की तलाश में अपने बेटे को छोड़ देती है, ज़ुबैदा की कहानी यही थी. असल में ज़ुबैदा बेग़म ने जोधपुर के हनवंत सिंह से विवाह कर लिया था और अपने बेटे ख़ालिद मोहम्मद को जोधपुर में जीवन की नयी शुरुआत करने के लिए छोड़ दिया. इस फ़िल्म में ज़ुबैदा और उनके बेटे के संघर्ष को दर्शाया है.






4. भाग मिल्खा भाग
'फ्लाइंग सिख' के नाम से मशहूर, भारतीय धावक मिल्खा सिंह की कहानी हर हिन्दुस्तानी के लिए प्रेरणा का स्रोत है और राकेश ओमप्रकाश मेहरा की 2013 में आयी 'भाग मिल्खा भाग' भी मिल्खा सिंह की तरह एक शानदार मूवी है.




5. एक डॉक्टर की मौत
ये फ़िल्म डॉक्टर सुभाष मुखोपाध्याय के जीवन पर आधारित है जो एक प्रतिभाशाली भौतिकशास्त्री और IVF ट्रीटमेंट के विशेषज्ञ थे. लेकिन राजनीति की वजह से उन्हें काफ़ी प्रताड़ना झेलनी पड़ी और उन्होंने ख़ुदकुशी कर ली. इस फ़िल्म में डॉक्टर मुखोपाध्याय का किरदार पंकज कपूर ने बड़ी बख़ूबी निभाया था.





6. पान सिंह तोमर
पान सिंह तोमर की कहानी जितनी रोमांचक है उतनी ही दु:खद भी है. कैसे एक भारतीय आर्मी का जवान, बाधा दौड़ में राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय मेडल का विजेता बन जाता है चंबल का डाकू. तिग्मांशु धूलिया का निर्देशन और इरफ़ान खान का अभिनय बहुत ही उम्दा है.





7. बैंडिट क्वीन
चम्बल की कुख्यात डाकू फूलन देवी ने अपने जीवन में कई प्रताड़नाएं झेली हैं. बाल विवाह से लेकर बलात्कार की शिकार हुई फूलन देवी ने जब एक खूंखार डाकू बनने की ठानी तो पुलिस से लेकर प्रशासन तक को हिला डाला. शेखर कपूर की ये फ़िल्म सत्य से काफ़ी नज़दीक थी और इसीलिए इसने कई अवार्ड्स भी जीते.





8. शाहिद
ये कहानी थी मुंबई के वकील शाहिद आज़मी की. मुंबई दंगों के समय कई निर्दोष लोगों को विवादस्पद कानून POTA के तहत जेल जाना पड़ा. शाहिद आज़मी ने इन लोगों को न्याय दिलाने के लिए लम्बी कानूनन लड़ाई लड़ी थी जिसकी वजह से उन्हें काफ़ी मुश्किलें झेलनी पड़ीं. राजकुमार राव ने शाहिद का किरदार निभाया था और उनके अभिनय की बड़ी सराहना हुई थी.





9. डर्टी पिक्चर
दक्षिण भारत की सेक्सी अदाकारा, सिल्क स्मिता के फिल्मी सफ़र पर बनी इस फ़िल्म में विद्या बालन ने अभिनय किया था. सिल्क स्मिता के किरदार को विद्या ने बहुत ही शानदार तरीके से निभाया था.





10. स्पेशल 26
1987 में मुंबई के ज़ावेरी बाज़ार में कुछ लोगों ने नकली सीबीआई अफ़सर बन कर इनकम टैक्स की रेड मारी थी और लाखों रुपये लूट लिए थे. ये फ़िल्म उसी घटना पर आधारित थी. अक्षय कुमार, अनुपम खेर और मनोज बाजपाई को अपने अभिनय के लिए बहुत वाहवाही मिली थी.




11. नो वन किल्ड जेसिका
बहुचर्चित जेसिका लाल मर्डर केस पर बनी इस राजनैतिक थ्रिलर फ़िल्म ने काफ़ी अवार्ड्स जीते थे. जेसिका लाल की बहन के रोल में विद्या बालन और संवाददाता के रोल में रानी मुख़र्जी का अभिनय शानदार था.



12. रक्त चरित्र
ये फ़िल्म आंध्र प्रदेश के राजनैतिक नेता परिटाला रवि के जीवन पर बनी थी जिनकी हत्या कर दी गयी थी. विवेक ओबेरॉय ने रवि का किरदार अदा किया था और शत्रुघ्न सिन्हा ने एन टी रामाराव का.




13. ब्लैक फ्राइडे
अनुराग कश्यप की 1993 मुंबई ब्लास्ट पर बनी इस विवादस्पद फ़िल्म को शुरुआत में सेंसर बोर्ड से रिलीज़ की अनुमति नहीं मिली थी. फिर 2007 में ये फ़िल्म भारत में रिलीज़ हुई. सभी कलाकारों ने इस फ़िल्म में अपनी भूमिका बख़ूबी निभायी थी.


अगर आपको दूसरी फ़िल्में पता हैं जो सत्य घटनाओं पर आधारित हैं तो कमेंट बॉक्स के माद्यम से बताये
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