जाने कालभैरव मंदिर के बारे में

तीर्थ नगरी उज्जैन में कालभैरव का अतिप्राचीन और चमत्कारिक मंदिर है, जहां मूर्ति मदिरापान करती है। यहां उनको मदिरा का ही प्रसाद चढ़ता है। ‍यहां आने से शनि की पीड़ा का तुरंत ही निदान हो जाता है।




वाम मार्गी संप्रदाय के इस मंदिर में कालभैरव की मूर्ति को न सिर्फ मदिरा चढ़ाई जाती है, बल्कि बाबा भी मदिरापान करते हैं। यहां देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु मन्नत मांगने आते हैं।

कालभैरव का यह मंदिर लगभग 6,000 साल पुराना माना जाता है। यह एक वाम मार्गी तांत्रिक मंदिर है। वाम मार्ग के मंदिरों में मांस, मदिरा, बलि, मुद्रा जैसे प्रसाद चढ़ाए जाते हैं। प्राचीन समय में यहां सिर्फ तांत्रिकों को ही आने की अनुमति थी। वे ही यहां तांत्रिक क्रियाएं करते थे और कुछ विशेष अवसरों पर कालभैरव को मदिरा का भोग भी चढ़ाया जाता था। कालांतर में यह मंदिर आम लोगों के लिए खोल दिया गया, लेकिन बाबा ने भोग स्वीकारना यूं ही जारी रखा।
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